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मृत्यु के बाद जल्दी से जल्दी क्यों शव का कर दिया जाता है अंतिम संस्कार? जानिए

गरुड़ पुराण में लिखा है कि, जब तक गांव या मोहल्ले में किसी की लाश पड़ी होती है तब तक घरों में पूजा नहीं होती और किसी घर का चूल्हा नहीं जलता। किसी की मृत्यु पर कोई शुभ काम नहीं किया जा सकता।

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सडक़ पर सजा दी महिला की अर्थी, होने वाला था अंतिम संस्कार और फिर...

नई दिल्ली। कल तक जीवित होने पर हम जिसके लिए सबकुछ करने को तैयार रहा करते थे। उसकी मौत के बाद से ही हम जल्दी से उसका अंतिम संस्कार करने के लिए क्यों तैयार रहते हैं? लाश को जलाने की क्यों जल्दी होती है। गरुड़ पुराण में लिखा है कि, जब तक गांव या मोहल्ले में किसी की लाश पड़ी होती है तब तक घरों में पूजा नहीं होती और किसी घर का चूल्हा नहीं जलता। किसी की मृत्यु पर कोई शुभ काम नहीं किया जा सकता। समय रहते मृत व्यक्ति का अंतिम संस्कार करने से उसकी आत्मा को परलोक में उत्तम स्थान मिलता है। गरुड़ पुराण की माने तो अगर किसी मृत व्यक्त‌ि का अंत‌िम संस्कार नहीं होता है तो उसकी आत्मा को मुक्ति नहीं मिलती और मृत्‍यु के बाद वो प्रेत बनकर भटकती रहती है और कष्ट भोगती है।

सनातन धर्म में मनुष्य के लिए जन्म से लेकर मृत्यु तक सोलह संस्कार बताए गए हैं। कहते हैं जलाते वक़्त लाश के हाथ-पैर बांध दिए जाते हैं ऐसा करने के पीछे कारण होता है कि व्‍यक्ति के शरीर पर पिशाच कब्ज़ा न कर सकें। हिंदू धर्म में सूर्यास्त के बाद कभी भी दाह संस्कार नहीं किया जाता। यह माना जाता है कि सूर्यास्त होने के बाद अंतिम संस्कार करने से मृत्य व्यक्ति की आत्मा को परलोक में कष्ट होता है इसलिए सूर्यास्त होने के बाद किसी की मृत्यु हुई है तो उसे अगले दिन सुबह ही जलाया जाता है। इतना ही नहीं जलाने से पहले घर और रास्ते में पिंड दान करने से देवता-पिशाच खुश हो जाते हैं और लाश अग्नि में समा जाने के लिए पूरे तरीके से तैयार हो जाती है।