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विकास का नाम इंडिया बुक ऑफ रिकार्ड में दर्ज, अचानक रोने लगे लोग

उपलब्धि: 80 घंटे में मिले 400 मिनट के बोनस समय में से 300 मिनट का ही किया उपयोग

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Name of development of record Vidisha

Name of development of record Vidisha

विदिशा. आखिरकार हजारों लोगों की दुआएं कुबूल हो गईं। विदिशा के विकास पचौरी अपने दृढ़ संकल्प के चलते विजेता बने और उन्होंने लगातार 79 घंटे 30 मिनट बोलने का रेकार्ड अपने नाम कर लिया। उनके रेकार्ड बनने की घोषणा होते ही पूरे होते ही पूरा जालौरी गार्डन तालियों की गूंज के साथ झूम उठा। इंडिया बुक ऑफ रिकार्ड्स के जज प्रदीप जैन तथा कलेक्टर कौशलेन्द्र विक्रम सिंह ने अवार्ड सेरेमनी में जश्न के माहौल में विकास को इंडिया बुक ऑफ रेकार्ड का प्रमाण पत्र प्रदान किया।

ब्रेक का बोनस समय दिया गया था

30 सितम्बर को दोपहर 12 बजे से जालौरी गार्डन में अनवरत बोलना शुरू करने वाले विकास को रेकार्डस् की संस्था द्वारा नियमानुसार हर घंटे में पांच दिन के ब्रेक का बोनस समय दिया गया था। विकास ने पूरे 80 घंटे में मिले 400 मिनट के बोनस समय में से 300 मिनट का ही उपयोग किया। इस दौरान उन्होंने पहली रात एक घंटे, दूसरी और तीसरी रात दो-दो घंटे आराम किया। इसके अलावा वे अनवरत बोलते रहे। उनके अनवरत बोलने के 79 घंटे और 30 मिनट पूरे होते ही इंडिया बुक ऑफ रेकार्ड्स के जज प्रदीप जैन ने उनके रेकार्ड बनाने की घोषणा की।


बढ़ गया था रक्तचाप
समय पूरा होते ही विकास का रक्तचाप बहुत बढ़ गया और उन्हें हजारों लोगों की मौजूदगी में वहीं तखत पर लिटाकर उनका स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। इस दौरान उनकी मां, पत्नी और बेटियां उनके नजदीक रहीं और उन्हें ढांढस बंधाती रहीं। उधर पूरा परिसर ढोल नगाड़ों से गूंज रहा था। कुछ देर बाद विकास को मंच पर लाया गया और अवार्ड सेरेमनी शुरू हुई। अवार्ड सेरेमनी में इंडिया बुक ऑफ रिकार्ड्स के प्रदीप जैन ने इसे बड़ी उपलब्धि बताया और कहा कि अब इस बुक में विदिशा और विकास का नाम दर्ज हो जाएगा। यह मानवीय स्टोरी की श्रेणी में शामिल होगा। उन्होंने विकास को इंडिया बुक ऑफ रिकार्र्ड्स का मेडल पहनाया और उन्हें प्रमाण पत्र भेंट किया।

47 देहदान, 73 नेत्रदान और सैंकड़ों अन्य दान
विकास पचौरी ने अपने इस अभियान के चलते दान मेले का भी आयोजन किया था। यह दान मेला भी खूब सफल रहा। इसमें 47 लोगों ने देहदान का संकल्प पत्र भरा, 73 लोगों ने नेत्रदान का संकल्प लिया। सैंकड़ों लोगों ने कपड़े, किताबें, मेडिकल उपकरण आदि दान किए। ये सभी सामग्री जरूरतमंदों में वितरित की जाएगी।


76वें घंटे में खूब रोया पूरा हॉल
79 घंटे और 30 मिनट के इस लम्बे संबोधन का 76 वां घंटा सबसे ज्यादा भावुक करने और रुला देने वाला था। विकास अपने अभियान के आखरी इन आखिरी पलों में अपने सहयोगियों और परिवार के लोगों के बारे में बोल रहे थे। जब उन्होंने अपनी पत्नी प्रीति को आवाज दीं और उनके सहयोग के बारे में बोलना शुरू किया तो प्रीति भावुक होकर अपने पति से लिपट कर रो पड़ीं। विकास भी अपने आप को नहीं रोक पाए और उनके भी आंसू बह निकले। वे लगातार बोल रहे थे और पूरा हाल भावुक होकर रो रहा था। ऐसे ही दोनों बेटियों को लिपटाकर जब विकास बोल रहे थे हाल रो रहा था।

विकास पचौरी और उनके परिवार को बधाई। उनका यह रेकार्ड विदिशा के लिए गौरव की बात है।

कौशलेन्द्र विक्रम सिंह, कलेक्टर


विकास ने लगातार मानवीय विषय पर बोलते हुए यह साबित कर दिया कि उनके जीवन में क्या जरूरी है। ये युवाओं के लिए बहुत महत्वपूर्ण साबित होगा।
-विनायक वर्मा, एसपी

विकास युवाओं के प्रेरणास्रोत बन गए हैं। उन्होंने विदिशा के साथ ही पूरे प्रदेश का नाम गौरवान्वित किया है।
प्रतापभानु शर्मा, पूर्व सांसद

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