
गर्भावस्था की दूसरी तिमाही में गैस और अपच आदि की समस्या आम है। लेकिन इस समय हैल्दी डाइट और नियमित योग-व्यायाम का ध्यान रखा जाए तो न केवल प्रसव सामान्य होता है, बल्कि गर्भस्थ शिशु का विकास भी अच्छा होता है। शी केयर योग सीरीज में जानते हैं कि दूसरी तिमाही में गर्भवती कौन-कौनसे योग कर सकती हैं।
त्रिकोणासन
विधि: दोनों पैरों के बीच में दो से तीन फुट का गैप रखकर खड़े हों। दाएं पैर को दाईं ओर मोडक़र रखें। कंधों की ऊंचाई तक हाथ फैलाएं। अब दाएं हाथ से दाएं पैर को छूने की कोशिश करें और बायां हाथ आकाश की ओर रखें। अब वापस सीधे हो जाएं और दूसरे हाथ से भी इसी तरह करें। ऐसा 15-20 बार दोहराएं।
लाभ : इससे पैर व शरीर मजबूत होता है। ब्लड सर्कुलेशन ठीक और हिप्स मजबूत होते हैं। इससे रीढ़ की हड्डी और सीने को मजबूती भी मिलती है। नर्वस सिस्टम बेहतर होता है।
पूर्ण तितली आसन
विधि: जमीन में बैठते हुए घुटने मोड़ लें और दोनों पैरों के पंजे एक साथ लाएं। दोनों एडिय़ां प्यूबिक बोन की ओर रहें। रीढ़ सीधी रखें और हाथों से पंजों को पकड़ते हुए घुटनों को सीने तक लाएं। गहरी सांस लें और छोड़ें।
लाभ : शारीरिक व मानसिक स्ट्रेस कम करने में मदद मिलती है। पाचन में सुधार होता है। हार्टबर्न की समस्या में सुधार होता है। पेल्विक मांसपेशियों के साथ ही हिप्स और जांघों को स्ट्रेचिंग व ढीला होने में सहायता मिलती है। इससे सामान्य प्रसव की संभावनाएं बढ़ती हैं।
ताड़ासन
विधि: चित्रानुसार सीधे खड़े हो जाएं कि दोनों एडिय़ां एक-दूसरे को छुएं। दोनों हथेलियों को मिलाकर हाथ सीधे करते हुए एक साथ सिर के पीछे तक ऊपर ले जाएं। पैर ऊपर उठाते हुए उंगलियों के बल खड़े हों। अब वापस नीचे आएं। लाभ : रीढ़ की हड्डी मजबूत होती है। कमर में दर्द व उच्च रक्तचाप में राहत मिलती है। मांसपेशियां फिट व शेप में रहती हैं।
वज्रासन
विधि: घुटनों को मोडक़र आगे की तरफ मिलाकर बैठ जाएं। पीछे पैरों से वी शेप बनाएं। इस स्थिति में गहरी सांस लें और छोड़ें।
लाभ : गर्भाशय में खून का स्राव तेज होता है जिससे शिशु के विकास में मदद मिलती है। मॉर्निंग सिकनेस (जी मिचलाना, उल्टी होना) दूर होती है। गैस व एसिडिटी में राहत मिलती है। कब्ज की समस्या भी दूर होती है।
Published on:
25 Aug 2023 06:56 pm

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