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अब बिना पैसा खर्च किए सबको साक्षर करने पर दाव

साक्षर करने वालों को भी कोई मानदेय तक की व्यवस्था नहीं

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अब बिना पैसा खर्च किए सबको साक्षर करने पर दाव

अब बिना पैसा खर्च किए सबको साक्षर करने पर दाव

विदिशा. प्रौढ़ शिक्षा अभियान पूरा हो जाने के बाद अब फिर एक बार साक्षरता अभियान शुरू हो गया है। नाम है नवभारत साक्षरता अभियान, लेकिन इस बार सरकार ने बिना पैसा खर्च किए सबको साक्षर करने का दाव खेला है। अब भी जिले में करीब 5 लाख से ज्यादा निरक्षर हैं, लेकिन इस बार इन निरक्षरों को साक्षर करने वालों और पढ़ाने वालों को भी एक रूपए का मानदेय तक नहीं दिया जाएगा। भारत सरकार अपनी इस योजना में केवल स्लेट-बत्ती का खर्च सरकार वहन करेगी। जबकि पिछले साक्षरता अभियान में प्रेरकों को मानदेय दिया गया था।

जिले में 5 लाख से ज्यादा निरक्षरजिले में अगर आंकड़ों पर नजर डालेंं तो करीब 70.53 प्रतिशत साक्षरता प्रतिशत है। इसमें निरक्षरों की संख्या करीब 5 लाख से अधिक है। ऐसे में इनका पुख्ता सर्वे करना और फिर बिना खर्च के हर निरक्षर को साक्षर करना एक बड़ी चुनौती है। हालांकि पिछले कई ऐसे अभियान आंकड़ों की बाजीगरी बन कर रहे हैं। एक बार फिर अभियान शुरू हुआ है, कितना सफल होगा यह वक्त बताएगा।

15 वर्ष से ज्यादा उम्र के लोग होंगे शामिल

अप्रेल 2022 से शुरू हुआ यह नव भारत साक्षरता अभियान 2027 तक चलेगा। यानी पांच वर्ष तक। इस अभियान में जिले के 15 वर्ष की उम्र से अधिक के निरक्षरों को तलाश कर उन्हें साक्षर करने का काम किया जाना है। फिलहाल इसके लिए सर्वे शुरू किया गया है। सर्वे में भी शासकीय शालाओंं के शिक्षकों को तैनात किया गया है।

साक्षर करने वाले कहलाएंगे अक्षर साथी

इस बार ऐसे सभी लोगों को अक्षर साथी का नाम दिया गया है, जो निरक्षरों को साक्षर करने में अपनी भूमिका निभाएंगे। हालांकि इसके लिए उन्हें एक रुपए का मानदेय नहीं मिलेगा, किसी तरह का कोई लाभ भी नहीं, बस एक प्रमाणपत्र विभाग द्वारा दिया जाएगा। ये अक्षर साथी एनसीसी, एनएसएस से जुड़े हो सकते हैं। गांव-शहर के पढ़े लिखे युवा हो सकते हैं। सेवाभावी संस्थाओं के लोग भी ये दायित्व निभा सकते हैं।

सामाजिक चेतना केंद्र होंगे स्थापित

नवभारत साक्षरता अभियान को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए प्राथमिक और माध्यमिक शालाओं को सामाजिक चेतना केंद्र के रूप में तैयार किया जाएगा। यहीं से साक्षरता अभियान की गतिविधियां संचालित होंगी। इस केंद्र पर सिर्फ कक्षाओं के लिए जगह और स्लेट बत्ती उपलब्ध कराई जाएगी। नवसाक्षरों को साल में तीन बार परीक्षा देना होगी, इसी आधार पर उनका मूल्यांकन होगा।

पढऩा-लिखना, जोडऩा-घटाना सीखेंगे

नवभारत साक्षरता अभियान में 15 वर्ष से अधिक उम्र के निरक्षरों को साक्षर करने, हस्ताक्षर करने के साथ ही थोड़ा बहुत पढऩा-लिखना और अंकों को जोडऩा तथा घटाना सिखाया जाएगा। जिससे वे अपने रोजमर्रा के काम को खुद कर और समझ सकें।

एप पर आएगी शिक्षण सामग्री

साक्षरता अभियान में निरक्षरों को साक्षर कैसे करना है, क्या पढ़ाना है? यह पूरी जानकारी भी इस अभियान के लिए तैयार किए गए एप के माध्यम से अभियान संचालक यानी जिला शिक्षा केंद्र के परियोजना समन्वयक(डीपीसी)के पास आएगी। अभियान की टीम में डीपीसी समन्वयक की भूमिका में रहेंगे। उनके साथ एक सह समन्वयक होगा, हर ब्लॉक के बीआरसी और संकुल स्तर पर करीब 70 संकुल प्राचार्य इस टीम में शामिल रहेेंगे। ये प्राचार्य और शिक्षक अपने कार्यालयीन दायित्व और स्कूलों के साथ-साथ साक्षरता का कार्य अतिरिक्त रूप से संभालेंगें। इसी टीम के माध्यम से अक्षर साथियों के मोबाइल पर शिक्षण सामग्री भेजी जाएगी, जिसके आधार पर वे अध्ययन कराएंगे। साक्षरों की पूरी जानकारी भी एप के माध्यम से दर्ज होगी।

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वर्जन...

नवभारत साक्षरता अभियान शुरू हुआ है, यह अभियान 2027 तक चलेगा। निरक्षरों का सर्वे कराकर उन्हें हस्ताक्षर करना, लिखना-पढऩा और जोड़-घटाना सिखाया जाएगा। जो साक्षर करेंगे उन्हें अक्षर साथी कहा जाएगा। लेकिन किसी को भी इसमें मानदेय, वेतन अथवा किसी भी तरह के लाभ देने का प्रावधान नहीं है। अक्षर साथियों को प्रमाणत्र जरूर दिया जाएगा।

-एसपी सिंह, डीपीसी विदिशा