12 जनवरी 2026,

सोमवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

catch_icon

प्लस

epaper_icon

ई-पेपर

profile_icon

प्रोफाइल

बिना पहचान फ्री में खुद की गाड़ी से ढ़ोते हैं लोगों के शव, पहुंचाते हैं मुक्तिधाम

शव को कफन उढ़ाया, फूल मालाएं चढ़ाईं, गुलाल अर्पित किया और फिर परिजनों की इच्छा मुताबिक शव को पहुंचाया सीधे मुक्तिधाम या फिर मृतक के घर-गांव तक।

2 min read
Google source verification

image

Nitesh Tiwari

Sep 19, 2016

vidisha news in hindi,vikash pachauri,social work,

vidisha news in hindi,vikash pachauri,social work,madhya pradesh news in hindi

भोपाल/विदिशा. कोई रिश्तेदारी नहीं, कोई पहचान भी नहीं, रिश्ता है तो बस मानवता का। कहीं कोई खबर मिली और चल दिए अंतिम यात्रा का अपना वाहन लेकर। शव को कफन उढ़ाया, फूल मालाएं चढ़ाईं, गुलाल अर्पित किया और फिर परिजनों की इच्छा मुताबिक शव को पहुंचाया सीधे मुक्तिधाम या फिर मृतक के घर-गांव तक।

इस सेवा के नाम पर किसी से एक धेला तक नहीं लेना। पूरी तरह फ्री सेवा। ऐसी मानव सेवा के लिए शहर में एक जुनूनी युवक का नाम सामने आता है, वह युवक है विकास पचौरी।

अपनों को खो देने के दुख में परिजन जब शव को दुर्घटनास्थल, अस्पताल से घर या फिर घर से मुक्तिधाम तक पहुंचाने के लिए परेशान रहते हैं तो अब उन्हें एक ही नाम याद आता है विकास पचौरी का। सभी अस्पतालों, चौराहों और प्रमुख स्थानों पर विकास के होर्डिंग में निशुल्क शव वाहन और उनके मोबाइल नंबर का जिक्र है। वे सूचना मिलते ही तत्काल मौके पर पहुंचते हैं और शव को अपने वाहन में रखकर रामधुन बजाते हुए खुद वाहन ड्राइव कर चल पड़ते हैं मुक्तिधाम तक। इसके बदले वे मृतक के परिजनों से कोई शुल्क नहीं लेते।

वे अपनी इस अभिनव मानव सेवा के जरिए मात्र साढ़े पांच माह में 180 लोगों को मुक्तिधाम पहुंचा चुके हैं। यह उनका जुनून ही है। इतना ही नहीं घटना-दुर्घटना में क्षत-विक्षत हुए शवों को भी वे पूरे समान के साथ लाते हैं और परिजनों तक पहुंचाने का काम करते हैं। शहर ही नहीं बल्कि दूरस्थ ग्रामीण अंचलों में भी वे शवों को पहुंचाकर ऐसे गम के समय में परिजनों को राहत देने के काम में लगे हुए हैं।

अंतिम संस्कार के बाद के क्रियाकर्म तो फिर भी आसान हैं, लेकिन शव को मुकाम तक पहुंचाने और क्षत-विक्षत शवों को भी बिना किसी संकोच के ले जाने का काम आसान नहीं। लेकिन विकास पचौरी इस काम को बखूबी निभाकर मानव सेवा की मिसाल बने हुए हैं।

ये भी पढ़ें

image