
तो इस वजह से फांसी पर चढ़ाने से पहले पूछी जाती है कैदी की अंतिम इच्छा, नहीं तो होता है बड़ा नुकसान
नई दिल्ली। ये बात हम सभी ने सुनी है कि मरते हुए इंसान की अंतिम इच्छा को पूरी करनी चाहिए। इससे पुण्य की प्राप्ति होती है। चाहे वो इंसान कैसा भी क्यों न हो लेकिन उसकी अंतिम इच्छा को जरूर पूरी करनी चाहिए।
शायद इसी वजह से फांसी की सजा प्राप्त कैदी को भी फंदे पर लटकाने से पहले उसकी आखिरी इच्छा के संबंध में उससे पूछा जाता है। हांलाकि इसमें कुछ शर्तों का पालन किया जाता है। आज हम आपको इस बारे में बताते हैं।
सबसे पहली बात तो ये हैं कि अपनी अंतिम इच्छा के रूप में कैदी अपनी सजा को माफ नहीं करा सकता है। कैदी के पास ये अधिकार होता है कि वो चाहें तो मरने से पहले अपनी पंसद के अनुसार कोई भी डिश या खाना जेल प्रशासन से मंगा सकता है। अगर कोई कैदी ऐसा कहता है तो उसकी ये इच्छा निश्चित रूप से पूरी की जाती है।
फांसी की सजा प्राप्त कैदी अगर चाहे तो आखिरी इच्छा के तहत अपने परिवार के सदस्यों से मिलने की मांग कर सकता है। उसे ये मौका दिया जाता है कि वो मृत्यु ग्रहण करने से पहले अपने परिवार के लोगों से मिल सकें और जिंदगी की आखिरी वार्तालाप कर सकें।
अकसर आपने ऐसा सुना होगा कि फांसी की सजा से पहले अपराधी अपनी इच्छानुसार किसी भी धार्मिक पुस्तक को पढ़ता है। अगर उसने किसी धार्मिक ग्रंथ या पुस्तक को पढ़ने की इच्छा जताई है तो जेल प्रशासन द्वारा इसे खुशी-खुशी पूरा किया जाता है।
इनके अलावा अगर उसकी कोई खास इच्छा होती है तो उसे पूरा करने का कोई प्रावधान नहीं है।
Published on:
09 Jun 2018 10:15 am
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