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एक साल में ढाई हजार मरीज रेफर, फिर भी एक बार भी भोपाल नहीं गई सरकारी एम्बुलेंस

जिला अस्पताल कर्मचारियों और निजी एम्बुलेंस संचालकों की सांठगांठ का नतीजा
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विदिशा

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Satish More

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Updated: 2 Nov 2019, 10:45 AM IST

ambulance

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विदिशा. प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की अनदेखी तथा जिला अस्पताल कर्मचारियों और निजी एम्बुलेंस संचालकों की सांठगांठ के चलते जिला अस्पताल की सरकारी एम्बुलेंस तमाशा बनी हुई है और मरीजों को प्राइवेट एम्बुलेंस से भोपाल रेफर करने का खेल प्रतिदिन खूब चल रहा है, जिससे मरीजों के परिजनों से मनमाने दाम वसूले जा रहे हैं।

इतना ही नहीं रात को रेफर मरीजों से मजबूरी का फायदा उठाते हुए किराए के नाम पर ढाई हजार रुपए तक की वसूली की जाती है।

साल भर में जिला अस्पताल से करीब 2 हजार 500 से अधिक मरीज भोपाल रेफर हुए। जिला अस्पताल से मिली जानकारी के अनुसार जिला अस्पताल परिसर में खड़ी सरकारी एम्बुलेंस एक साल से भी अधिक समय से मरीजों को लेकर एक भी बार भोपाल नहीं गई है।

प्रबंधन के अनुसार इस एम्बुलेंस का उपयोग सिर्फ वीआईपी के दौरों और सरकारी आयोजनों के दौरान किया जाता है। विशेष परिस्थितियों में मरीजों को भोपाल रेफर करते हैं। ऐसे में भोपाल रेफर मरीजों को भोपाल भेजने के लिए विकल्प के तौर पर 108 एम्बुलेंस, सामाजिक संस्थाओं की एम्बुलेंस और प्राइवेट एम्बुलेंस उपलब्ध रहती हैं, लेकिन 108 एम्बुलेंस से नाममात्र के मरीजों को ही भोपाल रेफर किया जाता है और सामाजिक संस्थाओं से Óयादा सिर्फ प्राइवेट एम्बुलेंस का उपयोग मरीजों को रेफर के लिए किया जाता है।

जबकि विशेष परिस्थितियों में गरीब मरीजों को सरकारी या रेडक्रास की एम्बुलेंस से निशुल्क भोपाल तक ले जाने का प्रावधान है। स्वास्थ्य विभाग से के अनुसार जिला अस्पताल के सर्जीकल वार्ड से नवम्बर 2018 से अक्टूबर 2019 के बीच 1525 मरीज भोपाल रेफर हुए। इनमें नवम्बर 2018 में 113, दिसम्बर में 142, जनवरी 2019 में 189, फरवरी में 105, मार्च में 138, अप्रेल में 121, मई में 743, जून में 105, जुलाई में 183, अगस्त में 102, सितम्बर में 84 और अक्टूबर 60 मरीज भोपाल रेफर हुए।

इसी प्रकार मेडिकल वार्ड से नवम्बर 2018 में करीब 90 से अधिक मरीज, दिसम्बर में 95, जनवरी 2019 में 82, फरवरी 84, मार्च 80, अप्रेल 92 मई 179, जून 65, जुलाई 84, अगस्त 96, सितम्बर 89 और अक्टूबर में 84 मरीज रेफर हुए। इस प्रकार मेडिकल वार्ड से एक साल में करीब 1 हजार 119 मरीज रेफर हुए। जिला अस्पताल परिसर में प्राइवेट एम्बुलेंस का 24 घंटे जमावड़ा रहता है। करीब डेढ़ दर्जन से अधिक एम्बुलेंस यहां खड़ी रहती हैं। जबकि नियमानुसार जिला अस्पताल परिसर में प्राइवेट एम्बुलेंस खड़ी तक नहीं होना चाहिए।


ऐसे चलता है प्राइवेट एम्बुलेंस भेजने का काम
प्राइवेट एम्बुलेंस से मरीजों को भोपाल भेजने के खेल में कुछ वार्डबाय से लेकर स्टॉफ के कुछ अन्य कर्मचारी शामिल रहते हैं। मरीज को जैसे ही डॉक्टर द्वारा भोपाल रेफर किया जाता है तो अपने-अपने परिचितों या Óयादा कमीशन देने वाले प्राइवेट एम्बुलेंस संचालक का नम्बर मरीजों के परिजनों को दे दिया जाता है या स्वयं ही कॉल कर इन एम्बुलेंस को बुला लेते हैं। ऐसे में मरीज के परिजन अपने मरीज को जल्द अ'छा करने के चक्कर में उनके द्वारा बताई एम्बुलेंस से ही मरीज को भोपाल ले जाते हैं।

रात को वसूलते हैं ढाई हजार तक किराया
जिला अस्पताल से भोपाल रेफर करने का लीगल चार्ज करीब एक हजार रुपए है, लेकिन मरीजों के परिजनों से मनमाना किराया वसूला जाता है। वहीं रात को यह किराया दोगुने से भी Óयादा वसूला जाता है। रात को कई बार ढाई हजार से तीन हजार रुपए तक का किराया मरीजों के परिजनों से वसूला जाता है।


सरकारी एम्बुलेंस सालभर से मरीजों को लेकर भोपाल क्यों नहीं गई, इसकी जांच करवाई जाएगी। वहीं प्राइवेट एम्बुलेंस वाले मरीजों से मनमाने रुपए नहीं वसूल सकें। इसके लिए आरटीओ से कहकर इन प्राइवेट एम्बुलेंस वालों की मीटिंग कर रेट तय किए जाएंगे।
- प्रवीण प्रजापति, एसडीएम, विदिशा