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जंबार-बागरी क्षेत्र के औद्योगिक विकास में छह साल बाद नई रवानी

विकास शुल्क आधा होने से उद्योग लगाने में बढ़ी रुचि, अगले तीन साल में यहां होगी रौनक

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जंबार-बागरी क्षेत्र के औद्योगिक विकास में छह साल बाद नई रवानी

जंबार-बागरी क्षेत्र के औद्योगिक विकास में छह साल बाद नई रवानी

विदिशा. नगर में उद्योगों को विकसित करने और उन्हें सुविधाएं मुहैया कराने के लिए 2016 में बनकर तैयार हुए जंबार बागरी में अब उद्योग लगाने के लिए लोगों की रुचि बढ़ी है। छह वर्ष में जहां मात्र 11 उद्योगों के लिए प्लॉट अलॉट हुए थे, वहीं मात्र 20 दिन में अब 60 लोगों ने अपने प्लॉट बुक करा लिए हैं। यह सब हुआ है विकास शुल्क की राशि आधी से भी कम हो जाने के बाद। उम्मीद है कि अगले तीन साल में यहां की तकदीर और तस्वीर बदलेगी और पहाड़ी के इस वीरान से क्षेत्र में उद्योगों की रौनक बिखरेगी।


जिला मुख्यालय से मात्र 10 किमी की दूरी पर 2014 में 84.312 हेक्टेयर क्षेत्र में नए औद्योगिक क्षेत्र का निर्माण शुरू हुआ था। गुजरात की मोंटे कार्लो लिमिटेड ने इस पूरी पहाड़ी में तमाम सुविधाओं से युक्त परिसर तैयार किया, वहां सडक़ों का जाल बिछा, प्लॉट काटे गए, पानी के लिए ओवरहेड टेंक बने, स्ट्रीट लाइट लगाई गई और पूरे क्षेत्र में अलग-अलग जोन तैयार किए। बैंक, होटल, ट्रकों की पार्किंग आदि के लिए भी अलग क्षेत्र निर्धारित कर दिए गए। यह सब काम 2016 में पूरा हो गया। लेकिन क्षेत्र के प्लॉट का विकास शुल्क बहुत अधिक होने से यहां उद्योग लगाने के लिए लोग आगे नहीं आए। यहां प्लॉट का विकास शुल्क 1050 रुपए प्रति वर्ग मीटर रखा गया था।

पत्रिका ने चलाई थी मुहिम
विदिशा मेें विकसित किए जा रहे इस औद्योगिक क्षेत्र में जब लंबे समय तक वीरानगी रही और उद्योगों को लाने की कोशिश पूूरी नहीं हुई तो पत्रिका ने उद्योग जगत के लोगों से निरंतर चर्चा कर मुहिम चलाई और शासन से यहां के प्लॉट के आधे करने का प्रयास किया। लंबी कोशिश के बाद इसी माह जनवरी के पहले ह$फ्ते में औद्योगिक विकास निगम ने प्लॉट का विकास शुल्क 1050रुपए से घटाकर 473 रुपए प्रति वर्ग मीटर कर दिया। इसके तत्काल बाद से उद्योगों को जंबार बागरी में लगाने के लिए लोग आगे आ रहे हैं।

20 दिन में 60 लोगों ने अलॉट कराए प्लॉट
विकास शुल्क आधे से भी कम कर दिए जाने से अब मात्र 20 दिन में 60 लोगों ने यहां उद्योग स्थापित करने के लिए प्लॉट बुक और अलॉट कराए हैं। बता दें कि पिछले 2016 से 2021 यानी 6 वर्ष में जहां मात्र 11 लोगों ने अपने प्लॉट आबंटित कराए थे, वहीं मात्र 20 दिन में 60 लोगों ने उद्योग लगाने में रुचि दिखाई है। इतना ही नहीं रोज बड़ी संख्या में लोग नए उद्योगों को यहां लगाने के लिए औद्योगिक विकास निगम और उद्योग एवं व्यापार केंद्र के अधिकारियों से संपर्क भी कर रहे हैं।


ऑनलाइन हो रही बुकिंग
एकेवीएन की साइट पर जंबार-बागरी औद्योगिक क्षेत्र के प्लॉटों की ऑनलाइन बुकिंग हो रही है। बुकिंग के आवेदन के साथ टोकन राशि बुकिंग के लिए जमा होती है और फिर उसके दस्तावेज एकेवीएन से बनकर आने के चंद दिनों में ही प्लॉट की पूरी राशि जमा कर प्लॉट अलॉट हो जाता है।

तीन वर्ष में उद्योग स्थापित करना जरूरी
औद्योगिक विकास निगम के अधिकारियों की मानें तो यहां प्लॉट अलॉट कराने वालों के लिए शर्त होती है कि वे प्लॉट अलॉट होने की तारीख से 2 से 3 वर्ष के अंदर अपना उद्योग स्थापित कर उसे संचालित करना शुरू कर देंगे। ऐसा नहीं कर पाने की स्थिति में उनका अलॉटमेंट निरस्त कर दिया जाता है।

पांच साल में बदलेंगे हालात
विकास शुल्क की राशि आधे से कम हो जाने और फिर उद्योग लगाने के लिए लोगों के आगे आते जाने से उम्मीद बढ़ गई है कि आने वाले 4-5 साल में जंबार बागरी औद्योगिक क्षेत्र की स्थिति काफी बदलेगी और यहां कई उद्योग संचालित हो जाएंगे। क्योंकि निगम की शर्तों के अनुसार प्लॉट अलॉट होने के 3 वर्ष के भीतर यहां उद्योग संचालित करना अनिवार्य भी है। मात्र 20 दिन में जिस तरह से लोगों ने यहां आने में रुचि दिखाई है उससे बेहतर होने की उम्मीद है।


शहर के बीच से पेस्टीसाइड्स का विदा होना जरूरी
मौजूदा औद्योगिक क्षेत्र शहर के बीचों बीच, व्यस्ततम चौराहे और स्कूल-कॉलेजों से घिरा हुआ है। सबसे बड़ी बात यहां बहुत ही संकरे और छोटे परिसर के बावजूद करीब 18 पेस्टीसाइड्स की फैक्ट्रियां संचालित हैं। जब भी यहां से निकलना होता है तो कीटनाशकों की दुर्गंध लोगों को मुश्किल में डाल देती है। इसका सीधा असर यहां के रहवासियों और स्कूल कॉलेज में पढऩे वाले विद्यार्थियों पर भी पड़ रहा है। यही कारण है कि यहां से पेस्टीसाइड्स के कारखानों को कहीं और शिफट करने की मांग भी खूब उठती रही है। अब जबकि नया औद्योगिक क्षेत्र की राह खुल गई है। विकास शुल्क भी आधे से कम हो गया है, नए औद्योगिक क्षेत्र में केमिकल्स के लिए अलग जोन भी बनाया गया है तो ऐसे में जरूरी है कि शहर के बीचों बीच संचालित कीटनाशकों के ये कारखाने भी जंबार बागरी में ही शिफ्ट कर दिए जाएं। यह जनहित को देखते हुए भी बहुत आवश्यक है। गौरतलब है कि इस क्षेत्र में पेस्टीसाइड्स कारखानों में आग के मामले भी सामने आ चुके हैं।

वर्जन...
विकास शुल्क घटन के बाद से जंबार-बागरी में उद्योग लगाने के लिए कई लोग आगे आ रहे हैं। बड़ी संख्या में प्लॉट अलॉट हुए हैं। पूछताछ भी रोज हो रही है। निश्चित तौर पर अगले तीन साल में यहां कई उद्योग संचालित हो जाएंगे। कुछ पेस्टीसाइड वालों ने भी यहां प्लॉट के लिए आवेदन किया है।
-राकेश तिवारी, प्रबंधक एकेवीएन जंबार-बागरी

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