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इस वजह से महिलाओं को हर महीने झेलना पड़ता है पीरियड्स का दर्द, इंद्र देव हैं इसके लिए जिम्मेदार

अनजाने में वह जिस ब्रह्म-ज्ञानी की सेवा कर रहे थे उनकी माता एक असुर थी।

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Arijita Sen

Jan 20, 2019

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इस वजह से महिलाओं को हर महीने झेलना पड़ता है पीरियड्स का दर्द, इंद्र देव हैं इसके लिए जिम्मेदार

नई दिल्ली। मासिक धर्म या पीरियड्स एक नियमित प्रक्रिया है जो निश्चित आयु से शुरू होकर एक निश्चित उम्र सीमा पर जाकर खत्म हो जाती है। हालांकि पुराणों में इसके होने के पीछे एक रोचक कहानी का जिक्र है जिसके बारे में आज हम आपको बताने जा रहे हैं।

यह कहानी इंद्रदेव से संबंधित है। भागवत पुराण में ऐसा कहा गया है कि एक बार ‘बृहस्पति’ जिन्हें देवताओं का गुरु माना जाता है, वे किसी कारणवश इन्द्र देव से काफी नाराज हो गए। इसी दौरान असुरों ने देवलोक पर आक्रमण कर दिया जिसके चलते इन्द्र देव को अपनी गद्दी छोड़ कर भागना पड़ा।

बचते-बचाते हुए इंद्र देव सृष्टि के रचनाकार भगवान ब्रह्मा के पास पहुंचे और उनसे मदद की मांग की। ब्रह्मा जी ने इंद्र देव को सुझाव दिया कि उन्हें एक ब्रह्म-ज्ञानी की सेवा करनी चाहिए। यदि वह उनकी सेवा से वह प्रसन्न हो जाते हैं तभी उन्हें उनकी गद्दी वापस मिलेगी।

इन्द्र देव ने बिल्कुल वैसा ही किया जैसा कि ब्रह्मा जी ने उनसे कहा। हालांकि अनजाने में वह जिस ब्रह्म-ज्ञानी की सेवा कर रहे थे उनकी माता एक असुर थी। इस वजह से असुरों के प्रति उनके मन में एक विशेष लगाव था।

इन्द्र देव द्वारा अर्पित की गई सारी हवन की सामग्री जो देवताओं को चढ़ाई जाती है, वह ज्ञानी उसे असुरों को चढ़ा दिया करता था। इससे इन्द्र देव को उनकी सेवा का लाभ नहीं मिल पा रहा था। जब उन्हें इसकी सच्चाई का पता लगा तो उन्हें बेहद गुस्सा आया और उन्होंने उस ब्रह्म-ज्ञानी की हत्या कर दी।

अब जैसा कि हम जानते हैं कि किसी की हत्या करना पाप है और एक गुरु की हत्या करना घोर पाप है। इस वजह से इन्द्र देव पर ब्रह्म-हत्या का पाप आ गया। एक भयानक राक्षस के रूप में यह पाप उनका पीछा करने लगा। इससे बचने के लिए उन्होंने स्वयं को एक फूल के अंदर छुपाया और इससे मुक्त होने के लिए लगभग एक लाख साल तक भगवान विष्णु की तपस्या की।

भगवान विष्णु आखिरकार संतुष्ट हो गए और उन्होंने इन्द्र देव को बचा लिया लेकिन पाप मुक्ति के लिए उन्हें एक सुझाव दिया। जिसके अनुसार इन्द्र को पेड़, जल, भूमि और स्त्री को अपने पाप का थोड़ा-थोड़ा हिस्सा देना था। इन्द्र ने जब इस बारे में इन चारों से आग्रह किया तो सभी मान गए, लेकिन चारों ने शर्त रखा कि इसके बदले में उन्हें एक वरदान भी देना होगा।

सबसे पहले पेड़ ने पाप का एक-चौथाई हिस्सा लिया और उसे वरदान मिला कि पेड़ अगर चाहें तो स्वयं ही अपने आप को जीवित कर सकता है।

इसके बाद जल की बारी आई तो पाप का हिस्सा लेने के बदले उसे वरदान मिला कि जल में अन्य वस्तुओं को पवित्र करने की क्षमता होगी।

इन्द्र देव ने भूमि को वरदान दिया कि उस पर आई कोई भी चोट हमेशा अपने आप ही भर जाएगी।

स्त्री ने पाप हिस्सा लिया तो फलस्वरूप उन्हें हर महीने मासिक धर्म होता है लेकिन जब वरदान देने की बारी आई तो इन्द्र देव ने कहा कि महिलाएं, पुरुषों की अपेक्षा कई गुना ज्यादा काम कर पाएंगी।

हालांकि यह एक पौराणिक कहानी है जिसका विज्ञान से दूर-दूर तक कोई संबंध नहीं है। विज्ञान और आध्यात्म दोनों की अपनी अगल परिभाषाएं हैं।