विदिशा। आधुनिकता के दौर में
परम्पराओं में भी बदलाव आता जा रहा है। सदियों से महालक्ष्मी पूजा के अवसर पर
मिट्टी के हाथियों को पूजने की परम्परा है, लेकिन अब बाजार में पीतल के हाथी आ गए
हैं।
दीपकों, महालक्ष्मी की प्रतिमा और पूरे श्रंगार के साथ ये हाथी
अलग-अलग आकार तथा दामो पर बाजार में उपलब्ध हैं। हालांकि मिट्टी के हाथियो की मांग
अभी भी सबसे ज्यादा है। महालक्ष्मी पूजा के अवसर पर अखंड सौभाग्य की कामना से
सुहागन çस्त्रयां हाथी पूजा का उत्सव मनाती हैं। इस पूजा में मिट्टी के हाथी की
पूजा की जाती है, जिसमें दीपक भी लगे रहते हैं। लेकिन इस बार बाजार में पीतल के
सुन्दर हाथी की प्रतिमा पर पीतल के ही नौ तथा सत्रह दीपक सुसज्जित हैं। जबकि हाथी
पर पीतल की ही महालक्ष्मी प्रतिमा भी शोभायमान है।
छोटे हाथी का वजन 560 ग्राम
है, जिसकी कीमत करीब 560 रूपए जबकि बड़े हाथी का वजन 1.530 ग्राम और कीमत 1075 रूपए
बताई जा रही है। बर्तन विक्रेता बाबूलाल ताम्रकार का कहना है कि महालक्ष्मी पूजन के
लिए महिलाओं ने इस बार पीतल के हाथियों की मांग की थी, इसीलिए कुछ हाथी मंगाए हैं।