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आखिर लाल चांद को देखकर क्यों रोने लगते हैं भेड़िए, जानिए हैरान कर देने वाली वजह

सुपर मून या फुल मून पर चंद्रमा अन्य दिनों के मुकाबले धरती के सबसे करीब यानी 3,63,000 किमी की दूरी पर होता है

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Pratibha Tripathi

Nov 06, 2020

wolf moon

wolf moon

नई दिल्ली। सुपर ब्लड वुल्फ मून जिसका रंग रोज निकलने वाले चन्द्रमा से काफी अलग होता है। जो जनवरी में आने वाली पूर्णिमा के दिन दिखाई देता है इसे वुल्फ मून इसलिए कहा जाता है क्योंकि पौराणिक समय से ही सर्दियों में वादियां बर्फ घिरी हुई होती थी और इस समय भेड़ियों की आवाज़ कुछ ज्यादा आती है और यही कहा जाता है कि आसमान में लाल चांद को देखकर भेड़िए चिल्लाने लगते हैं।

यदि इस चीज को साइस की नजरो से देखा जाए तो अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के मुताबिक, जब चंद्रमा अन्य दिनों के मुकाबले धरती के सबसे करीब यानी 3,63,000 किमी की दूरी पर होता है। तब वह और अधिक चमकदार और बड़ा दिखाई देने लगता है। इस दौरान चांद का रंग लाल तांबे जैसा नजर आता है, और यही लाल रंग दिखने के कारण ब्लड मून कहा जाता है।

और ऐसी मान्यता है कि पूर्णिमा की रात जब भेड़िये भोजन की तलाश के लिए बाहर निकलते है तो ऐसी चमकदार रात को देख भेड़िये आसमान में लाल चांद को देखकर जोर-जोर से आवाज लगाते हैं यानी कि चिल्लाते हैं। इसलिए इस चंद्र ग्रहण को वुल्फ मून भी कहा जाता है।