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श्रीमद्भागवत कथा-कृष्ण के विरह में तड़पती थीं गोपियां : पं.शास्त्री

श्रीमद्भागवत कथा सुनने उमड़ रही भीड़...

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लटेरी। श्रीमद्भागवत कथा सुनाते कथा वाचक पं. बनवारीलाल शास्त्री।

लटेरी। श्रीमद्भागवत कथा सुनाते कथा वाचक पं. बनवारीलाल शास्त्री।

लटेरी@अनिल कुमार सोनी की रिपोर्ट...

श्रीमद्भागवत कथा के छठवें दिन शनिवार को कथा वाचक पंडित बनवारीलाल शास्त्री ने भगवान कृष्ण और गोपियों के बीच के निश्चल प्रेम के प्रसंग को सुनाते हुए कहा कि किस तरह गोपियां कृष्ण के विरह में तड़पती थीं।

उन्होंने कहा कि गोपियों और भगवान कृष्ण के बीच के इस परम प्रेम को कहीं ओर देखने नहीं मिलता। उन्होंने कहा कि भगवान योगेश्वर हैं।

उनके चरित्र से हमें शिक्षा मिलती है कि किस प्रकार इतनी सारी गोपियों के बीच रहकर वे किसी प्रकार से विचलित नहीं हुए। इसी प्रकार संसार में रहकर हमें भी हमारे कर्तव्य से विमुख नहीं होना चाहिए। कृष्ण-गोपियों के वृतांत को सुनकर जनता भावकु नजर आई। अंत में भगवान कृष्ण और रूकमणी के विवाह की कथा सुना।

इधर,आनंदपुर में हुआ कथा का समापन
वहीं आनंदपुर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा का शनिवार को समापन हुआ। कथा वाचक पंडित संदीप कृष्ण शास्त्री ने कथा के अंतिम दिन कहा कि जो सातों दिन श्रीमद्भागवत कथा को सुनता है और उसके आचरण जीवन में उतारता है, तो कथा सुनने का उद्देश्य पूरा हो जाएगा।

उन्होंने कहा कि यह जीवन ईश्वर का दिया हुआ है और हमको अपने जीवन मे उसके बनाये नियमों का भी पालन करना चाहिए तथा भारतीय जीवन शैली के अनुसार अपना आचरण करते हुए ईश्वर के चरणों मे जीवन समर्पित करना चाहिए। भगवान के कृष्ण के भजनों पर श्रद्धालु नाचते-गाते नजर आए। कथा के समापन पर प्रसादी वितरण हुआ और प्रसादी लेने बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे।

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