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8000 रुपए क्विंटल सरिया, 400 रुपए बोरी सीमेंट, जानिये कैसे बना रहे लोग मकान

सरिये और सीमेंट के दामों ने आसमान छू लिया है, महंगा सरिया और सीमेंट होने से घर बनाना लोगों के लिए चुनौती का काम हो गया है.

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विदिशा/मंडीबामोरा. मध्यप्रदेश में सरिये और सीमेंट के दामों ने आसमान छू लिया है, फिलहाल 8 हजार रुपए क्विंटल सरिया और करीब 400 रुपए प्रति बोरी सीमेंट आ रही है, इतना महंगा सरिया और सीमेंट होने से घर बनाना लोगों के लिए चुनौती का काम हो गया है, ऐसे में कई लोगों ने मकान निर्माण का काम रोक दिया है, तो वहीं दूसरी और पीएम आवास के तहत भवन निर्माण करवाने वाले लोगों ने भी बढ़ती मंहगाई के चलते घुटने टेक दिए हैं।


देशभर में बढ़ रही महंगाई का असर सरिया, सीमेंट सहित अन्य निर्माण सामग्रियों पर भी देखने को मिल रहा है, जिससे मकान सहित अन्य निर्माण कार्यों का बजट बिगड़ गया है। सरकारी सहायता के बाद भी गरीबों के पक्के घर के सपने पूरे होते नजर नहीं आ रहे है।

सरिया और सीमेंट के व्यापारी समीर जैन ने बताया कि लगभग सभी कंपनियों के सरिया का भाव 8000 रुपए प्रति क्विंटल हो गया है। इसी तरह 50 किग्रा की सीमेंट की बोरी अब 400 रुपए की हो गई है। इसकी वजह पेट्रोल, डीजल और कोयले के दामों में बढोतरी बता रहे है, जिससे भाड़ा बढ़ गया है और लागत भी बढ़ गई है। इसी वजह से सरिया, सीमेंट सहित अन्य लोहे के उत्पादों के भाव भी दिन प्रतिदिन बढ़ रहे हैं। लगभग सभी दुकानों पर सरिया सीमेंट के भाव बढऩे से ब्रिकी कम होने लगी है।


रोक दिन मकान के काम
ज्यादातर लोगों ने निर्माण कार्य रोक दिए है या फिर कम सामग्री में ही कार्य को सिमट लिया है। हालांकि ऐसे में आम नागरिक व व्यापारी सभी परेशान है। पीएम आवास बना रहे लोगों का सरकारी सहायता से आधा आशियाना ही बन पा रहा है। आधे काम के लिए या तो वह कर्ज ले रहे और तो कुछ लोगों ने अपने आशियाने को अधूरा ही छोड़ रखा है।

12 पीएम आवास अधूरे, 25 नए मंजूर
ग्राम पंचायत बामोरा के रोजगार सहायक इंदरसिंह ने बताया कि पंचायत अंतर्गत पिछले साल के 12 हितग्राहियों के पीएम आवास अधूरे है। ज्यादातर हितग्राही महंगाई के कारण कार्य पूर्ण नहीं कर पाने की बात कहते है। अभी नए 25 आवास और स्वीकृत हुए है।

ग्राम पंचायत में भी ढाई लाख दे सरकार
हाल ही में बामोरा पंचायत में आई पीएम आवास की सूची में 25 नए हितग्राहियों के नाम आए है। जिसमें से किसी ने भी निर्माण कार्य शुरू नहीं किए हैं। हितग्राही संकट में पड़ गए है। उनका कहना है कि महंगाई के इस दौर में इतने कम रुपए में आवास बनाना मुश्किल हो गया है। वार्ड क्रमांक-9 की रहवासी द्रोपती बाई ने ग्राम पंचायतों में इन आवासों के लिए ढाई लाख रुपए देने की मांग की है ताकि किसी गरीब का पक्के घर का सपना अधूरा न रहे।

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पीएम योजना में शासन के दोहरे मापदंड
प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों का कहना है कि इस आवास योजना में शासन द्वारा दोहरे मापदंड अपनाए जा रहे हैं। ग्राम पंचायत स्तर पर हितग्राहियों को पीएम आवास बनाने एक लाख 35 हजार रुपए और नगरीय क्षेत्र में यही आवास बनाने ढाई लाख रुपए मिल रहे है। जबकि दोनों जगह मजदूरी समान है। लगभग सभी संसाधन और मटेरियल की कीमत सभी जगह समान है। इसके बाद भी ग्रामीण क्षेत्र में कम राशि देने से आवास बनाने में परेशानी आ रही है।