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नवाब की गंदी बात पर माहेश्वरी समाज ने रातों-रात छोड़ा घर-कारोबार

माहेश्वरी समाज के बुजुर्ग बताते हैं कि सौ सवा सौसाल पहले जब हमारे पूर्वज सिरोंज में बसे थे तो वे काफी बड़े सेठों में गिने जाते थे।

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नवाब की गंदी बात पर माहेश्वरी समाज ने रातों-रात छोड़ा घर-कारोबार

नवाब की गंदी बात पर माहेश्वरी समाज ने रातों-रात छोड़ा घर-कारोबार

विदिशा. डेढ़ सौ साल से ज्यादा हो गए, लेकिन सिरोंज में माहेश्वरी समाज का कोई व्यक्ति न रहता है और न ही रात रुकता है। अधिकांश लोग तो सिरोंज का पानी तक नहीं पीते, वह दौर बीत गया, लेकिन माहेश्वरी समाज अपने आत्मसम्मान की खातिर पुरखों द्वारा लिए फैसले का मान आज भी बरकरार रखे हुए है। सिरोंज नगर में आज भी माहेश्वरी समाज के कई बड़े-बड़े भवन खंडहर की तरह पड़े हैं, जो रातों रात समाज के लोगों ने तत्कालीन नवाब की गंदी बात के कारण छोड़े थे।

माहेश्वरी समाज के बुजुर्ग बताते हैं कि सौ सवा सौसाल पहले जब हमारे पूर्वज सिरोंज में बसे थे तो वे काफी बड़े सेठों में गिने जाते थे। वहां एक बार रियासत के नवाब का आना हुआ और उसने नगर में डेरा डाला। उसी दौरान सिरोंज के सबसे बड़े माहेश्वरी सेठ की पुत्री का विवाह था। वह बहुत रूपवती थी, वह कहीं से डोली में बैठकर आ रही थी कि इसी दौरान उसकी एक मोती और नग जड़ी चप्पल गिर गई, जिसे एक नवाब भक्त ने उठाकर नवाब के खेमे में यह कहते हुए पहुंचा दिया कि जितनी खूबसूरत ये चप्पल है उससे कहीं ज्यादा खूबसूरत इसे पहनने वाली थी। बस फिर क्या था, नवाब ने उस सेठ का पता लगवाकर संदेश भिजवाया कि आज रात हमारे डेरे में डोला भिजवा दो। यह संदेश मिलते ही सेठ के परिवार में खलबली मच गई। आनन-फानन में समाज के सभी बड़े-बुजुर्गों की बैठक हुई और नवाब के इस प्रस्ताव पर चर्चा हुई। इसी दौरान किसी बुजुर्ग ने कहा कि नवाब को संदेश भिजवा दो कि सुबह होते ही डोला डेरे में पहुंचा दिया जाएगा। नवाब खुश हो गया।

इधर उन्हीं बुजुर्ग की रणनीति पर काम शुरू हुआ और रातों रात माहेश्वरी समाज ने अपना सब महत्वपूर्ण सामान बांधा और मकान-दुकान सब खाली कर सिरोंज छोड़ दिया। बुजुर्गों ने ही बैठक में यह फैसला लिया था कि अब सिरोंज में रात भी नहीं रुकेंगे, जब तक यहां से चले नहीं जाएंगे यहां का पानी तक नहीं पीएंगे। अपने समाज के आत्मसम्मान की खातिर और अपनी बेटियों की लाज बचाने सिरोंज छोड़कर माहेश्वरी समाज के लोग यहां-वहां बस गए। उस घटना को कई दशक बीत गए, लेकिन माहेश्वरी समाज के लोग अपने बुजुर्गों के उस फैसले का मान आज भी कायम रखे हैं। सिरोंज में समाज के कई विशाल भवन आज खंडहर से पड़े हैं। कई बेच दिए गए और अब दूसरे लोग रह रहे हैं, लेकिन माहेश्वरी समाज का कोई भी परिवार सिरोंज में न तो रहता है और न ही वहां रात रुकता है।

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कई पीढिय़ों पहले की बात है ये, लेकिन अब भी माहेश्वरी समाज के लोग बुजुर्गों के लिए निर्णय का पूरा मान रखते हुए सिरोंज में नहीं रहते और न ही वहां रात रुकते।
-राधेश्याम माहेश्वरी, वरिष्ठ व्यापारी विदिशा

सिरोंज में नवाबी काल में नवाब की हरकत के बाद माहेश्वरी समाज के बुजुर्गों ने वहां रात भी न रुकने और सिरोंज को खाली करने का फैसला लिया था। खुशी है कि आज भी समाज अपने बुजुर्गों के निर्णय का सम्मान बनाए हुए है।

-केजी माहेश्वरी, प्रदेश उपाध्यक्ष, मप्र प्रादेशिक माहेश्वरी महासभा

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