
प्यार में धोखा खाई नर्मदा नदी ने उठाया था ऐसा कदम, भारत के इतिहास दर्ज है ये अनोखी प्रेम कहानी
नई दिल्ली। रेवा के नाम से भी जानी जाने वाली नर्मदा नदी को लेकर एक अजीबोगरीब तथ्य मौजूद है। नर्मदा को लेकर कहा जाता है कि, वह बाकी नदियों की तरह एक ही दिशा यानी एक ही दिशा पश्चिम से पूर्व की ओर नहीं बल्कि उनके विपरीत दिशा में बहती है। आपको जानकारी के लिए बता दें कि गंगा सहित भारत की सारी नदियां बंगाल की खाड़ी में जाकर विलीन होती हैं लेकिन सिर्फ नर्मदा ही ऐसी नदी है जो अरब सागर से जाकर मिलती है। इसकी लंबाई की बात करें तो यह 1312 किलोमीटर तक फैली हुई है। मैकल पर्वत के अमरकण्टक शिखर से नर्मदा नदी की उत्पत्ति हुई है। पूरब से पश्चिम की ओर बहने वाली नर्मदा मध्यप्रदेश और गुजरात की प्रमुख नदी है। नर्मदा के उल्टी दिशा में बहने के पीछे एक किंवदंती बहुत प्रचलित है। बता दें की नर्मदा राजा मैखल की पुत्री थीं। जब नर्मदा शादी के लायक हुई तो राजा मैखल ने घोषणा कर दी कि जो राजकुमार नर्मदा के गुलबकावली फूल लाएगा वे उससे अपनी पुत्री का विवाह करा देंगे।
इस लोक कथा के अनुसार सोनभद्र गुलबकावली का फूल ले आए। जिसके बाद राजा मैखल ने नर्मदा का विवाह सोनभद्र से तय कर दिया। नर्मदा ने सोनभद्र को कभी देखा नहीं था लिहाजा उन्हें देखने की इच्छा से नर्मदा ने अपनी दासी जुहिला के हाथों उन्हें एक पत्र भेजा। जुहिला ने जाने से पहले नर्मदा से उनके कपड़े और आभूषण मांगे वही कपड़े और गहने वह पहनकर सोनभद्र से मिलने चली गई। सोनभद्र ने जुहिला को ही राजकुमारी समझ लिया और उसके सामने प्रेम प्रस्ताव रख दिया। जुहिला की भी नियत डगमगा गई और उसने सोनभद्र का प्रणय निवेदन स्वीकार कर लिया। काफी दिन तक जुहिला के न लौटने पर नर्मदा चिंतित हो गईं और खुद ही सोनभद्र से मिलने चली गईं। वहां जाकर उन्होंने जुहिला और सोनभद्र को एक साथ पाया। इस छल से क्रोधित होकर उल्टी दिशा में चलने लगीं। उल्टा चलते-चलते वे बंगाल की खाड़ी के बजाय अरब सागर में जाकर विलीन हो गईं।
Published on:
10 Jan 2019 02:30 pm
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