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कांग्रेस को पता ही नहीं अब्दुल समद लौट गए समाजवादी पार्टी में
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कांग्रेस को पता ही नहीं अब्दुल समद लौट गए समाजवादी पार्टी में

सपा के प्रत्याशियों के लिए कर रहे प्रचार। पत्रिका से बातचीत में कहा मेरे पास दोनों दल की सदस्यता।

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वाराणसी. एक तरफ जहां बीजेपी ने सपा की जिला पंचायत अध्यक्ष अपराजिता सोनकर को पार्टी में शामिल करा कर समाजवादी पार्टी को करारा झटका दिया वहीं अब विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण करने वाले समाजवादी पार्टी के नेता अब्दुल समद ने ऐन निकाय चुनाव के दौरान कांग्रेस से किनारा कस लिया। वह सपा का दोपट्टा ओढ़े और टोपी पहने पार्टी प्रत्याशियों और खासतौर पर अपने समर्थकों के लिए प्राचर में जुट गए हैं। लेकिन इसकी जानकारी कांग्रेस को नहीं है। हालांकि समाजवादी पार्टी उन्हें अपना मान रही है।

बता दें कि विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच गठबंधन हुआ था जिसके तहत कुछ सीटों पर एक दूसरे के नेताओं को उतारा गया है। इसी कड़ी में वाराणसी के शहर उत्तरी विधानसभा क्षेत्र से सपा नेता और पूर्व विधायक अब्दुलल समद अंसारी को कांग्रेस के टिकट पर चुनाव मैदान में उतारा गया था। उस वक्त कांग्रेस के जिलाध्यक्ष प्रजानाथ शर्मा ने उन्हें पार्टी की सदस्यता ग्रहण कराई थी। तब से वह कांग्रेस में ही रहे। कई बार यह सवाल उठा कि वह कहां हैं पर इस विवाद का कोई हल नहीं निकला। इधर बीच निकाय चुनाव की घोषणा होने के बाद जब दलों में प्रत्याशियों के चयन की कार्रवाई चल रही थी तब अब्दुल समद शहर उत्तरी के कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर कांग्रेस कि चुनाव संचालन समिति की बैठकों में शामिल हुए। तब भी यह सवाल उठा था कि वह किस पार्टी में हैं लेकिन उस वक्त भी कांग्रेस अध्य़क्ष शर्मा ने बताया था कि वह कांग्रेस में ही हैं। इस बीच रविवार को हाजी अब्दुल समद को वार्ड नंबर 50 के उम्मीदवार के समर्थन में व्यापक जनसंपर्क करते देखा गया। उन्होंने मध्यमेश्वर, दारानगर ,सप्तसागर, बड़ा गणेश,राजिगर टोला आदि इलाकों में तूफानी दौरा किया। इतना ही नहीं पिछले शुक्रवार को बनारस दौरे पर आए प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम और पूर्व राज्य मंत्री सुरेंद्र पटेल के साथ अंतरंग वार्ता भी की।

हाजी अब्दुल समद अंसारी

इन सबकी जानकारी होने पर जब पत्रिका ने समद से संपर्क किया और पूछा कि वह किस पार्टी में हैं तो उनका जवाब था समाजवादी पार्टी में। यह पूछने पर कि आपने तो कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की थी, जवाब मिला मेरे पास दोनों दलों की सदस्यता है। सपा से न कभी निकाला गया, न मैने इस्तीफ दिया था। वह तो पार्टी की रीति नीति के तहत विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा था। मैं तन मन से समाजवादी पार्टी का हूं, यह सदस्यता मुझे मुलायम सिंह ने दी थी। यह पूछने पर कि क्या कांग्रेस से इस्तीफा दिया है तो जवाब मिला नहीं। कहा न मेरे पास दोनों दलों की सदस्यता है। यह पूछने पर कि आपने कांग्रेस के प्रत्याशी तय करने में भूमिका अदा की, पहले तो उन्होंने इससे इंकार किया फिर कहा हां कांग्रेस का कोरम पूरा नहीं हो रहा था तो एक मीटिंग में गया था।

हाजी अब्दुल समद अंसारी

मेरे पास दोनों दलों की सदस्यता

पत्रिका से बातचीत के दौरान समद ने समाजवादी पार्टी के कई ओहदेदारों और पूर्व मंत्रियों के खिलाफ भी अपनी भड़ास निकाली। कहा ऐसे ही लोग पार्टी को कमजोर कर रहे हैं। उनका इशारा पूर्व पीडब्ल्यूडी राज्य मंत्री और एक दर्जा प्राप्त मंत्री की ओर था। उन्होंने कहा कि मैं तो समाजवादी हूं और रहूंगा। पार्टी के लिए जो कुछ हो सकेगा करता रहूंगा। उन्होंने सपा द्वारा नगर निगम चुनाव में टिकट बंटवारे पर भी सवाल उठाया और कहा कि इसका परिणाम उन्हें भुगतना पड़ेगा। साथ ही कहा कि ये सारी जानकारी प्रदेश अध्यक्ष को दे दी है। जहां तक कांग्रेस का सवाल है तो वह निकाल दे मुझे।

 

समद सपा में चले गए यह तो पता ही नहीं

इस संबंध में जब पत्रिका ने कांग्रेस के जिलाध्यक्ष प्रजानाथ शर्मा से संपर्क किया तो वह यह सुन कर चौंक गए कि समद अब वापस सपा में लौट गए हैं। उन्होंने कहा कि अभी तक ऐसी कोई जानकारी नहीं कि वह सपा के लिए काम कर रहे हैं। अगर उन्हें सपा में लौटना था तो कांग्रेस से इस्तीफ देना चाहिए था। लेकिन पत्रिका से मिली जानकारी के बाद प्रदेश अध्यक्ष व अनुशासन समिति से इस मुद्दे पर वार्ता करूंगा, उनके खिलाफ निलंबन की कार्रवाई होगी।

 

समद तो सपा के हैं ही
सपा के जिला अध्यक्ष डॉ पीयूष यादव से जब पत्रिका ने संपर्क किया तो उनका एक लाइन का जवाब था कि वह तो सपा के ही हैं। विधानसभा चुनाव में तो वह गठबंधन के तहत कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े थे।