
पहले के जमाने में इस वजह से मुस्लिमों को दी गई थी चार शादियों की इजाजत, जिसका आज नहीं कोई मतलब, फिर भी...
नई दिल्ली। हर धर्म में कुछ अच्छी बातें होती है जो हमारी परेशानियों को दूर कर हमें जिंदगी में आगे बढ़ने की सीख देती है। वहीं कुछ ऐसी भी चीजें या कुरीतियां भी हर धर्म का हिस्सा होती हैं जो हमें आगे बढ़ने से रोकती है, इंसान या समाज के विकास में बाधा उत्पन्न करती है। आज हम इस्लाम धर्म में मानी जाने वाली एक ऐसी ही बात का जिक्र करेंगे जिसे सदियों पहले किसी खास मकसद को ध्यान में रखकर बनाया गया था, लेकिन उसका पालन आज भी लाग बेवजह करते आ रहे हैं।
हम यहां बात कर रहे हैं इस्लाम में चार शादियों के बारे में। धर्म की दुहाई देते हुए लोग कहते हैं कि इस्लाम में चार बीवियां रखने की इजाजत है।
क्या आपने कभी इस बारे में जानने की कोशिश की ऐसा क्यों किया जाता था? इसे करने की वजह क्या रही होगी?
इस्लाम के जानकारों से जब यह सवाल पूछा गया तो उनका कहना था कि पहले के जमाने में ऐसा करने की एक खास वजह थी।जो अब लागू नहीं होती है।
दरअसल, पहले मुस्लिम समुदाय के कबीलों में युद्ध होते रहते थे। अब युद्ध में दोनों पक्षों का घायल होना, मौत होना यह स्वाभाविक है। ऐसे में पुरुष जब युद्ध में मारे जाते थे तो महिलाएं विधवा हो जाती थी। विधवा औरतों के सरंक्षण को ध्यान में रखते हुए उस वक्त इस्लाम में चार शादियों की इजाजत दी गई थी। ताकि उन बेसहारा महिलाओं को सरंक्षण मिल सकें।
आज ना तो युद्ध होते हैं और ना ही ऐसी कोई समस्या पैदा होती है, लेकिन बावजूद इसके इस नियम को आजतक लोग आंख मूंदकर मानते आ रहे हैं। कुरान में महिलाओं का विशेष रूप से ध्यान भी रखा गया है। कुरान में ये बात भी कही गई है कि अगर कोई व्यक्ति चार बीवियां रखता है तो उसे चारों बीवियों को एक जैसा प्यार, एक जैसा हक और एक जैसी इज्जत देने होगी।
अगर वह ऐसा कर पाने में असमर्थ रहता है तो इसे Haram माना जाएगा। पहले के जमाने में कुछ नियम-कानून ऐसे थे जो उस वक्त की परिस्थिति को ध्यान में रखकर बनाए गए थे जिसका आज कोई मतलब है ही नहीं, लेकिन बावजूद इसके लोग इन्हें अपने लाभ व फायदे के लिए मनाते आ रहे हैं।
Updated on:
27 Aug 2018 01:54 pm
Published on:
27 Aug 2018 01:53 pm
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