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इस मंदिर में जाने से डरता है नेपाल का राज परिवार, हो सकती है मौत

ये मंदिर राज परिवार के लिए शापित है और इस शाप के डर की वजह से राजपरिवार इस मंदिर में दर्शन के लिए नहीं जाते हैं।

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Mahima Pandey

Feb 10, 2022

Mysterious temple of budhanikantha, Nepal Raj pariwar does not worship

Mysterious temple of budhanikantha, Nepal Raj pariwar does not worship

सनातन धर्म से जुड़े कुछ ऐसे रहस्य भी हैं जिन्हें सुनने और जानने के बाद उसपर यकीन करना मुश्किल हो जाता है। भारत के पड़ोसी देश नेपाल में भी एक ऐसा ही मंदिर है जो अपने रहस्य के लिए लोकप्रिय है। इस मंदिर में आम नागरिक तो पूजा कर सकता है परंतु नेपाल का राजपरिवार इस मंदिर में पूजा नहीं कर सकता है। यदि ऐसा वो करते हैं तो उनकी मौत हो जाती है। आइए जानते हैं इस मंदिर के बारे में..

भगवान विष्णु का है प्रसिद्ध मंदिर का नाम है बुदानिकंथा। ये मंदिर शिवपुरी पहाड़ी के बीच स्थित है। ये प्राचीन मंदिर दुनियाभर में अपनी सुंदरता और चमत्कार के लिए प्रसिद्ध है। कहा जाता है कि ये मंदिर राज परिवार के लिए शापित है और इस शाप के डर की वजह से राजपरिवार इस मंदिर में दर्शन के लिए नहीं जाते हैं।

इस मंदिर को लेकर कहा जाता है कि यदि राज परिवार का कोई भी सदस्य भगवान विष्णु की स्थापित मूर्ति के दर्शन करता है, तो उसकी मौत हो जाएगी। इसके पीछे का कारण राजपरिवार को मिला शाप है। राज परिवार के लोग इस मंदिर में पूजा-पाठ करने भी नहीं जाते हैं। यही कारण है कि राजपरिवार के लिए मंदिर में भगवान विष्णु की एक वैसी ही दूसरी प्रतिमा स्थापित की गई है।

बुदानिकंथा मंदिर में भगवान विष्णु एक पानी के कुंड में 11 सर्पों के ऊपर सोती हुई मुद्रा में विराजमान हैं। भगवान विष्णु की काले रंग की यह मूर्ति नागों की सर्पिलाकार कुंडली पर स्थित है। एक प्रचलित कथा के अनुसार, एक बार एक किसान इस स्थान पर काम कर रहा था तभी उसे यह मूर्ति मिली थी। 13 मीटर लंबे तालाब में स्थित भगवान विष्णु की मूर्ति पांच मीटर की है। नागों का सिर भगवान विष्णु के छत्र के रूप में स्थित है।

इस मंदिर में केवल भगवान विष्णु की ही नहीं, बल्कि भगवान शंकर की भी प्रतिमा स्थापित है। पौराणिक कथा के मुताबिक, समुद्र मंथन के दौरान जब विष निकला था, तब भगवान शिव ने इस सृष्टि को बचाने के लिए विष को पी लिया था। इसके बाद भगवान शिव के गले में जलन होने लगी, तो उन्होंने इस जलन को नष्ट करने के लिए पहाड़ पर त्रिशूल से वार कर पानी निकाला और इसी पानी को पीकर उन्होंने अपनी प्यास बुझाई थी और गले की जलन को नष्ट किया था।

शिव जी के त्रिशूल की वार से निकला पानी एक झील बन गया अब इसी झील को कलयुग में गोसाईकुंड कहते हैं।

बुदानीकंथा मंदिर में स्थित तालाब के पानी स्त्रोत यह कुंड ही है। अगस्त माह में इस मंदिर में हर साल शिव महोत्सव का आयोजन भी किया जाता है। कहा जाता है कि इस दौरान इस झील के नीचे भगवान शिव की छवि दिखाई देती है।