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क्या है यह ट्राइक्लोसन? सच्चाई जान लेंगे तो अभी इन चीजों को समेटकर घर से करेंगे बाहर

ये ट्राइक्लोसन बड़ी आंत में सूजन व कैंसर का कारण बन सकता है। रिसर्च में शोधकर्ताओं ने चूहों पर इसका इस्तेमाल किया।

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Arijita Sen

Nov 24, 2018

ट्राइक्लोसन

क्या है यह ट्राइक्लोसन? सच्चाई जान लेंगे तो अभी इन चीजों को समेटकर घर से करेंगे बाहर

नई दिल्ली। स्वस्थ रहने के लिए स्वच्छता बहुत जरूरी होता है।हाईजिन मेंटेन किए बिना हम अच्छे स्वास्थ्य के बारे में नहीं सोच सकते हैं। इसीलिए सुबह उठकर ब्रश करने से लेकर साबुन से नहाना ये सभी आवश्यक है। दिन में इंसान कम से कम दो बार ब्रश करता है और साबुन का भी इस्तेमाल कई बार करता है।

अब अगर आपको यह पता लगें कि इन चीजों से सेहत को नुकसान पहुंच रहा है तो ऐसे में आप क्या करेंगे? आपको सोचकर भी अजीब लगें, लेकिन यह सच है। टूथपेस्ट और हाथ धोने वाला साबून भी कैंसर का कारण बन सकता है।

एक शोध में इस बात का खुलासा किया गया था कि,टूथपेस्ट और साबून में एंटीबैक्टीरियल और एंटीफंगल तत्व ट्राइक्लोसन का इस्तेमाल किया जाता है। ये ट्राइक्लोसन बड़ी आंत में सूजन व कैंसर का कारण बन सकता है। रिसर्च में शोधकर्ताओं ने चूहों पर इसका इस्तेमाल किया।ट्राइक्लोसन से चूहों की बड़ी आंत में सूजन पैदा हुई और कोलाइटिस से जुड़ी बीमारी बढ़ने लगी। इसके साथ ही कोलन से जुड़ा हुआ कैंसर चूहों में देखा गया।

अमरीका के मैसाचुएट्स-एमहस्र्ट यूनीवर्सिटी के गुओडोंग झांग का इस बारे में कहना है कि, “इस प्रयोग से एक बात तो साफ है कि ट्राइक्लोसन का आंत के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।” यानि कि एंटीबैक्टीरियल और एंटीफंगल तत्व ट्राइक्लोसन की अधिक मात्रा शरीर के लिए किसी जहर से कम नहीं है।

इसके कुछ दिन बाद एक और नया शोध किया गया। जिसमें वैज्ञानिकों के इस टीम ने चूहों को ट्राइक्लोसन की विभिन्न मात्रा वाले आहार खिलाया।इससे जो परिणाम प्राप्त हुए उससे यह पता चलता है कि इंसान के खून के नमूनों की मात्रा वाले ट्राइक्लोसन की मात्रा चूहों पर इस्तेमाल करने से उनमें कोलन की सूजन ज्यादा विकसित होते दिखाई देती है।

मतलब ट्राइक्लोसन की अधिक मात्रा शरीर में कैंसर का कारण बन सकती है। इसीलिए या तो उन प्रोडक्ट का इस्तेमाल कम से कम करें जिनमें ट्राइक्लोसन का इस्तेमाल किया जाता है या फिर उन चीजों को यूज करें जिनमें इसको यूज नहीं किया जाता है या फिर सबसे बेहतर बिल्कुल नैचुरल चीजों को ही अपनी दिनचर्या में शामिल कर लें।