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नालों पर मकान, गलियों में गैराज, नहीं हो रही रसूखदारों पर कार्रवाई

अतिक्रमणकारियों के लिए वर्षों से सुरक्षित शहर

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Administration is not taking action against big people

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विदिशा. शहर अतिक्रमण करने वालों के लिए वर्षों से सुरक्षित रहा है। अधिकारियों की अनदेखी के कारण नालों पर मकान बनते गए। गलियों में गैराज व दुकानों का पक्का निर्माण होता रहा। मनमाने तरीके से अवैध कॉलोनियां कटती रही, लेकिन कभी भी ठोस कार्रवाईनहीं हुई। अब मुख्यमंत्री के निर्देश पर प्रदेश के सभी नगरों व महानगरों में रसूखदारों के अतिक्रमण हटाए जा रहे लेकिन इसके बाद भी विदिशा में पक्के अतिक्रमण तोडऩे जैसी कोईप्रभावी कार्रवाईनहीं हो पा रही है। मालूम हो कि शहर में 50 से अधिक कॉलोनियां अवैध है। बिना नियमों व अनुमतियों के कॉलोनियों निर्मित होती गई पर समय रहते जिला प्रशासन व नगरपालिका इस दिशा में कार्रवाईनहीं कर पाई और नई-नईकॉलोनियों के विकसित होने का क्रम जारी है। अब बायपास मार्ग बनने से इस मार्ग पर कॉलोनियां काटी जा रही। कॉलोनाइजर का लायसेंस है कि नहीं, टाउन एंड कंट्री व नपा की परमीशन, कितने क्षेत्र में कॉलोनी एवं कितने क्षेत्र का डायवर्सन हुआ इस तरह की कोई भी जांच कॉलोनियों के निर्माण में नहीं हो रही इससे ग्रीन बेल्ट की जमीन, वक्फ बोर्ड, कॉलोनियों द्वारा छोड़ी जाने वाली ओपन जमीन, पार्कों की जमीन व आसपास के सरकारी नाले आदि सभी अतिक्रमण की भेंट चढ़ते जा रहे हैं।

इन कॉलोनियों में नाले पर मकान
शहर के पुराने जानकारों का कहना है कि कपूर गार्डन के पास से द्वारकापुरी तक नाले पर अतिक्रमण कर मकान बनाए गए हैं। इसी तरह सागरपुलिया बंटीनगर का नाला करैयाखेड़ा रोड से बायपास तक गया है इस नाले पर भी अतिक्रमण में मकान बनते गए। इसी तरह पुराने जिला अस्पताल के बगल से निकला पीछे की ओर से एमएलबी स्कूल से पान बाग तक इसी तरहं बरईपुरा के आगे मोहनगिरी माता मंदिर के पीछे वाला नाला जो नकतला तक गया है। इस पर भी अतिक्रमण है। इसी तरह रायपुर बस्ती के पास 40 फीट का नाला सिर्फ छह फिट का रह गया और इस पर कई पक्के मकान बन गए। जानकारों का कहना है कि इन नालों पर अतिक्रमण की जांच हो जाए तो कई रसूखदारों के चेहरे सामने आ सकेंगे।

गलियों में गैराज और दुकानें
इसी तराह शहर में स्वर्णकार कॉलोनी इंदिरा कांप्लेक्स, राजीव नगर, सांची विदिशा मार्ग आदि क्षेत्रों में शासकीय गलियों में अतिक्रमण कर प्रभावशाली लोगों द्वारा वाहन खड़े करने के लिए कहीं गैराज बना लिए तो कहीं भैसें बांधकर डेयरियों का संचालन किया जाना लगा है। विदिशा-सांची मार्ग, मुखर्जीनगर व अन्य कई स्थानों पर गलियों व खाली जगह पर शासकीय भूमि पर दुकानें बन चुकी है लेकिन कोईकार्रवाईनहीं हो पा रही है।

यह हो रही मुश्किल
शहर में वर्षों से अतिक्रमण नहीं हट पाने से शहर की सड़कें चौड़ी नहीं हो पा रही। गलियां बंद होने से मुख्य सड़कों पर वाहनों का दबाव बढ़ रहा और लोगों को जाम से जूझना पड़ रहा है। वहीं नालों पर अतिक्रमण के कारण शहर की विभिन्न बस्तियों में हर वर्ष बाढ़ के हालात बनते आए हैं। इस दौरान रहवासी भी परेशान होते हैं और जिला प्रशासन भी। बाढ़ पीडि़तों के लिए लाखों रुपए मुआवजा बंटता है, लेकिन नालों को अतिक्रमण मुक्त कर समस्या का स्थायी हल नहीं निकाला जा रहा।

नालों व शासकीय अन्य जमीनों पर अतिक्रमण किसी का भी हो। इसे हटाने के लिए प्रशासन को ठोस कार्रवाईकरना चाहिए। ऐसा नहीं होने से हर बार बारिश में बाढ़ के हालातों से शहर को जूझना पड़ता है।
-करतारसिंह, कांगे्रस नेता

शहर में यायातात व्यवस्थित रहे और भविष्य में सड़कों के चौड़ीकरण एवं विकास की गुंजाइश रहे इसलिए अतिक्रमण हटाया जाना एवं नालों को उसका वास्तविक स्वरूप दिया जाना जरूरी है।
-गोविंद देवलिया, समाजसेवी

राजस्व नक्शे में कई नाले नहीं है। इससे इस तरह की स्थिति बनी। मकान बनते चले गए। शासन स्तर पर नाले चिन्हित व भू-अर्जन कर नाले की जगह सुरक्षित करना चाहिए।
-मुकेश टंडन, नपाध्यक्ष

बंटीनगर नाले का चौड़ीकरण कार्यकराया जा रहा है। कॉलोनियों व शासकीय जमीन पर पक्के निर्माण की जानकारियां एकत्रित हो रही है। अतिक्रमण पाए जाने पर इन स्थानों पर ठोस कार्रवाईकी जाएगी।
-आशुतोष शर्मा, तहसीलदार