
विदिशा. मंदिर के पट खुलते ही हुए राधा रानी के दर्शन।
विदिशा। नंदवाना की प्राचीन राधावल्लभीय हवेली में राधाजी के दर्शन करने शुक्रवार को भारी भीड़ थी। राधाष्टमी radha ashtami पर साल भर में एक बार पट खुलने के pat opens only one day a year कारण दर्शनार्थी उमड़ पड़े थे। दोपहर 12 बजे पट खुलने से काफी पहले से दर्शनार्थी लाइनों में लगे राधे-राधे की टेर लगा रहे थे। जैसे राधारानी ने उनकी टेर सुन ली और शंख-झालर की गूंज के साथ राधारानी के दरबार के पट खोल दिए गए। बताया जाता है कि यह मंदिर करीब 400 वर्ष पुराना है। मुगलों के आतंक से बचाने के लिए बरसाने से लाई गई थी राधारानी की निधियां। तब से गुप्त पूजा होती आ रही है। सिर्फ वर्ष में एक बार ही इस मंदिर के पट खुलते है।
राधारानी की गुप्त सेवा ही हो सकेगी
दरबार खुलते ही राधारानी के जयकारों के साथ दिव्य दर्शन के लिए लोग उमड़ पड़े। जन्म आरती हुई और फिर बधाईयोंं का अनवरत सिलसिला चल पड़ा जो देर रात तक जारी रहा। रात भर पट खुलने के बाद शनिवार की सुबह 5 बजे पट बंद होंगे। इसके बाद शाम 5 बजे से रात 11 बजे तक राधारानी के दर्शन हो सकेंगे। इसके बाद फिर साल भर के लिए पट बंद हो जाएंगे और राधारानी की गुप्त सेवा ही हो सकेगी।
भोगदर्शन और मटकी छेदन उत्सव मना
राधाष्टमी के अवसर पर राधावल्लभीय हवेली में दोपहर 12 बजे राधा रानी की महा महोत्सव आरती मंदिर सेवक मनमोहन शर्मा ने उतारी। 2 बजे से 4 बजे तक महिला मंडल द्वारा बधाई गायन हुआ और फिर उत्थापन दर्शन, भोगदर्शन और मटकी छेदन उत्सव मना।
वृन्दावन गली का नजारा देखते ही बन रहा था
शाम को संध्या आरती और रात 7 से 10 बजे तक पालना दर्शन, हवेली संगीत से राधारानी का दरबार गूंज उठा। पूरे समय दर्शनों के लिए बड़ी संख्या में लोग आते रहे। इस दौरान मंदिर की वृन्दावन गली का नजारा देखते ही बन रहा था।
जगह-जगह प्रसादी वितरण, बाजे और आतिशबाजी हुई
एक ओर लाइन में खड़े लोग दर्शनों के इंतजार में थे, तो दूसरी ओर राधे-राधे की टेर लगाते नाचते श्रद्धालुओं की टोली। जगह-जगह प्रसादी वितरण, बाजे और आतिशबाजी। राधावल्लभीय हवेली के साथ ही लक्ष्मीनारायण मंदिर और अन्य राधा मंदिर में भी राधाष्टमी का उत्सव उत्साह से मनाया गया।
आज 6 घंटे हो सकेंगे दर्शन
मंदिर के सेवक मनमोहन शर्मा ने बताया कि शनिवार को सुबह 5-6 बजे मंगला आरती के साथ राधारानी के दरबार के पट बंद हो जाएंगे। इसके बाद शाम 5 बजे फिर उत्थापन दर्शन के लिए द्वार खुलेंगे। 5.30 बजे से 6 बजे तक भोगदर्शन और बधाई गायन, शाम 6 बजे से संध्या आरती और 7 से रात 10 बजे तक पालना दर्शन, हवेली संगीत बधाई होगी। रात 11बजे शयन आरती के साथ वर्ष भर के लिए पट बंद हो जाएंगे।
Published on:
07 Sept 2019 12:39 pm
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