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चांद पर सैन्य बेस बनाना चाहता था अमरीका

-अमरीकी लेखक जॉन ग्रीनवाल्ड की पुस्तक में सनसनीखेज खुलासा-प्रभुत्व बढ़ाने के लिए अमरीका ने बनाई थी कई योजना, चांद पर परमाणु विस्फोट करना भी चाहता था (Usa wanted to make nuclear explosion on the moon)

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Pushpesh Sharma

Jun 24, 2020

चांद पर सैन्य बेस बनाना चाहता था अमरीका

चांद पर सैन्य बेस बनाना चाहता था अमरीका

न्यूयॉर्क. शीतयुद्ध पर प्रभुत्व साबित करने के लिए अमरीका चांद पर परमाणु परीक्षण करना चाहता था। उस दौर में अमरीका और सोवियत संघ के रिश्ते बेहद खराब हो चुके थे। दोनों ही देशों में वर्चस्व की होड़ लगी थी। ये दावा अमरीकी लेखक जॉन ग्रीनवाल्ड जूनियर ने अपनी ऑनलाइन पुस्तक ‘सीक्रेट्स फ्रॉम द ब्लैक वॉल्ट’ में इसका खुलासा किया है। किशोर अवस्था से ही खुफिया रिपोट्र्र्स में रुचि रखने वाले जॉन अब तक तीन हजार से अधिक खुफिया सूचनाएं संकलित कर चुके हैं।

ब्लैक वॉल्ट ऐसी ही कई सनसनीखेज घटनाओं का ब्योरा पेश करती है। 1959 में अमरीकी सेना के अनुसंधान और विकास प्रमुख लेफ्टिनेंट आर्थर जी. ट्रुडो ने सरकार को सुझाव दिया था कि यदि सोवियत संघ को हराना है तो उसे चांद पर बेस तैयार करना होगा। इससे न केवल अमरीका की प्रतिष्ठा बढ़ेगी, बल्कि देश को मनोवैज्ञानिक लाभ भी मिलेगा। यह अनुमान भी लगाया गया था कि इसे तैयार करने में करीब 6 अरब डॉलर का खर्च आएगा, जो आज लगभग 53 अरब डॉलर के बराबर है।

धरती पर नजर आता विस्फोट
अमरीका के इस खुफिया मिशन को प्रोजेक्ट ए-119 नाम दिया गया था। 1959 में ‘ए स्टडी ऑफ लूनर रिसर्च फ्लाइट्स’ रिपोर्ट में उल्लेख किया गया कि चांद की सूर्य के प्रकाश और अंधेरे के मध्य की सतह को परमाणु विस्फोट के लिए चुना गया था। विस्फोट इस प्रकार किया जाना था, ताकि इसे धरती से भी इसे नंगी आंखों से देखा जा सके। इतना ही नहीं विस्फोटकों में सोडियम भरने की योजना भी थी, ताकि यह और चमकीला नजर आए।

चांद पर बस्ती बसाने का सपना
जॉन के मुताबिक अमरीकी वायुसेना सोवियत संघ सहित पूरी दुनिया को अपना दमखम दिखाने के लिए चांद को इस्तेमाल करना चाहती थी। भौतिक विज्ञानी लियोनॉर्ड रिफेल से भी इस बारे में वायु सेना ने संपर्क किया था। रिफेल कहते हैं कि यह बम हिरोशिमा में इस्तेमाल परमाणु बम जितना ही बड़ा बनाया जाना था। जॉन लिखते हैं, 1959 में अमरीका की योजना चांद पर सैन्य बेस बनाने की भी थी, जिसका कोड नेम ‘हॉरिजन’ रखा गया था। इस योजना का उद्देश्य 1966 तक 10 से 12 लोगों के लिए चांद पर स्थायी कॉलोनी विकसित करने का था।

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