
डॉ अजय कृष्ण चतुर्वेदी
वाराणसी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट विश्वनाथ कॉरीडोर, गंगा पाथवे परियोजना की जद में यूं तो सैकड़ों वर्ष पुराने कई देवालय हैं। कई ऐतिहासिक, धार्मिक व राजनीतिक महत्व वाली इमारते हैं। इन सभी को ध्वस्त करने की योजना है। मंदिर प्रशासन आधा काम तो निबटा चुका है। लेकिन इस योजना के तहत एक अति महत्वपूर्ण ललिताघाट का पशुपति नाथ ? मंदिर भी है जिसे राज राजेश्वरी मंदिर के नाम से भी जाना जाता है को भी तोड़ा जाना है। बताते हैं कि 18वीं सदी में नेपाल राजघराना ने इस मंदिर का निर्माण कराया था। इस मंदिर के बारे में मान्यता है कि इसमें काठमांडू स्थित पशुपतिनाथ महादेव का अंश है। यही नहीं इसे नेपाली खजुराहो मंदिर के रूप में भी जाना जाता है।


भारत नेपाल संबंधों के जानकार प्रो. राणा पीबी सिंह ने पत्रिका से बातचीत में बताया कि 1790 में इस मंदिर की सविधि आधारशिला रखी गई। 1850 में मंदिर बन कर तैयार हुआ, इसमें भगवान पशुपति नाथ जी की प्रतिमा की सविधि प्राण प्रतिष्ठा की गई, तभी से यहां पशुपति नाथ जी की पूजा अर्चना चल रही है। इसे तीन लेयर में तैयार किया गया है। ठीक उसी तरह जैसे काठमांडू का पशुपति नाथ मंदिर है। यह मंदिर बहुत कुछ खजुराहो के मंदिर की भी याद ताजा करता है। इस मंदिर परिसर में ही धर्मशाला भी है। इसका सरोकार सीधे-सीधे नेपाल के राणा राज परिवार और कोइराला परिवार से है। उन्होंने बताया कि इस मंदिर पर कई शोध हो चुके हैं। कई किताबें छप चुकी हैं। यह न केवल धार्मिक बल्कि ऐतिहासिक व राजनीतिक महत्व वाली जगह भी है। नेपाल में जब कभी राज परिवार (राणा परिवार) या कोइराला परिवार पर संकट आया वो लोग यहीं आ कर रहते रहे। कोइराला परिवार के बच्चे यहीं रह कर शिक्षा-दीक्षा ग्रहण करते रहे हैं। प्रो. राणा ने बताया कि यूं तो काशी में पशुपति नाथ के पांच मंदिर हैं लेकिन इस ललिता घाट स्थित राजराजेश्वरी मंदिर में काठमांडू स्थित पशुपति नाथ का अंश विद्यमान है ऐसी धार्मिक मान्यता है।
इस संबंध में नेपाल में वर्षों गुजारने वाले संकट मोचन मंदिर के महंत स्व. प्रो. वीरभद्र मिश्र के सबसे छोटे पुत्र व वर्मान महंत प्रो विश्वंभर नाथ मिश्र के अनुज न्यूरोलॉजिस्ट डॉ विजय नाथ मिश्र ने पत्रिका को बताया कि जब से लोगों ने सुना है कि श्री विश्वनाथ कॉरीडोर के नाम पर इस मंदिर को भी ध्वस्त किया जाएगा, काशी ही नहीं नेपाल निवासी, पशुपति नाथ जी के भक्तों में काफी निराशा और गुस्सा है। उनकी आस्था को गहरा आघात पहुंचा है। वो इसके लिए कुछ भी करने को तैयार हैं। कई भक्त ऐसे हैं जिन्हें जैसे ही यह परियोजना की जानकारी मिली उनकी आंखों में आंसू आ गए। यहां रहने वाले नेपाली बंधुओं का भी मानना है कि इतने प्राचीन मंदिर को जो हजारों हजार श्रद्धालुओं के आस्था का केंद्र है कोई सरकार कैसे गिरा सकती है। इस मंदिर की स्थापत्य कला को क्या आज के कलाकार जस का तस उतार सकते हैं। इस मंदिर की दीवारों पर जो चित्र उकेरे गए हैं क्या उन्हें दोबारा वैसे ही उकेरा जा सकता है। यह न केवल आस्थावानों की भावनाओं से खिलवाड़ है बल्कि दो देशों के मैत्री संबंधों पर भी आघात है। लोग इन दिनों रोजाना भगवान पशुपति नाथ से प्रार्थना कर रहे हैं कि अब आप ही हम श्रद्धालुओं की आस्था की रक्षा करें। खुद का अस्तित्व आप खुद ही बचाएं। डॉ मिश्र ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व केंद्र व राज्य सरकार से अर्ज किया है कि वो इस पौराणिक घाट, पशुपति नाथ मंदिर को नष्ट न करें। पाथ वे बनाएं, गलियां दुरुस्त करें, पर ऐतिहासिक, पौराणिक महत्व वाले मंदिर, मठ, घाट को न गिराया जाए।

