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बदलती लाइफस्टाइल का दुष्प्रभाव है नि:संतानता, जानिए क्या है उपाय

निसंतानता गंभीर समस्या है। बदलती लाइफस्टाइल का असर संतान सुख पर भी पड़ रहा है। ऐसा देखा गया है कि 30 फीसदी इनफर्टिलिटी पुरुषों के कारण, 30 फीसदी महिलाओं की वजह से और 30 फीसदी दोनों की वजह से होती है। शेष 10 फीसदी मामलों में कारण अज्ञात हैं। यहां हम महिला व पुरुष में निसंतानता के कारण बताएंगे।

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जयपुर

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Jyoti Kumar

Jun 29, 2023

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Childlessness in women in changing lifestyle

निसंतानता गंभीर समस्या है। बदलती लाइफस्टाइल का असर संतान सुख पर भी पड़ रहा है। ऐसा देखा गया है कि 30 फीसदी इनफर्टिलिटी पुरुषों के कारण, 30 फीसदी महिलाओं की वजह से और 30 फीसदी दोनों की वजह से होती है। शेष 10 फीसदी मामलों में कारण अज्ञात हैं। यहां हम महिला व पुरुष में निसंतानता के कारण बताएंगे।

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महिलाओं में कारण
वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ, डॉ. औबी नागर के अनुसार, महिलाओं में फर्टिलिटी की सही उम्र 20-25 वर्ष होती है लेकिन शादी देर से होने, उसके बाद भी गर्भनिरोधक चीजों के उपयोग से ओवेरी की उम्र कम हो जाती है। ओवेरियन रिजर्व (कितने एग उपलब्ध हैं जिनसे प्रेग्नेंसी हो सके) उम्र बढऩे के साथ कम होता जाता है।

पीसीओडी: पॉलिसिस्टिक ओवेरियन डिजीज में एग्स तो बनते हैं, लेकिन ओवेल्युशन नहीं होता। पीरियड्स अनियमित हो जाते हैं। वजन बढऩे लगता है।
हार्मोन: थाइरॉइड व प्रोलेक्टिन हार्मोन से भी फर्टिलिटी प्रभावित होती है। प्रेग्नेंसी में दिक्कत आती है।

कम उम्र में सेक्सुअली एक्टिव होना: इससे पेल्विक इन्फ्लेमेटरी डिजीज होती है जो कि ओवेरियन ट्यूब्स को ब्लॉक कर देती हैं।
जननांगों की टीबी: यह ओवरी, यूट्रस और ओवेरियन ट्यूब्स पर प्रभाव डालती है।

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एशरमैन सिन्ड्रोम: अनवांटेड प्रेग्नेंसी होने पर डीएनसी-एमटीपी कराने से बच्चेदानी की परत पर नुकसान होने से एशरमैन सिन्ड्रोम होता है।

पुरुषों में कारण
निसंतानता के पुरुषों में भी कई कारण हैं स्पर्म काउंट कम होना, स्पर्म की गतिशीलता कम होना, पुरुषों का टाइट कपड़े पहनना, उससे अंडकोष के तापमान पर असर पड़ता है। अंडकोष के लिए तापमान 36 डिग्री तक होना चाहिए। संक्रमण आदि कई कारण हैं।

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इलाज: आइयूआइ
यह इंट्रा यूटराइन इनसेमिनेशन है। इसमें सीमन को गाढ़ा और साफ कर यूट्रस में छोड़ा जाता है। उससे प्रेग्नेंसी की संभावना बढ़ती है। यह अक्सर उन मामलों में किया जाता है जिनमें स्पर्म की सक्रियता बेहद कम होती है।

एआरटी
आइयूआइ के विफलता के बाद आर्टिफिशियल रिप्रॉडक्टिव टेक्नीक का उपयोग करते हैं जिसमें आइवीएफ और इक्सी दो तकनीकें उपयोग में ली जाती हैं। आइवीएफ में स्पर्म और एक अंडे को साथ छोड़ देते हैं और उन्हें स्वत: ही मिश्रित होने देते हैं जबकि इक्सी में एक अंडे में एक स्पर्म को इंजेक्ट किया जाता है।

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