
CM के ड्रीम में माफिया की सेंध, दलालों का अड्डा बना VIDISHA मेडिकल कॉलेज
विदिशा. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान खुद कह चुके हैं कि विदिशा का मेडिकल कॉलेज उनका ड्रीम प्रोजेक्ट है। लेकिन सीएम के इस सपनों के प्रोजेक्ट में भी माफिया ने सेंध लगा दी है। यह अस्पताल मेडिकल कॉलेज के ही कुछ चिकित्सकों की मदद से दलालों का अड्डा बनता जा रहा है। मेडिकल कॉलेज में तमाम सुविधाएं होने के बावजूद चंद चिकित्सकों की शह पर कुछ पैथॉलॉजी वाले पहुंचकर मरीजों के सैंपल ले रहे हैं। यानी अस्पताल में भर्ती मरीजों की जांच भी प्रायवेट हो रही है। इस अस्पताल में इन दिनों 50 से अधिक आइसीयू के पलंग भरे बताए जा रहे हैं, जिनमें गंभीर रोगियों की संख्या बहुत कम है। पैथॉलॉजी की शिकायतें सबसे ज्यादा हैं, बाहर के लोगों द्वारा अस्पताल के मरीजों के सैंपल लेने से यहां का पैरामेडिकल स्टॉफ भी परेशान है। इसका विरोध करने पर एक जूनियर डॉक्टर को प्रताडि़त करने का मामला भी सामने आया है, इसके बाद उसने आत्महत्या का प्रयास भी किया। एनेस्थिसीया के सात चिकित्सक हैं, लेकिन ऑपरेशन नाममात्र के हो रहे हैं। मेडिकल कॉलेज और अस्पताल का ये सब खोखलापन अब शहर की सडक़ों पर आने से लोगों की उम्मीदें टूटने लगी हैं।
शासकीय अटल बिहारी वाजपेयी मेडिकल कॉलेज को मुख्यमंत्री ने अपना ड्रीम प्रोजेक्ट बताते हुए इसमें हर स्वास्थ्य सुविधा मुुहैया कराने की बात कही थी। उन्होंने कहा था कि इसके बनने के बाद अब मरीजों को बाहर न जाना पड़े। लेकिन अब उनके सपनों के इस कॉलेज और हास्पिटल में यहीं के चंद अधिकारियों, चिकित्सकों और बाहरी दलालों के माध्यम से सेंध लगा दी गई है। हर वर्ग के लोगों की अच्छे और निशुल्क उपचार के लिए बनाया गया ये मेडिकल कॉलेज और अस्पताल अब कमाई का जरिया बनता जा रहा है। जब तक यहां तत्कालीन कलेक्टर डॉ पंकज जैन की नजर रही, तब तक शातिर लोग अपने पैर नहीं जमा पाए लेकिन अब स्वार्थपूर्ति का हर गोरखधंधा यहां शुरू हो गया है।
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निजी पैथॉलॉजी से जांच का दबाव
मेडिकल कॉलेज में माइक्रोबॉयलॉजी, पैथॉलॉजी और बायोकैमेस्ट्री विभाग की जांच होती हैं। लेकिन अस्पताल में बाहरी और निजी पैथॉलॉजी से जांच का दबाव खूब बढ़ गया है। यहां तक कि मना करने पर विवाद की नौबत आ जाती है। इससे पैरामेडिकल स्टॉफ सहित जूनियर डॉक्टर खूब परेशान हैं, लेकिन उनकी चल नहीं पा रही। मेडिकल कॉलेज के कुछ चिकित्सक इस गोरखधंधे में खुद शामिल हैं और उनके कहने पर ही बाहरी पैथॉलॉजी से मंहगी जांच के सैंपल लेने निजी कर्मचारी मेडिकल कॉलेज के अस्पताल में पहुंच रहे हैं।
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अपनी-अपनी पैथॉलॉजी बताते हैं कहां भेजना है सैंपल....
मेडिकल कॉलेज हास्पिटल के वाट्सअप ग्रुप यहां के गोरखधंधे का खुलासा करते हैं। जानिए इस हास्पिटल के एक वाट्सअप ग्रुप में क्या चल रहा है-
एक कर्मचारी- फोर्स करते हैं पेशेंट को बाहर जांच करवाने के लिए और हमें भी फोर्स करते हैं निकाल के देने के लिए एसआर(सीनियर रेसीडेंट डॉक्टर)दोनों लोग ही।
दूसरा कर्मचारी- हां, और स्टॉफ नहीं, एसआर ही भिजवाते हैं।
तीसरा कर्मचारी-हां, शाम को राउंड पर एसआर भेजते हैं सैंपल।
दूसरा कर्मचारी- बाहर के सैंपल में न ही नर्सिंग स्टॉफ इन्वॉल्व है और न कोई भी जेआर(जूनियर रेसीडेंट डॉक्टर)। केवल एसआर करते हैं और अपनी अपनी पैथॉलॉजी भी बताते हैं विथ नेम की यहां कराओ।
चौथा कर्मचारी- आज तो सर रिपोर्ट ही चेक नहीं कर रहे थे बाहर की। अटेंडर दिखा भी रहे थे तो भी ध्यान नहीं दे रहे।
एक अन्य कर्मचारी- एसआर पैथॉलॉजी का नाम लेकर पहुंचाते हैं और फाइल में डीएच लिखते हैं और सैंपल बाहर भेजते हैं।
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एक चिकित्सक का वाट्सअप मैसेज...
(पैथॉलॉजी का नाम)वाले पर अब कोई सैंपल मत भेजना, (पैथॉलॉजी का नाम)पर सैंपल सेंड करो।(डॉक्टर ने नीचे एक लैब का नंबर सेंड किया और लिखा कि इनसे बात कर लेना)
एक अन्य मैसेज-
....(पैथॉलॉजी का नाम)पर सैंपल मत भेजना बार-बार एक ही बात नहीं बोलेंगे।
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जूनियर डॉक्टर का आरोप: डॉक्टर बनाते हैं बाहर से जांच कराने का दबाव
जूनियर रेसीडेंट डॉ बिपिन कुमार यादव ने डीन को भेजे एक पत्र में लिखा है कि मेरे विभाग के मेरे सीनियर लगातार दो माह से बाहर से जांच(आउटसाइड इन्वेस्टीगेशन)कराने का दबाव बना रहे हैं। नहीं करने पर जान से मारने की धमकी और सेवा समाप्त करने को बोला जाता है। सबूत के तौर पर मेरे पास कुछ कॉल रिकाडिँग और फोटो हैं। डॉ यादव ने अपने पत्र में लिखा है कि 28 जून से 1 अगस्त तक जितने भी आउटसाइड इन्वेस्टीगेशन हुए हैं उनकी गंभीरता से जांच की जाए। सीसीटीवी कैमरों की रिकार्डिग देखी जाए।
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जूनियर डॉक्टर ने किया आत्महत्या का प्रयास
विदिशा मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के सिस्टम पर सवालिया निशान लगाने के लिए जूनियर रेसीडेंट डॉ बिपिन यादव का यह सुसाइडल नोट ही पर्याप्त है। इसमें डॉ यादव ने घातक प्रभाव वाली गोलियां खाकर 1 अगस्त को आत्महत्या का प्रयास किया। इससे पहले उन्होंने अपनी डायरी के पन्नों पर जो लिखा उसका सार इस प्रकार है-डॉ बिपिन ने लिखा है कि-मुझे दो चिकित्सकों ने झूठे इल्जाम में फँसा दिया है। जो कि मुझे बहुत बुरा और गहरा सदमा लगा है। इसलिए में इस तरह लगाए गए बदनामी और गलत आरोप से मैं बहुत डिपरेशन में हूं। इसलिए मैं अब जीना नहीं चाहता हूं, क्योंकि डीन सर और एचओडी सर रने भी मुझे मेरी बात सुने एकतरफा निर्णय दिया है। इसलिए मैं अपनी जान देने जा रहा हूं। इसके लिए दो डॉक्टर्स को जिम्मेदार ठहराया गया है।
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डीन को चाहिए लिखित में शिकायत तब करेंगे कार्रवाई
इस मामले में जब डीन डॉ सुनील नंदीश्वर से पत्रिका ने चर्चा कर स्थिति बताई तो उनका जवाब था कि किसी की लिखित में शिकायत आए तो जांच कराकर कार्रवाई करें। जब तक लिखित में नहीं आता मैं कुछ कैसे कर सकता हूं। किसी पेंशेंट या अटेंडर की शिकायत आए तो उस पर कार्रवाई करें। डॉ बिपिन को हमने हटा दिया है, इसलिए वह हमारे कॉलेज को बदनाम कर रहा है। क्या उनकी शिकायतों पर गौर नहीं हो सकता था। भले ही हटा दिया, लेकिन उनकी शिकायत तो लिखित थी, जांच तो की ही जा सकती थी? उसकी वजह से हमारे कॉलेज की बहुत बदनामी हुई है। जब डीन से कहा गया कि ये कॉलेज के पूरे पैरामेडिकल स्टॉफ को भी मालूम हैं उनके वाटॅ्सअप गुुप शिकायतों से भरे पड़े हैं तो डीन का कहना था कि मुझे वे शिकायतें भेजें, देखता हूं किन नर्सों ने शिकायत की है। यानी सब कुछ कॉलेज में डीन के अधीनस्थों के बीच ही चल रहा है, लेकिन साहब को इसकी भनक नहीं और बाहर सडक़ों पर खूब चर्चा है।
Published on:
06 Aug 2022 12:42 pm
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