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आज तक जिन्हें मानते आ रहे हैं श्रीराम के परम भक्त वो हैं उनके सगे भाई, जानने के लिए पढ़ें पूरी खबर

प्रभु श्रीराम के परम भक्त हनुमान जी वास्तव में उनके भाई भी थे।

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Arijita Sen

May 31, 2018

Lord Rama with Hanuman ji

आज तक जिन्हें मानते आ रहे हैं श्रीराम के परम भक्त वो हैं उनके सगे भाई, जानने के लिए पढ़ें पूरी खबर

नई दिल्ली। भगवान श्रीराम की बात होती है तो सीता मइया के साथ लक्ष्मण की बात भी आ जाती है। एक ऐसा भाई जो हर कदम पर अपने बड़े भाई के साथ खड़ा हुआ। राम और लक्ष्मण के जोड़ी की मिसाल लोग सदियों से देते आ रहे हैं और जब तक दुनिया कायम है तब तक उनका नाम एक साथ आता रहेगा। अब अगर प्रभु श्रीराम का नाम लें और उनके परम भक्त हनुमान जी का जिक्र न हो ऐसा तो हो ही नहीं सकता। कहा जाता है कि अगर हनुमान जी को खुश करना है तो सबसे पहले प्रभू श्रीराम को प्रसन्न करें इससे आपका काम सहज हो जाएगा।

हम सभी ये जानते हैं कि हनुमान जी प्रभु श्रीराम के बहुत बड़े भक्त थे लेकिन क्या आपको पता है कि दोनों वास्तव में भाई भी थे। जी हां, श्रीराम और हनुमान जी दोनों रिश्ते में एक-दूसरे के भाई लगते थे। सुनने में ये बात भले ही अजीब लगे लेकिन ये बिल्कुल सच है।

हमें पता है कि राजा दशरथ की तीन रानियां थीं कौशल्या, कैकेयी और सुमित्रा। तीनों पुत्र सुख से वंचित थी। इस समस्या के समाधान के लिए गुरु वशिष्ठ ने राजा दशरथ को पुत्रेष्टि यज्ञ करवाने का सलाह दिया। अपने गुरू की आज्ञा का पालन करने हेतु राजा ने श्रृंगी ऋषि से इस यज्ञ को करने के लिए कहा।

राजा दशरथ के अनुरोध के चलते श्रृंगी ऋषि यज्ञ करने को तैयार हो गए। यज्ञ भली भांति पूर्ण होने के बाद पवित्र अग्निकुंड में से खीर से भरा हुआ पात्र अपने हाथों में लिए अग्नि देव प्रकट हुए और राजा दशरथ से बोले कि इस यज्ञ से सभी देवता आप से खुश हैं। ये पात्र खीर से भरा हुआ है। इसमें रखे खीर को अपनी तीनों रानियों को खिला दें जिससे आपको चार पुत्रों की प्राप्ति होगी।

अग्नि देव के आज्ञानुसार राजा दशरथ ने सबसे पहले खीर का आधा भाग सबसे बड़ी रानी कौशल्या को दिया। इसके बाद बचे हुए आधे भाग का आधा भाग मंझली रानी सुमित्रा को दिया।तत्पश्चात जो अंत में पात्र में खीर बचा रह गया वो सबसे छोटी रानी कैकयी को दिया। सबसे अन्त में खीर मिलने पर कैकयी को अच्छा नहीं लगा। वो राजा दशरथ से नाराज हो गईं।

तभी भगवान शंकर ने एक माया की रचना की जिसके तहत वहां एक चील आई और कैकयी के हाथ से खीर लेकर उड़ गई। वह चील अंजन पर्वत पर अंजनी देवी के पास पहुंची। उस वक्त देवी तपस्या में लीन थीं।

चील ने खीर देवी के हाथों में जाकर रख दी। अंजनी देवी इसे भगवान का प्रसाद मानते हुए खीर को खा लिया। दूसरी तरफ कौशल्या और सुमित्रा ने अपना बड़प्पन दिखाते हुए और कैकयी की नाराजगी को दूर करने के लिए अपने प्रसाद का कुछ हिस्सा उन्हें दे दिया।

खीर के सेवन से राजा दशरथ की तीनों रानियों गर्भवती हुई। उधर अंजनी देवी भी तीनों रानियों की तरह गर्भवती हुई। वक्त आने पर राजा दशरथ के घर श्री राम, भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न का जन्म हुआ। उधर देवी अंजनी ने भी हनुमानजी को जन्म दिया।


पवित्र अग्निकुंड से निकली एक ही खीर से श्री राम और हनुमान जी का जन्म होने की वजह से दोनों भाई माने जाते हैं।