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इस शनि मंदिर के इन दो चमत्कारों की बात सुन हो जाएगा मंदिर में उनके होने पर यकीन, सैकड़ों साल पुरानी है कहानी

यह प्रतिमा खुद ब खुद ही अपना स्थान बदलकर उस स्थान पर आ गई जहां पर अब यह स्‍थापित है

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Arijita Sen

Jan 28, 2019

जूनी का शनि मंदिर

इस शनि मंदिर के इन दो चमत्कारों की बात सुन हो जाएगा मंदिर में उनके होने पर यकीन, सैकड़ों साल पुरानी है कहानी

नई दिल्ली। जैसा कि हम जानते हैं कि शनि मंदिर में महिलाओं के पूजा करने पर सख्त पाबंदी होती है, लेकिन देश में शनि महाराज का एक ऐसा भी मंदिर है जहां पुरूषों और महिलाओं में कोई भेदभाव नहीं है, सभी यहां शनिदेव की पूजा कर सकते हैं। हम यहां बात कर रहे हैं प्राचीन मंदिर जूनी के बारे में जो इंदौर में स्थित है।

मध्यप्रदेश के इंदौर की अहिल्यानगरी में स्थित इस मंदिर की बात ही कुछ और है। यहां वैसे तो हर रोज भक्तों का आना लगा रहता है, लेकिन शनिवार के दिन यहां दूर-दूर से लोग आते हैं और शनिदेव की पूजा करते हैं।

मंदिर के पुजारी मधुसूदन तिवारी इस प्राचीन मंदिर के चमत्कार की बात करते हुए कहते हैं कि आज से करीबन 500 साल पहले यहां शनिदेव प्रकट हुए थे। आज जिस स्थान पर भगवान की प्रतिमा विराजित है वहां पहले गोपालदास महाराज रहा करते थे। बता दें कि गोपालदास वर्तमान पुजारी के पूर्वज पंडित थे। बचपन से नेत्रहीन होने की वजह से उन्हें कुछ भी दिखाई नहीं देता था।

मंदिर में पहले एक 20 फुट ऊंचा टीला था। एक रात शनिदेव ने उन्हें स्वप्न दिया और कहा कि उनकी एक प्रतिमा उस टीले के अंदर दबी हुई है। शनिदेव ने गोपालदास को सपने में ही टीले को खोदकर प्रतिमा को बाहर निकालने का आदेश दिया। गोपालदास ने उनसे कहा कि वह दृष्टिहीन होने के कारण इस काम को करने में असमर्थ है। इस बात पर शनिदेव ने उनसे कहा कि अपनी आंखें खोलो क्योंकि अब से तुम सबकुछ देख सकते हो।

हैरान कर देने वाली बात यह थी कि जब गोपालदास ने अपनी आंखें खोली तो वह वाकई में सबकुछ देख सकते थे। इसके बाद उन्होंने शनिदेव के आदेश का पालन करना शुरू कर दिया यानि कि उन्होंने टीले की खुदाई शुरू कर दी। जब गांववालों को उनके सपने और आंखों के ठीक होने का पता चला तो सभी आश्चर्यचकित हो गए। खुदाई के काम में सभी गोपालदास की मदद करने लगे।

जब पूरे टीले की खुदाई की गई तो वाकई में वहां से शनिदेव की एक प्रतिमा निकली। मूर्ति को बाहर निकालकर वहां उसकी स्थापना की गई और तब से मूर्ति उसी स्थान पर विराजित है। इस मंदिर के बारे में एक और चमत्कारिक कथा प्रचलित है जिसके अनुसार मंदिर परिसर में ही एक दूसरे स्थान पर भगवान राम की मूर्ति स्थापित है। प्राचीनकाल में शनिदेव की इस प्रतिमा को उसी स्थान पर स्थापित किया गया था। एक शनिचरी अमावस्या पर शनिदेव की यह प्रतिमा खुद ब खुद ही अपना स्थान बदलकर उस स्थान पर आ गई जहां पर अब यह स्‍थापित है और उस दिन से शनिदेव की पूजा वहीं हो रही है।

प्रत्येक साल शनि जयंती के अवसर पर यहां भव्य उत्सव का आयोजन किया जाता है। इस दौरान देश भर से यहां श्रद्धालुओं का यहां जमावड़ा लगता है। उत्सव में नामी-गिरामी गायक और संगीतकार भक्ति गीत गाकर ईश्वर के प्रति अपनी आभार प्रकट करने के साथ साथ आने वाले भक्तों का भी मनोरंजन करते हैं।