
हेवी ट्रैफिक को देखते हुए यहां वैज्ञानिकों ने बना दिया हैंगिंग ट्रेन, दुनिया की सबसे पुरानी मोनो रेल में से है एक
नई दिल्ली। हर रोज ट्रैफिक का सामना हम सभी को करना पड़ता है। घर से जल्दी निकलने के बावजूद इस हेवी ट्रैफिक के चलते लगभग कई लोग डेली स्कूल, कॉलेज या ऑफिस पहुंचने में लेट हो जाते हैं। कुछ ऐसा ही नजारा है जर्मनी के वुप्पर्टल शहर का, जहां व्यस्त सड़कों में से होकर निकलना वाकई में एक मुश्किल काम है। हालांकि जब समस्या है तो उसका समाधान भी है। सड़कों पर जाम लगने की इस परेशानी से निपटने के लिए यहां के इंजीनियरों ने हैंगिंग ट्रेन का आविष्कार किया।
आपको जानकर हैरानी होगी कि यह कोई आज या कल की बात नहीं है बल्कि सालों पहले इसे बनाया गया था। इस वजह से यह रेल सेवा काफी पुरानी है।
साल 1901 में बिजली से चलने वाली इस ट्रेन की शुरूआत की गई। हैंगिंग ट्रेन जमीन से 40 फीट की ऊंचाई से चलती है। आप सोच सकते हैं कि टेक्नोलॉजी के मामले में यहां के वैैज्ञानिकों का विचार किस हद तक हटकर है।
हैंगिग ट्रेन के ट्रैक की लंबाई 13.3 किलोमीटर है। हर रोज इस दूरी को 39 फीट की ऊंचाई से चलकर तय की जाती है। यात्रा के दौरान यह ट्रेन 20 स्टेशनों में से होकर गुजरती है। प्रतिदिन इसमें करीब 82 हजार यात्री सफर करते हैं जिनमें से कुछ टूरिस्ट भी होते हैं।
इसमें सफर करना भी काफी सुरक्षित है हालांकि, साल 1999 में इस ट्रेन से एक दुर्घटना हो गई थी। हुआ यह था कि अचानक से यह ट्रेन वुप्पर नदी में गिर गई। इस एक्सीडेंट में करीब 5 लोगों की मौत हुई थी। उसके बाद से अब तक ऐसा किसी भी प्रकार का हादसा नहीं हुआ है।
पटरी से लटककर चलने वाली इस ट्रेन में यात्री सीधा ही बैठते हैं। इसे लोग हैंगिंग ट्रेन या Wuppertal Suspension Railway के नाम से जानते हैं। इसे दुनिया की सबसे पुरानी मोनो रेल में से एक माना जाता है।
यह वाकई में अपने आप में बेहद अनोखा है। इस वजह से डेली पैसेंजर्स के अलावा टूरिस्ट्स भी इसमें यात्रा करने से खुद को रोक नहीं पाते हैं।
Published on:
11 Jan 2019 12:11 pm
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