
वाराणसी. विश्वनाथ कॉरिडोर और गंगा पाथ वे निर्माण की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अति महत्वाकांक्षी योजना को मूर्त रूप देने की आड़ में विश्वनाथ मंदिर परिक्षेत्र स्थित जिस पशुपत? नाथ थ के 18वीं सदी के मंदिर को ध्वस्त किया जाना है, उसका मसला अब तूल पकड़ता जा रहा है। इस मसले पर काशी से लेकर नेपाल तक के पशुपतिनाथ के भक्तों में जबरदस्त उबाल है। वे हर कीमत पर इस मंदिर को बचाने के लिए जुट गए हैं। इस मुद्दे पर साउथ एशिया फ़ाउंडेशन के सेक्रेट्री जनरल, राहुल बरुआ जल्द ही काठमांडू में नेपाले के प्रधानमंत्री के पी ओली से भेंट करेंगे। बता दें कि मई में भारत के प्रधानमंत्री नेपाल जाने वाले हैं। ऐसे में साउथ एशिया फाउंडेशन के सेक्रेट्री जनरल की नेपाल के प्रधानमंत्री से वार्ता काफी महत्वपूर्म मानी जा रही है। बताया जा रहा है कि वार्ता के दौरान बरुआ नेपाल के प्रधानमंत्री को काशी में स्थापित भगवान पशुपति नाथ के मंदिर के गिराए जाने के बाबत घटना की पूरी जानकारी देंगे। बता दें कि इस मंदिर के बाबत डिटेल खबर सबसे पहले पत्रिका ने ही 23 अप्रैल को प्रसारित की थी।
साउथ एशिया फ़ाउंडेशन के सेक्रेट्री जनरल, राहुल बरुआ ने पत्रिका से हुई टेलीफोनिक बातचीत में बताया कि उन्होंने घटनाक्रम की जानकारी नेपाल के सभी मंत्रियों को दे दी है। शुक्रवार को मैं नेपाल जा रहा हूं। वहां एक दो दिन में काठमांडू में नेपाले के प्रधानमंत्री के पी ओली से भेंट कर घटनाक्रम की जानकारी दूंगा। उनसे आग्रह करूंगा कि मई में जब भारत के पीएम नरेंद्र मोदी नेपाल आएं तब उनसे इस बाबत वार्ता करें। उससे पहले भारत सरकार को पत्र लिखें। यह भी बताया कि इस मुद्दे पर दूतावास को भी वस्तुस्थिति से अवगत करा दिया गया है।
संकट मोचन मंदिर के महंत प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्र के अनुज न्यूरोलॉजिस्ट डॉ विजय नाथ मिश्र ने पत्रिका से बातचीत में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वह बुधवार की शाम नेपाली खपड़ा स्थित पशुपति नाथ मंदिर गए थे। इस दौरान काशी में नेपाली संगठन के सचिव अधिकारी जी से एवं पुजारी जी से हुई भेंट में उन्होंने बताया कि काशी से लेकर नेपाल तक का समाज इस मंदिर की रक्षा के लिए एकजुट हो रहा है। इसी कड़ी में बरुआ जी नेपाल के प्रधानमंत्री से मिलने वाले हैं। नेपाली समाज ने बताया कि मई में प्रधानमंत्री मोदी की नेपाल यात्रा के मद्देनजर काशी में 18वीं सदी में नेपाल के राज परिवार द्वारा निर्मित इस महान शिप्लकला वाले मंदिर को बचाने के लिए, नेपाली समुदाय एकजुट हो रहा है।
विजय नाथ मिश्र ने बताया कि उन्हें जो जानकारी मिली है उसके मुताबिक काठमांडू के न्यू बानेशवर में काशी के पशुपतिनाथ मंदिर को लेकर जो बातें आ रहीं हैं, उस पर गंभीरता से विचार विमर्श हुआ। अध्यक्षता सूरज पराजूली ने किया। उन्होंने बताया कि मिली जानकारी के मुताबकि विश्वनाथ कॉरिडोर व गंगा पाथ वे योजना के तहत 167 नही बल्कि 266 भवनों को गिराया जाना है, विशालाक्षी मंदिर भी इसकी जद में है।
बता दें कि भारत नेपाल संबंधों के जानकार प्रो. राणा पीबी सिंह ने 23 अप्रैल को ही पत्रिका से बातचीत में बताया था कि 1790 में इस मंदिर की आधारशिला रखी गई थी, 1850 में मंदिर बन कर तैयार हुआ, इसमें भगवान पशुपति नाथ जी की प्रतिमा की सविधि प्राण प्रतिष्ठा की गई, तभी से यहां पशुपति नाथ जी की पूजा अर्चना चल रही है। इसे तीन लेयर में तैयार किया गया है। ठीक वैसे ही जैसे काठमांडू का पशुपति नाथ मंदिर है। यह मंदिर बहुत कुछ खजुराहो के मंदिर की भी याद ताजा करता है। इस मंदिर परिसर में ही धर्मशाला भी है। इसका सरोकार सीधे-सीधे नेपाल के राणा राज परिवार और कोइराला परिवार से है।
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