उज्जैन. भगवान महाकाल के आंगन में सबसे पहले त्योहार मनाए जाने की परंपरा रही है। इसी क्रम में रक्षाबंधन का पर्व सबसे पहले मंदिर में मनाया जाएगा। सुबह भस्म आरती में बाबा महाकाल को राखी बांधी जाएगी, इसके बाद असंख्य लड्डुओं का महा भोग लगाया जाएगा। दर्शन के लिए आने वाले भक्तों को प्रसादी का वितरण होगा। इस बार 30 अगस्त को सावन पूर्णिमा रक्षाबंधन पर महाकालेश्वर मंदिर में पुजारी परिवार द्वारा बाबा महाकाल को असंख्य लड्डुओं का महा भोग लगाया जाएगा। इस क्रम में इस बार भी भस्म आरती करने वाले पुजारी परिवार द्वारा बाबा महाकाल को लड्डुओं का भोग अर्पण किया जाएगा। परंपरा से राजा महाकाल को सावन पूर्णिमा पर सबसे पहले राखी बांधी जाती है। भस्म आरती के दौरान बाबा को राखी बांधने के बाद लड्डुओं का महाभोग प्रसादी का अर्पण किया जाएगा। दिनभर प्रसादी वितरण का सिलसिला लगातार जारी रहेगा।
बाबा महाकाल को 56 भोग लगाया
पुरुषोत्तम श्रावण माह (अधिक माह) कृष्ण पक्ष अमावस्या अधिक माह पूर्ण होने के उपलक्ष्य में राजाधिराज बाबा महाकालेश्वर जी को परंपरागत 56 भोग (अन्नकूट) महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी गौरव शर्मा ,पुजारी शरद चंद्र शर्मा ,पुजारी उमेशादित्य शर्मा एवम पुजारी परिवार द्वारा लगाया गया।