भगवान शिव के 2000 साल पुराने मंदिर में दिखी ऐसी आकृति, कोई नहीं दे पा रहा चमत्कारी रहस्य का जवाब

कई लोग इसे महज़ एक अफवाह मान रहे हैं।

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Published: 24 Jul 2018, 04:45 PM IST

नई दिल्ली। भारत विभिन्न धर्म और संस्कृतियों से बना एक ऐसा देश है, जिसका इतिहास केवल पड़ोसी देश ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया जानती है। हमारे देश में मौजूद चमत्कारी मंदिरों में आज भी ऐसे कई राज़ और रहस्य छिपे हुए हैं, जिनका सच सामने आने के बाद पूरी दुनिया हिल जाती है। वर्तमान काल में इस्तेमाल हो रही कुछ चीज़ों का विवरण हमें कई हज़ार साल पहले बने तमिलनाडु के पंचवर्णास्वामी मंदिर से मिला है। मंदिर के दीवार पर बनी साइकिल की एक कलाकृति ने पूरी दुनिया को सोचने पर मजबूर कर दिया है। मंदिर के दीवार पर बनी साइकिल की कलाकृति को वर्तमान काल की तकनीक की भविष्यवाणी के तौर पर देखा जा रहा है।

मंदिर में मौजूद साइकिल की कलाकृति को देखकर ऐसा माना जा रहा है कि आज से करीब दो हज़ार साल पहले ही साइकिल जैसे वाहनों की भविष्यवाणी की गई थी। लेकिन कई लोग इसे महज़ एक अफवाह मान रहे हैं। जिसके पीछे सबसे बड़ा कारण हैं डॉ. कालिकोवन। जाने-माने इतिहासकार डॉ. कालिकोवन ने बताया कि साल 1920 में पंचवर्णास्वामी मंदिर का नवीनीकरण किया गया था। डॉ. कालिकोवन ने बताया कि मंदिर में बनी साइकिल की कलाकृति शायद उसी दौरान बनाई गई होगी।

इतिहासकारों का मानना है कि साइकिल का अविष्कार आज से करीब दो सौ साल पहले किया गया था। तो वहीं 1885 में चेन से चलने वाली साइकिल का अविष्कार किया गया था। ऐसे में दो हज़ार साल पहले बने इस मंदिर में साइकिल की कलाकृति इस ओर इशारा कर रही है कि प्राचीन काल में ही वर्तमान काल में इस्तेमाल में लाई जाने वाले वाहनों की भविष्यवाणी कर दी गई थी। हालांकि मंदिर में बनी इस कलाकृति के पीछे का असली सच कोई नहीं जानता है। लेकिन आकृति को लेकर लोगों के अलग-अलग तर्कों के बाद ये मसला काफी उलझ गया है। अब इस आकृति की सच्चाई जानने के बाद ही ये साफ हो पाएगा कि साइकिल की आकृति दो हज़ार साल पुरानी है या फिर दो सौ साल पहले हुए नवीनीकरण का एक नतीजा।

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