
पतंगबाजी से जुड़ा है मकर संक्रांति का इतिहास, भगवान श्री राम ने भाइयों संग उड़ाई थी पतंग
नई दिल्ली। आमतौर पर देश-दुनिया में होने वाले प्रत्येक पर्व-त्योहार के पीछे कुछ न कुछ धार्मिक मान्यताएं और परंपराएं होती है। ठीक ऐसे ही मकर संक्रांति पर भी परंपरा है कि इस दिन लोगों को पतंग उड़ानी चाहिए। यही वजह है महाराष्ट्र और गुजरात जैसे प्रदेशों में तो पतंग उड़ाने के लिए विदेशी शैलानी तक आते हैं। बता दें कि त्रेतायुग में भगवान श्री राम ने मकर संक्रांति के दिन ही अपने भाइयों और श्री हनुमान के साथ पतंग उड़ाई थी, इसलिए तब से यह परंपरा पूरी दुनिया में प्रचलित हो गई।
अयोध्या से देवलोक तक पहुंची थी श्री राम की पतंग
गौरतलब है कि 'रामचरित मानस' के 'बालकांड' में एक चौपाई है, 'राम इक दिन चंग उड़ाई। इन्द्रलोक में पहुंची जाई।।' 'जासु चंग अश सुन्दरताई। सो पुरुष जग में अधिकाई।।' अर्थात बाल्यावस्था में प्रभु श्रीराम ने अपने भाइयों के साथ मकर संक्रांति के अवसर पर सूर्य के उत्तरायण होने पर अयोध्या में पतंग उड़ाई थी। भगवान श्री राम ने पतंग उड़ाते समय इसको इतनी ठील दे दी की यह उड़ते हुए इंद्रलोक तक पहुंच गई। देवलोक में ऐसी सुंदर पतंग देखकर जयंत की पत्नी काफी मोहित हो गईं थीं और सोचने लगी थीं कि जब पतंग इतनी सुंदर है तो उड़ाने वाला तो और भी मनमोहक होगा और उसे देखने के लिए पतंग को पकड़ लिया। ऐसे में पतंग की खोज के लिए हनुमान को भेजा गया था।
चित्रकूट में दर्शन देने का किया था वादा
जब हनुमान पतंग की खोज में इंद्रलोक पहुंचे तो क्या देखते हैं कि एक महिला ने पतंग को पकड़ रखा है। हनुमान ने उनसे पतंग को छोड़ने का आग्रह किया तो उन्होंने पतंग उड़ाने वाले के दर्शन की इच्छा व्यक्त की। ऐसे में हनुमान वापस अयोध्या आए और अपने आराध्य राम को सारा वृतांत कह सुनाया। तब राम ने हनुमान को वापस भेजा और संदेश कहलवाया कि वो चित्रकूट में आकर दर्शन देंगे। इसके बाद जयंत की पत्नी ने उनकी पतंग छोड़ दी। इस प्रसंग से अंदाजा लगाया जा सकता है कि पर मकर संक्रांति और पतंग की प्राचीनता कितनी अधिक पुरानी है।
Published on:
14 Jan 2019 12:36 pm
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