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MP की मंडी में बिकने आया राशन का चावल, तहसीलदार ने की दुकान सील

- कृषि उपज मंडी में उचित मूल्य दुकान का 250 क्विंटल चावल मिला। यह चावल यहां से किसी अन्य स्थान पर बेचने की तैयारी थी।

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मध्यप्रदेश में लगातार समाने आ रही विभिन्न गड़बड़ियों के बीच आज एक अनोखा मामला समाने आया है। जहां गरीबों का वह चावल जो काफी मश्क्कत के बाद गरीबों को राशन की दुकान पर आपना अंगुठा लगाने के बाद ही मिलता है। वह भी आज मप्र की एक मंडी में बिकने के आ गया। खास बात यह है कि यह भी कोई 1—2 या 10—50 किलो में नहीं बल्कि पूरे 250 क्विंटल में...

दरअसल मप्र की एक कृषि उपज मंडी में उचित मूल्य दुकान का 250 क्विंटल चावल मिला है। बताया जाता है कि यह चावल यहां से किसी अन्य स्थान पर बेचने की तैयारी थी। इसकी सूचना मिलने पर तहसीलदार चावल जब्त दुकान को सील कर दिया। यह मामला विदिशा की कृषि उपज मंडी का है, जहां समाने आ रही जानकारी के अनुसार उमा ट्रेडर्स और सुरेश इंटरप्राइजेज जो कि एक ही मालिक की दो अलग-अलग फर्म है पर उचित मूल्य दुकान का चावल बड़ी मात्रा में मिला। यह चावल वहां से किसी अन्य स्थान पर बेचने की तैयारी थी। इसकी सूचना मिलने पर तहसीलदार सरोज अग्निवंशी द्वारा मौके पर पहुंच कर दुकान को सील कर दिया।

ट्रक में भरी बोरियों का वजन भी अलग-अलग
जानकारी के बाद खाद्य विभाग द्वारा उचित मूल्य चावल की जांच कर अलग से कार्यवाही करने की प्रक्रिया शुरू की गई। कार्यवाही करते हुए उमा ट्रेडर्स पर चावल से भरे हुए जिस ट्रक को पकड़ा है, उस ट्रक की क्षमता 20 मिट्रिक टन होने के बाद भी जब इसकी बोरियों का जब वजन किया तो कुछ का वजन 40 किलो तो कुछ बोरियों का वजन 50 किलोग्राम निकला। इस तरह पूरे ट्रक का वजन धर्म कांटे पर करने पर लगभग 250 क्विंटल चावल आया है।

सूत्रों के अनुसार जांच के बाद और भी अफसरों को चावल छिपा कर रखे होने का अंदेशा है। अभी तक ये स्पष्ट नहीं हो पाया की यह चावल किस उचित मूल्य की दुकान से और कहां से आया था। साथ ही किसके माध्यम से इस चावल को यहां तक लाया गया। इन सब मामलों को लेकर पर अब खाद्य विभाग जांच करेगा और उसके बाद ही दोषियों पर कार्यवाही की जाएगी।

PDS का चावल बाजार में आना: खड़ा करता है एक बड़ा प्रश्न
जानकारों के अनुसार राशन की दुकानों पर जहां बगैर अंगूठा लगाए किसी को भी अन्य का एक दाना तक नहीं दिया जाता और वहीं उसी राशन की दुकान से बड़ी मात्रा में चावल का बिकने के लिए बाजार में आना एक बड़ा प्रश्न खड़ा कर रहा है। ऐसे में जानकारों के अनुसार इस चावल को बेचने की तैयारी सिर्फ मण्डी के खरीदार को ही संदेह के घेरे में खड़ा नहीं करती। बल्कि, यह प्रश्न भी उठता है कि वह कौन सी उचित मूल्य की दुकान हैं जो गरीब के इस अनाज को साहूकार को बेच रही है और सरकार को चूना लगा रही है।

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