
समर्थन की खरीदी को किसानों का समर्थन नहीं, नए नियमों से बनी दूरी
विदिशा। जिले में फसल कटाई का कार्य शुरू हो चुका है। किसान अच्छी पैदावार की संभावना जता रहे, लेकिन इस बार समर्थन मूल्य खरीदी को किसानों का समर्थन न मिलना सामने आ रहा है। इस बार खरीदी केंद्र से किसानों की दूरी बढ़ती दिखाई दे रही है। आंकड़े बताते हैं कि गत वर्ष की अपेक्षा इस बार जिले में 25 हजार कम किसानों ने पंजीयन कराया है।
पंजीयन में घटी संख्या का मुख्य कारण किसान खरीदी में नए नियमों, समर्थन मूल्य अपेक्षानुरूप नहीं होने एवं कर्ज में राशि कटने की आशंका को मान रहे हैं। जानकारी के अनुसार जिले में गत वर्ष 1 लाख 19 हजार 46 किसानों ने समर्थन मूल्य पर अनाज बेचने के लिए पंजीयन कराया था, जो इस वर्ष यह संख्या 93 हजार 923 ही रह गई। इस तरह पिछले वर्ष से 25 हजार 123 कम किसानों ने पंजीयन कराया। किसान नेता राजकुमार बघेल का कहना है कि सरकार ने गेहूं के समर्थन मूल्य 1975 से 2015 रुपए कर दिए इसमें सिर्फ 40 रुपए बढ़ाए गए जबकि इस बार किसानों को फसल में लागत भी अधिक लगी वहीं अब खरीदी केंद्र में छन्ना लगाए जाने का नियम बना दिया और इसमें प्रति क्विंटल पर किसानों को 20 रुपए गेहूं की छनाईपर देना पड़ेगा। इससे छोटे किसानों को 500 तो बड़े किसानों को 20 हजार से अधिक की राशि छनाईकार्यमें ही चली जाएगी। ऐसे में समर्थन मूल्य अपेक्षानुरूप नहीं होने से गेहूं के पंजीयन में किसानों ने रुचि नहीं दिखाईहै।
25 मार्च से 15 मई तक चलेगी खरीदी
जिले में 10 मार्च तक समर्थन मूल्य खरीदी के लिए पंजीयन हुए और उपज की खरीदी 25 मार्च से शुरू होगी जो 15 मई तक जारी रहेगी। चना और मसूर का समर्थन कार्य मार्कफेट द्वारा एवं गेहूं उपार्जन का कार्य सहकारी समितियों के माध्यम से किया जाएगा। गेहूं का समर्थन मूल्य 2015 रुपए प्रति क्ंिवटल, चना 5230 रुपए प्रति क्ंिवटल एवं मसूर 5500 रुपए प्रति क्ंिवटल की दर पर क्रय की जाना है।
मंडी में बढ़ी आवक
मंडी में आवक भी बढऩे लगी है। पिछले दो दिनों में मंडी में 20 हजार बोरा से अधिक आवक हो रही है। इसमें सर्वाधिक आवक गेहंू की हो रही वहीं नए चना और मसूर की आवक भी बढ़ गईहै। इसमें चने के दाम कुछ कम है और गेहूं व मसूर को समर्थन मूल्य से अधिक दाम मिल रहे। अनाज व्यापारियों के मुताबिक आगामी समय में यह आवक 40 हजार बोरा तक पहुंचेंगी।
कर्ज में राशि कटने का भी डर
वहीं किसान नेता लाखनसिंह मीणा का कहना है कि खरीदी केंद्रों पर अनाज बेचने से कर्ज में राशि कटने का डर किसानों को है। सिंचाई का पैसा भी लिए जाने जैसी चर्चाभी किसानों के बीच रहने से किसान पंजीयन कार्य से बचते रहे। वहीं मंडी में गेहूं, चना, मसूर को अच्छे दाम मिल रहे वहीं नकद भुगतान की सुविधा होने से किसानों का रुझान मंडी में अनाज बेचने की तरफ ज्यादा है। इसलिए इस बार किसान पंजीयन कार्य से बचे रहे इसलिए किसानों की संख्या पंजीयन में कम हो गईहै। कुछ ऐसा ही कारण सहकारी कर्मचारी नेता राजेंद्र कटारे मान रहे हैं और उनका कहना है कि इन स्थितियों के बीच इस बार खरीदी केंद्रों में अनाज की तौल प्रभावित होने की आशंका है।
Published on:
16 Mar 2022 01:05 am
