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UKRAINE WAR- बाहर टेंंक खड़े हैं और धमाकों से हिल रहे हैं घर-दरवाजे

यूक्रेन में युद्ध के बीच मौजूद विदिशा की उर्वी शर्मा ने पत्रिका को सुनाई दास्तां

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UKRAINE WAR- बाहर टेंंकर खड़े हैं और धमाकों से हिल रहे हैं घर-दरवाजे

UKRAINE WAR- बाहर टेंंकर खड़े हैं और धमाकों से हिल रहे हैं घर-दरवाजे

विदिशा. हम अभी सुरक्षित हैं, यहां आज कुछ विशेष नहीं हुआ, बाहर टेंकर जरूर खड़ा है, हमारे घर के ही पीछे। लेकिन कल जरूर धमाका हुआ था, ऐसा धमाका कि हमारा घर और उसके खिडक़ी-दरवाजे तक हिल गए थे। फिर धुंए का गुबार उठा था और जलने की गंध काफी देर तक आती रही। यूक्रेन के ये हालात वहां के ओडेसा शहर में रहकर मेडिकल अंतिम वर्ष की पढ़ाई कर रही विदिशा के उर्वी शर्मा ने पत्रिका से चर्चा में बताए।
उर्वी शर्मा, विदिशा के सेंट्रल एकेडमी हायरसेकंडरी स्कूल के संचालक डॉ प्रेमशंकर शर्मा और डॉ अर्चना शर्मा की पुत्री हैं। वे वहां की नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस अंतिम वर्ष की छात्रा हैं। उर्वी की मां अर्चना शर्मा बताती हैं कि फिलहाल आने के सभी रास्ते बंद हो गए हैं। भारत सरकार को इस दिशा में सकारात्मक और प्रभावी पहल करने की जरूरत है ताकि हमारे बच्चे सुरक्षित वहां से निकल सकें। उर्वी बताती हैं कि यहां एटीएम और राशन दुकानों पर काफी भीड़ है। कई लोगों से बंकर में जाने के लिए कह दिया गया है। हमसे घर से बाहर न निकलने और अलर्ट रहने को कहा है। तनाव और चिंता तो है। मम्मी-पापा के साथ ही लगातार सब रिश्तेदारों के फोन भी आ रहे हैं, सबको जवाब देते हुए भी मैं कई बार दुखी हो जाती हूं। चौतरफा दहशत और युद्ध का माहौल है, लेकिन फिर भी यहां ऑनलाइन क्लास भी चल रही हैं। गनीमत है कि नेट चालू है, वरना अपने घर परिवार में बात करने और काम करने को तरस जाते।

बे्रड के रेट भी तीन गुना हो गए
उर्वी कहती हैं कि युद्ध के हालात में जहां एटीएम से पैसा निकालना मुश्किल हो गया है, वहीं कई सामान बहुत मंहगे हो गए हैं। रोज काम आने वाली ब्रेड भी तीन गुना महंगी हो गई है। इसके साथ ही घर से निकलने में भी पाबंदियां लग गई हैं। बहुत जरूरी होने पर ही लोग निकल रहे हैं।

हमारे बच्चे बंकर में मौजूद हैं...
यूक्रेन के टर्नोफिल शहर में रह रहे विदिशा के अंशुल देशमुख के पिता संदीप देशमुख विदिशा के पुलिस विभाग में कार्यरत हैं। अंशुल के पिता का कहना है कि जब बच्चे दूर देश में हों, हालात विपरीत हों तो सामान्य तो रह ही नहीं सकते। चिंता होना तो स्वाभाविक है। लेकिन फिलहाल हमारे हाथ में कुछ नहीं है। उसकी फ्लायट कन्फर्म हो गई थी, लेकिन अगले ही दिन सब कैंसिल हो गईं। अब अंशुल वहीं बंकर में है, उसके कई साथी भी बंकर में अपने आपको सुरक्षित रखे हैं। बच्चे हर हाल में सुरक्षित रहें, बस यही कामना है। उनके मोबाइल और नेट चल रहे हैं, यही बडी सुविधा है, अन्यथा खबर ही नहीं मिलती। अंशुल ने बंकर में रहने का एक वीडियो अपने परिजनों को भेजा है।

जिले के ये पांच बच्चे हैं यूक्रेन में
1. सृष्टि शैरी विल्सन, कीव
2. सृष्टि सोनी, ओडेसा
3. उर्वी शर्मा, ओडेसा
4. हर्षित दुबे, टर्नोफिल
5. अंशुल देशमुख, टर्नोफिल