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कालादेव का दशहरा: रामदल पर रावण सेना बरसाती है पत्थर

रामदल के लोगों को नहीं लगती चोट, आदिवासियों द्वारा बरसाए जाते हैं पत्थर....

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कालादेव का दशहरा: रामदल पर रावण सेना बरसाती है पत्थर

विदिशा /आनंदपुर। जिला मुख्यालय से करीब 120 किमी दूर लटेरी ब्लॉक का ग्राम कालादेव अपने अनूठे दशहरे के लिए जाना जाता है। यहां दशहरे पर राम का ध्वज उठाने जाने वाली राम की सेना पर रावण की सेना द्वारा गोफन से पत्थरों की बौछार की जाती है।

मान्यता यह है कि पत्थरों की इस बौछार में रामादल का कोई भी व्यक्ति घायल नहीं होता। सदियों पुरानी इस परम्परा में रावण की सेना का प्रतिनिधित्व आसपास के आदिवासी और बंजारे करते हैं।


भोपाल से 150 किमी की दूरी....
भोपाल से करीब 150 किमी दूर बैरसिया, महानीम चौराहा, लटेरी और आनंदपुर होते हुए कालादेव पहुंचा जा सकता है। आनंदपुर से इस गांव की दूरी करी 25 किमी है। यहां दशहरे पर अनूठा आयोजन होता है। मैदान में रावण की विशाल प्रतिमा है, जिसे सजाया जाता है। शाम के समय दूर-दूर से लोग आकर दशहरा मैदान मेें एकत्रित होते हैं।

मैदान में रावण की प्रतिमा से करीब 200 मीटर दूर राम का ध्वज लगाया जाता है। जिसकी परिक्रमा करने के लिए कालादेव के स्थानीय लोग आते हैं। इनकी संख्या 200 से 400 तक होती है। ये ही लोग राम की सेना माने जाते हैं। शर्त यह होती है कि इस सेना में कालादेव के स्थानीय लोग ही हों।


बाहरी व्यक्ति इसमें शामिल नहीं हो सकता, अन्यथा उसे पत्थरों की चोट लगने की संभावना रहती है। गांव के ये लोग ध्वज की जैसे ही परिक्रमा करने जाते हैं, वैसे ही रावण की प्रतिमा के पास लाइन से खड़े आदिवासियों और बंजारों की टोली अपने परम्परागत देसी हथियार गोफन से पत्थरों की बौछार शुरू कर देते हैं।

होता है रामलीला का मंचन....

इससे पहले रावण के पास आदिवासियों द्वारा पत्थरों का ढेर लगाकर अपनी गोफन तैयार कर ली जाती हैं। पत्थरों के इस हमले में रामादल का कोई भी व्यक्ति घायल नही होता और वे राम की जय जयकार कर अपने स्थान पर पहुंच जाते हैं। आदिवासी लौट जाते हैं और फिर रामलीला के कलाकारों द्वारा राम-रावण की लीला का मंचन किया जाता है। इस पूरे आयोजन में हजारों की संख्या में लोग शामिल होते हैें।