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पूरे गांव पर आई थी आफत, बच्चे के हाथ-पैर पड़ रहे थे नीले, तभी भगवान ने भेजे दूत!…

इतनी कोशिश करने के बाद भी प्रसव पीड़ा से जूझ रही महिला कविता ने बच्चे को तब तक जन्म दे दिया था। लेकिन नवजात की काफी कमजोर पैदा लिहाजा उसे तुरंत उपचार की ज़रुरत थी।
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नई दिल्ली

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Priya Singh

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Updated: 1 Nov 2018, 12:35 PM IST

youth saved the pregnant woman and her infant

भीषण बारिश में डूबा था पूरा गांव, बच्चे के हाथ पैर पड़ रहे थे नीले, तभी भगवान ने भेजे दूत!...

नई दिल्ली। यातायात की समस्या और रास्तों की बुरी हालत के बावजूद हमारे देश में लोग रोज़ मर्रा के काम किसी भी तरह करते हैं। लेकिन जब किसी की जान पर बन आए तो मुश्किलें बढ़ जाती हैं। मगर हर रोज़ की इन्हीं मुश्किलों के बीच हम आपके सामने एक ऐसी घटना का ज़िक्र करने जा रहे हैं जिसके बारे में आप सुनकर हैरान रह जाएंगे। यह आश्चर्यजनक घटना ने एक प्रसव पीड़ा से जूझ रही महिला को सरकारी एम्बुलेंस तक सही समय पर पहुंचाया भी और उसके नवजात को शिशु को नया जीवन भी दिया।

यह घटना है कोयंबतूर के गांधीवाल गांव की। यहां एक रहने वाले 37 वर्षीय नाणजप्पन पेशे से कूली हैं। पिछले हफ्ते उनकी पत्नी गर्भवती थीं उनकी पत्नी की डिलीवरी का समय नज़दीक आ रहा था उन्हें आपातकालीन सेवा की सख्त आवश्यकता थी। उस दिन करीब 5:00 बजे उन्होंने एम्बुलेंस के लिए फोन किया अस्पताल को इस बात की सूचना मिली तो वहां के आपातकालीन चिकित्सा तकनीशियन (ईएमटी) के रोजा और एम्बुलेंस चालक अरुण कुमार तुरंत रोगी के की मदद के लिए तुरंत निकले। लेकिन जैसे ही वे गांव के पुलिया के पास पहुंचे तो उन्होंने पुलिया को पूरी तरह से बारिश के पानी से डूबा हुआ पाया। अपने कर्तव्य को पूरा करने में उनके सामने आई मुश्किल के बारे में उन्होंने सोचा ही नहीं था। इसके बाद कर्तव्यनिष्ठ रोजा और अरुण ने रोगी तक पहुंचने के लिए दूसरा रास्ता निकालने का सोचा। सड़क और पुल पूरी तरह पानी में डूबे हुए थे तो गर्भवती को उस रस्ते ले जाना उचित नहीं था। उन्होंने एक गोल नाव का सहारा लेने की सोची और पल पार करने के लिए एक बाइक वाले से मदद लेकर कुछ दूरी को तय किया।

इतनी कोशिश करने के बाद भी प्रसव पीड़ा से जूझ रही महिला कविता ने बच्चे को तब तक जन्म दे दिया था। लेकिन नवजात की काफी कमजोर पैदा लिहाजा उसे तुरंत उपचार की ज़रुरत थी। रोजा और अरुण फिर एम्बुलेंस को लेना गए। उन्होंने ने प्रथम उपचार को देखते हुए बच्चे की नाभि को तो काट दिया था लेकिन उसे ऑक्सीजन की आवश्यकता थी। अब सिटी यह थी कि कविता को इस हालत में नाव पर नहीं ले जाया जा सकता था आखिरकार उन्हें जल्द ही दूसरा रास्ता मिल गया और वे कविता और उस नवजात बच्चे को लेकर अस्पताल पहुंचे बच्चे की हालत इतनी नाज़ुक थी कि उसके हाथ पेअर नीले पड़ रहे थे लेकिन इन दोनों कर्मचारियों की सूझबूझ और हिम्मत ने जच्चा और बच्चा दोनों को किसी अनहोनी का शिकार होने से बचा लिया ऐसी घटनाओं से हमें हमेशा ही सबक लेना चाहिए और पीड़ा से जूझ रहे लोगों की मदद करनी चाहिए।

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