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VIDISHA में कलम-दवात हाथ में लिए 55 वर्ष से विराजी है भगवान चित्रगुप्त की प्रतिमा

यम द्वितीया, कायस्थ समाज करता है विशेष पूजन

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VIDISHA में कलम-दवात हाथ में लिए 55 वर्ष से विराजी है भगवान चित्रगुप्त की प्रतिमा

VIDISHA में कलम-दवात हाथ में लिए 55 वर्ष से विराजी है भगवान चित्रगुप्त की प्रतिमा

विदिशा. दीपावली के पांच दिनी उत्सव में दूज को भगवान चित्रगुप्त की महापूजा का विशेष दिन। कलम दवात की पूजा और भाई दूज का पवित्र दिन। यह पर्व Kayasth samaj कायस्थ समाज के लिए विशेष रहता है। भगवान चित्रगुप्त और कलम दवात की पूजा हर कायस्थ परिवार में और फिर मंदिर में सामूहिक रूप से की जाती है। विदिशा में करीब 55 वर्ष पहले माधवगंज पर एक कायस्थ ने ही भगवान चित्रगुप्त की प्रतिमा स्थापित कराई थी, जो अब भी कांच मंदिर शिवालय में शिवजी के साथ विराजमान है। इसके अलावा करीब 22 वर्ष पहले शेरपुरा में कायस्थ सभा के चित्रगुप्त मंदिर में भगवान चित्रगुप्त अपनी 12 संतानों के साथ विराजित किए गए। यह प्रतिमा भी अपने आप में अनूठी है। हर साल होली-दीपावली की दूज और चित्रगुप्त जयंती पर कायस्थ समाज के लोग यहां पूजा करने पहुंचते हैं।

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श्रीवास्तव परिवार ने स्थापित कराई थी प्रतिमा

माधवगंज कांच मंदिर शिवालय के पुजारी पं. शशिमोहन आचार्य बताते हैं कि पहले कांच मंदिर की जगह के वल एक चबूतरा था, जिस पर शिवजी की प्रतिमा विराजमान थी, बाद में 1967 में यहां एड. विश्वेश्वर लाल श्रीवास्तव ने यहां भोलेनाथ की भव्य प्रतिमा, शिवलिंग और चित्रगुप्त भगवान सहित अन्य प्रतिमाएं स्थापित कराईं। यही कारण है कि यह मंदिर विश्वेश्वर महादेव के नाम से प्रसिद्ध हुआ। यहां स्थापित भगवान चित्रगुप्त की प्रतिमा नगर में स्थापित चित्रगुप्त जी की पहली प्रतिमा है। जब विश्वेश्वर दयाल जी प्रतिमाओं की प्राण प्रतिष्ठा के बाद बद्रीनाथ धाम के लिए रवाना हुए तो यहां की पूजा का दायित्व पं भवानीशंकर आचार्य को सौंपा, फिर उनके पुत्र पं.गोपाल राम आचार्य और अब उनके भी पुत्र पं. शशिमोहन आचार्य यहां के प्रधान पुजारी हैं। होली-दीवाली की दूज पर यहां कायस्थ समाज के लोग चित्रगुप्त पूजा को आते थे। इसके बाद 1971 में यहां रंग बिरंगे कांच का काम कराया गया और पूरा मंदिर कांच मंदिर के नाम से विख्यात हुआ।

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बारह पुत्रों के साथ विराजमान हैं भगवान चित्रगुप्त

नगर में 1989 में श्री कायस्थ सभा का गठन हुआ और फिर नगर के ही हरविलास सक्सेना ने भगवान चित्रगुप्त के मंदिर की कामना से शेरपुरा में स्टेशन से लगी हुई बेशकीमती जमीन समाज को दान की। इसके बाद यहां वर्ष 2000 में एनके श्रीवास्तव ने भगवान चित्रगुप्त की भव्य प्रतिमा स्थापित कराई, जिसमें भगवान अपनी शक्तियों सूर्य कन्या तथा नाग कन्या सहित 12 पुत्रों के साथ विराजमान दिखाई देते हैं। कायस्थ सभा के अध्यक्ष शरद श्रीवास्तव बताते हैं कि मंदिर और धर्मशाला के लगातार विकास और उसे सुंदर बनाने का प्रयास जारी है। हाल ही में मंदिर के गर्भग्रह का जीर्णोद्धार कर उसे और अधिक खुला और भव्य बनाने का प्रयास किया गया है। मंदिर के बाहर भी कायस्थ समाज की प्रतीक कलम-दवात बनाई गई है। यम द्वितीया 27 अक्टूबर को यहां सुबह भगवान का अभिषेक कर नए वस्त्र धारण कराए जाएंगे। शाम को सामूहिक पूजन, आरती और फिर प्रतिभाशाली बच्चों का सम्मान समारोह आयोजित किया जाएगा।