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बहुचर्चित दीपक कुशवाह हत्याकांड में 20 लोगों को 10-10 वर्ष की सजा

हत्या के बाद शहर में हुआ था बल्वा, आगजनी और लगा था कफ्र्यू

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सजा

विदिशा. भारी पुलिस निगरानी के बीच अपराधियों को भेजा गया जेल।

विदिशा. नगर में 12 नवम्बर 2016 को हुए गुठान निवासी दीपक कुशवाह हत्याकांड मामले को न्यायालय ने हत्या की श्रेणी में न मानते हुए सदोष मानव वध माना है।

इस मामले में प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश आत्माराम टांक ने 20 लोगों को 10-10 वर्ष के सश्रम कारावास और 5-5 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई है। मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी अपर लोक अभियोजक प्रदीप श्रीवास्तव ने की। फैसले के समय अदालत के बाहर बड़ी संख्या में पुलिस बल और भारी भीड़ एकत्रित थी।

अपर लोक अभियोजक प्रदीप श्रीवास्तव ने बताया कि 12 नवम्बर को दीपक कुशवाह हत्याकांड मामले में पुलिस ने न्यायालय में अभियोग पत्र पेश किया था। इस पर न्यायालय ने भादंवि की धारा 294, 147, 148, 302/149 के तहत विचारण किया।

साक्ष्य और तर्क दिए गए और उसके आधार पर न्यायालय ने भादंवि की धारा 304 भाग 1के तहत सभी 20 आरोपियों को 10-10 वर्ष के सश्रम कारावास और 5-5 हजार रुपए के जुुर्माने से दंडित किया।

$फ्लैशबैक...
12 नवम्बर 2016 को बजरंग दल के नगर सह संयोजक दीपक कुशवाह की दिन दहाड़े कुछ लोगों ने हत्या कर दी। इस घटना के बाद नगर में उपद्रव हो गया। पूरा बाजार बंद हो गया, पथराव हुआ, आमने-सामने झड़पें हुर्इं, ट्रक-जीप आदि में आग लगा दी गई, पुलिस ने लाठी चार्ज किया।

मृतक के शव को पूरे शहर में घुमाते हुए उसके घर ले जाया गया। दूसरे दिन हालात और बिगड़े तथा शहर में 32 वर्ष बाद कफ्र्यू लगा दिया गया। इस दौरान फायर हुए, आंसू गैस छोड़ी गई और पुलिस ने हंगामाईयों पर लाठीचार्ज किया।

इनको हुई सजा...
सद्दाम खां, अफजल खां, किश्वर खां, टीपू उर्फ मो. शादाब, कल्लू उर्फ मो. रफीक, नदीम खां, इकबाल खां, शालू उर्फ जुबेर खां, मोहम्मब आबिद खां, जावेद खां, मोहम्मद हनीफ खां, नवेद खां, अजय राजपूत, नवेश उर्फ नवेद खां, गुड्डा उर्फ सोहिल, हसीब खां, उवेश उर्फ इमरान खां, शानू खां, भैययू पठान उर्फ जावेद तथा इमरान उर्फ भज्जू के नाम शामिल हैं।

सजा सुनते ही रोने लगे आरोपी
5.30 बजे न्यायालय में फैसले के समय सभी आरोपी और उनके कुछ परिजन भी मौजूद थे। गेट पर भारी पुलिस बल तैनात था। जैसे ही न्यायाधीश ने फैसला सुनाया, वैसे ही कुछ आरोपी रो पड़े, जबकि कुछ ने सिर झुकाकर अपनी निराशा का इजहार किया।


न्यायालय के बाहर हुई नारेबाजी
न्यायालय से फैसले के बाद 7.30 बजे के बाद आरोपियों को भारी पुलिस निगरानी के बीच पुलिस वाहन में बैठाया गया। जैसे ही यह वाहन अदालत के गेट से बाहर निकला, बाहर बड़ी संख्या में मौजूद आरोपियों के परिजनों और परिचितों में हड़कम्प मच गया। उनमें से कुछ ने नारेबाजी की, जबकि कुछ लोगों ने नारेबाजी करने से रोका भी।


एसपी खुद रहे मौजूद
फैसला महत्वपूर्ण और संवेदनशील मामले का था, इसलिए अदालत परिसर में एसपी विनायक वर्मा और एसडीएम प्रवीण प्रजापति खुद काफी समय तक मौजूद रहे। इसके अलावा सीएसपी, सिविल लाइन टीआई समेत बड़ी संख्या में पुलिस अधिकारी और सशस्त्र पुलिस न्यायालय परिसर में तैनात रही।


शहर में पुलिस बल तैनात
फैसले के बाद शहर में खासकर पुराने शहर बजरिया, जयस्तंभ क्षेत्र, पेढ़ी, रायसेन गेट आदि के पास पुलिस बल तैनात कर दिया गया। पुलिस बल को अलर्ट किया गया है। उधर रात होते-होते पूरे शहर में इस बहुचर्चित मामले के आरोपियों को सजा के फैसले की चर्चा चलती रही।