
यहां हर रोज बनती है लाखों की संख्या में रोटियां, रसोईघर का नजारा कर देगा हैरान
नई दिल्ली। दुनिया में ऐसी कई सारी जगहें हैं जहां लोगों को मुफ्त में खाना खिलाया जाता है। काशी में अन्नपूर्णा मंदिर, सिरडी का साई बाबा मंदिर इत्यादि ऐसी कई सारी जगहें हैं जहां हर रोज लाखों की तादात में लोग मिलकर भोजन करते हैं। इ
सके साथ-साथ गुरुद्वारों में भी लंगर चलता है। जहां भक्त सेवा प्रदान करते हैं और बदले में भोजन करते हैं। आज हम आपको दुनिया के सबसे बड़े लंगर के बारे में बताने जा रहे हैं जहां हर रोज 50-70 हजार लोग आते हैं और प्रसाद ग्रहण करते हैं। किसी त्यौहार विशेष में यह संख्या बढ़कर 1 लाख से ऊपर चली जाती है।
हम यहां अमृतसर के स्वर्ण मंदिर की बात कर रहे हैं। देश-विदेश से लोग अमृतसर में स्वर्ण मंदिर में दर्शन को आते हैं। यहां आने वाला हर इंसान लंगर में प्रसाद ग्रहण करता है। बता दें, यहां मंदिर में लंगर की परंपरा की शुरूआत गुरु नानक देव जी ने की दी थी। उनके इस परंपरा को आगे बढ़ाने का काम अमरदास जी ने किया।
गोल्डन टेम्पल में हर रोज नियमित रूप से हजारों लोगों के लिए खाना बनता है और शायद यही वजह है कि इसे दुनिया का सबसे बड़ा किचन कहा जाता है। गोल्डन टेम्पल में खाना बनाने के लिए खास व्यवस्था की गई है। हजारों सेवक यहां रोज सेवा करते हैं।
यहां रोज प्रसाद बनाने के लिए 12,000 किलो आटा, 13,000 किलो दाल, 1500 किलो चावल और 2000 हजार किलो सब्जियों का इस्तेमाल किया जाता है। जी हां, और तो और मंदिर में रोजाना 2 लाख के करीब रोटियां बनाई जाती हैं। रोटी बनाने के लिए मशीन का इस्तेमाल किया जाता है। इस रोटी मेकिंग मशीन से एक घंटे में 25,000 रोटियां बनाई जाती हैं।
मंदिर में भक्तों को खाने के साथ खीर भी दी जाती है जिसके लिए 5000 लीटर दूध,100 किलो शक्कर और 500 किलो घी का इस्तेमाल किया जाता है। स्वर्ण मंदिर के किचन में खाना बनाने के लिए 450 लोगों के साथ-साथ वॉलंटियर्स भी काम करते हैं। जाहिर सी बात है जब खाना इतनी अधिक मात्रा में बनाई जा रही है तो बरतन भी विशालकाय होते होंगे।
यहां किचन में दो बड़े हाल हैं जिसमें 5000 लोग एक साथ एक बार में बैठकर खाना खा सकते है। यहां किचन का काम कभी भी थमता नहीं है। दिन रात यहां काम होता रहता है। न केवल भोजन बल्कि यहां पर प्रसाद में चाय भी मिलती है।
खास बात तो यह है कि यहां पर मधुमेह रोगियों के लिए स्पेशल शुगर फ्री चाय बनाई जाती हैं। यहां विदेशी भी आते हैं और इस बात को ध्यान में रखते हुए मंदिर में विदेशियों के लिए अलग व्यवस्था की गई है।
Published on:
16 Aug 2018 01:57 pm
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