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मालिक के खातिर इस कुत्ते ने औरंगजेब की सेना को दी थी मात, आज भी वफादारी के इस किस्से को लोग करते हैं याद

बख्तावर के साथ उनका वफादार कुत्ता भी जंग के मैदान में गया। एक कुत्ते को रण भूमि में देखकर मुगल सैनिकों की हंसी छूट गई।

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Arijita Sen

Dec 11, 2018

Mughals

मालिक के खातिर इस कुत्ते ने औरंगजेब की सेना को दी थी मात, आज भी वफादारी के इस किस्से को लोग करते हैं याद

नई दिल्ली। कुत्ता एक वफादार जीव होता है। अपने मालिक की रक्षा के लिए वह अपनी जान तक दे सकता है। इस जीव के वफादारी के कई किस्से आप सभी ने सुना और देखा होगा। आज इतिहास के पन्ने से एक ऐसी ही घटना का जिक्र हम करने जा रहे हैं जिससे एक बार यह बात फिर से साबित हो जाएगा कि वाकई में साथ निभाना कोई इनसे सीखें।

हम यहां उस कुत्ते का जिक्र करने जा रहे हैं जिसने अपने मालिक की जान बचाने के खातिर औरंगजेब की सेना के छक्के छुड़ा दिए थे। बात सन् 1671 की है। उस दौरान लोहारू रिसायत पर ठाकुर मदन सिंह का राज था। महासिंह और नौराबजी नाम उनके दो बेटे भी थे और इनके साथ ही उनका एक वफादार गुलाम भी था जिसका नाम बख्तावर सिंह था।

बता दें, हिसार गैजिटीर में दर्ज विवरण के अनुसार, सन् 1671 में मुगल शासक औरंगजेब इस धनी रियासत से राजस्व वसूल करने की चाहत में ठाकुर मदन सिंह के पास प्रस्ताव भेजा, लेकिन उन्होंने मुगल शासक के इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया। ठाकुर ने मुगल शासक को खत भिजवाकर कहा कि वह अपने राज्य की सुरक्षा करने की क्षमता रखते हैं।

ठाकुर मदन सिंह के इस व्यवहार से बादशाह गुस्से में आ गए और हिसार गवर्नर अलफू खान को लोहारू पर आक्रमण करने का आदेश दिया। जब तक राजा को इस हमले की भनक लगी तब तक मुगल सेना किले में प्रवेश कर चुकी थी।

तत्काल जंग के लिए ठाकुर अपने दोनों बेटों और अपने वफादार बख्तावर को जंग के लिए भेजा। बख्तावर के साथ उनका वफादार कुत्ता भी जंग के मैदान में गया। एक कुत्ते को रण भूमि में देखकर मुगल सैनिकों की हंसी छूट गई।

इस जंग में ठाकुर मदन सिंह के दोनों पुत्र शहीद हो गए, लेकिन उनका वफादार बख्तावर आखिरी समय तक मैदान में डटा रहा। हैरान कर देने वाली बात यह थी कि जैसे ही बख्तावर कि तलवार से जख्मी होकर कोई मुगल सैनिक नीचे गिरता, वह कुत्ता उसकी गर्दन दबोचकर उसे मार देता। इस तरह से उसने कुल 28 मुगल सैनिकों को मार गिराया। इसके साथ ही कई सैनिकों को बुरी तरह से घायल भी किया।

ऐसा होता देख गवर्नर अलफू ने सैनिकों को कुत्ते पर हमला बोलने का आदेश दिया। बख्तावर ने जब उसे बचाने के प्रयास किया तो मुगल सैनिकों ने बख्तावर पर वार किया जिसके चलते युद्ध भूमि में ही उसने वीरगति को प्राप्त किया। अपने मालिक की जान जाते देख कुत्ता सैनिकों पर टूट पड़ा लेकिन तभी एक सैनिक ने तलवार से कुत्ते के धड़ को अलग कर दिया। हालांकि तब तक औरंगजेब की सेना हार मान चुकी थी। फलस्वरूप ठाकुर मदन सिंह के सामने अलफू खान को मैदान छोड़कर भागना पड़ा।

इस जंग को जीतने के बाद ठाकुर मदन सिंह ने उस स्थान पर एक गुंबद का निर्माण करवाया जहां उस वफादार कुत्ते की मौत हुई थी। इसी गुंबद से कुछ दूरी पर बख्तावर सिंह की पत्नी भी उनकी चिता पर सती हो गईं थी। उस स्थान पर उनकी पत्नी की याद में रानी सती का मंदिर बनवाया गया। आज भी लोहारू में वह गुंबद और सती मंदिर आकर्षण और श्रद्धा का केंद्र है। आज भी यहां का बच्चा-बच्चा उस वफादार कुत्ते की वीरगाथा को याद करता है।