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न डॉक्टर मिलते, न टेक्नीशियन, एक्स रे भी नहीं होता

स्टॉफ की मनमानी से जूझ रहा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र

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न डॉक्टर मिलते, न टेक्नीशियन, एक्स रे भी नहीं होता

न डॉक्टर मिलते, न टेक्नीशियन, एक्स रे भी नहीं होता

विदिशा. सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पीपलखेड़ा लंबे समय से स्टॉफ के मनमाने रवैये और तमाम अव्यवस्थाओं के लिए चर्चित रहा है। यहां डॉक्टर हैं लेकिन मिलते नहीं है। पैथॉलॉजी है लेकिन जांच नहीं होती। एक्स रे मशीन है, लेकिन कभी एक्स रे नहीं होते। डिलेवरी होती हैं लेकिन कोई महिला चिकित्सक नहीं है, अधिकार न होते हुए भी एएनएम प्रसव कराती हैं। तीस बिस्तरों का अस्पताल है लेकिन प्रसूताओं के अलावा कभी किसी को भर्ती नहीं किया गया। सबका कारण यही है कि चिकित्सक ही यहां उपलब्ध हो पाना मुश्किल होता है। जब एक दिन आते हंैं तो कई दिन के दस्तखत करके रवाना हो जातेे हैं। शनिवार को दोपहर 1 बजे पत्रिका ने यहां का हाल देखा तो हकीकत सामने आई।
सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पर सन्नाटा पसरा था। बाहर दो स्कूटर खड़े थे। पूरे परिसर में कोई आवाज तक नहीं थी। अंदर चिकित्सक कक्ष के सामने डॉ संतोष किरार की नेमप्लेट लगी थी लेकिन दरवाजे पर ताला था, आयुष चिकित्सक कक्ष, महिला चिकित्सक कक्ष, नेत्र परीक्षण कक्ष सबमें ताले थे। आगे बढ़े तो देखा पैथॉलॉजी कक्ष मेें भी ताला था। एक कमरे में ब्लॉक डाटा मैनेजर पंकज द्विवेदी मौजूद थे और दूसरे कमरे में एएनएम लक्ष्मी बंसल और हेमलता सक्सेना मौजूद थीं। कोई चौथा व्यक्ति अस्पताल में नहीं था। न ही कोई मरीज ओपीडी में नजर आ रहा था।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में यूं तो डॉ संतोष किरार, डॉ गजेंद्र बघेल, लैब टेक्नीशियन गंगाराम जाटव, नेत्र सहायक उमेश शर्मा, कंप्यूटर ऑपरेटर प्रशांत शर्मा तथा जयसिंह राठौर सभी की पदस्थापना है, लेकिन इनमें से कोई भी मौजूद नहीं था। मौजूद पंकज द्विवेदी और एएनएम लक्ष्मी बंसल से स्टॉफ के बारे में पूछा तो कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। डॉक्टर और स्टॉफ कब आता है कब जाता है, इसका कोई जवाब इनके पास नहीं था।

बिना पैथॉलॉजी टेस्ट कराते हैं प्रसव
प्रसव से पहले गर्भवती महिलाओं की करीब 10 प्रकार की पैथॉलॉजिकल जांच होती है। लेकिन यहां पैथॉलॉजी पर टेस्ट न होने से बिना जांच के ही प्रसव कराने की मजबूरी है। एएनएम लक्ष्मी बंसल ने बताया कि महिला चिकित्सक नहीं है। हम एएनएम हैं, प्रसव कराने के लिए अधिकृत तो नहीं हैं, लेकिन कोई इंतजाम नहीं है, इसलिए व्यवस्था तो करना ही पड़ती है। लैब टेक्निीशियन न होने से गर्भवती महिलाओं को जांच के बिना ही प्रसव कराना पड़ता है। लैब् टेक्निीशियन भोपाल में रहते हैं उनका कभी कभार ही यहां आना होता है। रात को भी दो एएनएम बारी-बारी से ड्यूटी देती हैं, रात को कोई डॉक्टर यहां कभी ड्यूटी पर नहीं रहते।

तीस बिस्तर का अस्पताल, भर्ती कोई नहीं
ग्रामीणों ने बताया कि पीपलखेड़ा में तीस बिस्तरों का अस्पताल है, लेकिन केवल डिलेवरी के लिए महिलाएं ही भर्ती होती हैं। यहां डॉक्टर ही नहीं मिलते, इसलिए ज्यादातर लोग न चाहते हुए भी विदिशा ही उपचार के लिए भागते हैं। कभी यहां भर्ती नही होते। इसी तरह एक्स रे मशीन यहां है, लेकिन उससे कभी किसी का एक्स रे होते नहीं देखा।

आपसी विवादों में उलझा रहता है स्टॉफ
पीपलखेड़ा अस्पताल के सुचारू रूप से संचालित न होने के पीछे यहां के स्टॉफ के आपसी झगड़े हैं, खुद आना न पड़े और दूसरों के काम में अड़ंगे लगाने के यहां की बातें ग्रामीणों तक को पता है। पिछले दिनों एएनएम और डॉक्टर का विवाद चर्चा मेंं रहा था। बात थाने तक पहुंची थी। इसी तरह अब यहां पहले से विवादित और थान्देर के एक एमपीडब्ल्यू जितेन्द्र मीणा को वरिष्ठ अधिकारियों की मेहरबानी से बॉक प्रोग्राम मैनेजर का प्रभार सौंप देना भी विवाद का कारण बनता जा रहा है। विभाग में चर्चा है कि पहले से ही विवादित स्वास्थ्य कार्यकर्ता को यह जिम्मेदारी कैसे सौंप दी गईï?
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पीपलखेड़ा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में जो भी खामियां हैं, उनको दुरुस्त करा रहे हैं। आपसी विवाद हो सकते हैं, लेकिन इसके कारण मरीजों को परेशानी हो, यह बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। स्टॉफ की गैरमौजूदगी गंभीर विषय है। कार्रवाई करेंगे।
-डॉ पंकज जैन, कलेक्टर विदिशा.