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यहां के पत्थर बताते हैं 1000 साल पुराना इतिहास

मंदिर परिसर के द्वार पर तो आश्चर्यजनक रूप से अरबी का शिलालेख मौजूद है। उदयेश्वर महादेव जिसे नीलकंठेश्वर महादेव भी कहा जाता है वहां शिवजी की मूल प्रतिमा पर पीतल का जो आवरण चढ़ाया गया है उस पर भी अभिलेख दर्ज है।

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विदिशा. आप मानें या न मानें, पत्थर भी बोलते हैं तभी तो प्रमाण देते हैं। और इसका उदाहरण चाहिए तो उदयपुर आइए। मप्र के विदिशा जिले का यह छोटा सा कस्बा कभी उदयपुर नगरी के रूप में विख्यात था। इसका प्रामाणिक शिलालेख उदयपुर से सिंधिया रियासत के समय ग्वालियर ले जाया गया, जो अब वहां के पुरातत्व संग्रहालय में मौजूद है। उसमें इस बात का प्रमाण है कि उदयपुर नगरी उदयादित्य ने बसाई थी, उन्होंने ही वहां उदयेश्वर महादेव और उदयसमुद्र तालाब का निर्माण कराया था। इसके अलावा उदयपुर के प्रसिद्ध शिव मंदिर की दीवारों पर पूरे एक हजार साल का इतिहास लिखा हुआ है। पत्थर बताते हैं कि यहां किस किस राजा ने कब-कब राज किया। अभिलेखों का ऐसा भंडार मप्र में कहीं और नहीं।

भारतीय सांस्कृतिक निधि(इंटेक) के राज्य कन्वीनर डॉ एमएम उपाध्याय कगी टीम ने कुछ माह पहले उदयपुर का सर्वे किया था। यहां उन्होंने एक- एक स्मारक, बिखरी धरोहर और अभिलेखों को खंगाला। टीम का सबसे ज्यादा फोकस शिलालेखों पर ही था, क्योंकि वे सबसे पुख्ता प्रमाण होते है। इंटेक ने यहां की गलियों को भी खूब छाना और इस छोटे और उपेक्षित से कस्बे से 50 से ज्यादा पाषाण दस्तावेजों को ढूंढ निकाला। इनमें से कई को पढ़ा गया तो कई को पढ़ने का प्रयास किया जा रहा है। ये शिलालेख संस्कृत, अरबी, हिन्दी, देवनागरी में हैं। यहां यह खास है कि एक हजार साल के समय में जितने राजाओं ने उदयपुर पर राज किया, उतनों के शिलालेख यहां मौजूद हैं।

उदयादित्य से खिलजी तक के शिलालेख

इंटेक के राज्य कन्वीनर डॉ उपाध्याय बताते हैं कि उदयपुर पूरे देश में एकमात्र ऐसा कस्बा होगा, जिसमें एक ही जगह इतने शिलालेख मौजूद हैं। जहां नजर डालते हैं वहां पत्थरों पर इतिहास लिखा पड़ा है। यहां राजा उदयादित्य से लेकर अलाउददीन खिलजी तक के शिलालेख मौजूद हैं। मंदिर के गेट पर, मंदिर की दीवारों पर, मंडप में और यहां तक कि प्रतिमाओं पर भी अभिलेख है। मंदिर परिसर के द्वार पर तो आश्चर्यजनक रूप से अरबी का शिलालेख मौजूद है। उदयेश्वर महादेव जिसे नीलकंठेश्वर महादेव भी कहा जाता है वहां शिवजी की मूल प्रतिमा पर पीतल का जो आवरण चढ़ाया गया है उस पर भी अभिलेख दर्ज है। यहां उदयादित्य द्वारा बनवाए गए तालाब पर भी अनेक शिलालेख हैं। इसके अलावा जगह-जगह इतिहास लिखा पड़ा है।

उदयपुर नगरी किसने बसाई, यहां का प्रसिद्ध महादेव मंदिर किसने बनवाया और यहां किसने विशाल तालाब बनवाया, इसका सबसे बड़ा प्रमाण ग्वालियर के पुरातत्व संग्रहालय में मौजूद है। डॉ उपाध्याय बताते हैं कि ग्वालियर के संग्रहालय में उदयपुर का मूल शिलालेख मौजूद है। यह सिंधिया रियासत के समय उदयपुर से ले जाया गया था। इस अभिलेख में परमार शासक उदयादित्य का प्रशस्ति गान है। इसमें उदयादित्य द्वारा निर्मित शिव मंदिर(उदयेश्वर ), तालाब (उदयसमुद्र) एवं नगर उदयपुर का उल्लेख है। इस अभिलेख की लिपि नागरी एवं भाषा संस्कृत है ।

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