खराब दिनचर्या और ज्यादा भागदौड़ के बीच थायरॉइड रोगियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। लेकिन जन्मजात बीमारियां और ऑटो इम्युन डिजीज भी इसके प्रमुख कारण हैं। अलग-अलग अध्ययनों की मानें तो भारत में करीब 4-4.5 करोड़ इसके रोगी हैं। इनमें महिलाएं सबसे ज्यादा होती हैं।
खराब दिनचर्या और ज्यादा भागदौड़ के बीच थायरॉइड रोगियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। लेकिन जन्मजात बीमारियां और ऑटो इम्युन डिजीज भी इसके प्रमुख कारण हैं। अलग-अलग अध्ययनों की मानें तो भारत में करीब 4-4.5 करोड़ इसके रोगी हैं। इनमें महिलाएं सबसे ज्यादा होती हैं।
क्या है थायरॉइड
थायरॉइड तितली के आकार की एक ग्रंथि है जो गर्दन के बीच में नीचे की ओर होती है। एंडोक्रॉइन ग्रंथि है यानी जिसमें नलिका नहीं होती है। यह हार्मोन बनाती है। इसमें कई बार समस्या हो जाती है तब हार्मोन कम या ज्यादा बनने से दिक्कत होती है।
थायरॉइड के प्रकार
थायरॉइड की समस्या दो तरह की होती है। एक हाइपरथायरॉइड और दूसरी हाइपोथायरॉइड। हाइपर में हार्मोन अधिक मात्रा में बनने लगता है, जबकि हाइपो में मात्रा कम हो जाता है। दोनों ही तरह में हार्मोन उत्पादन संतुलन में नहीं होता है।
लक्षणों का नहीं पता
नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया में हर आठ में से एक महिला को थायरॉइड है लेकिन 60त्न महिलाएं लक्षणों के बारे में अनजान हैं क्योंकि थायरॉइड के शुरुआती लक्षणों को दूसरी अन्य बीमारी मान लेती हैं।
अन्य बीमारियों की आशंका
कई रिसर्च बताते हैं कि थायरॉइड के साथ कई दूसरी बीमारियों की आशंका बढ़ती है। इनमें अस्थमा, कोलेस्ट्रॉल, डिप्रेशन, डायबिटीज, इंसोमनिया, हार्ट डिजीज, ब्रेन स्ट्रोक, बांझपन, अल्जाइमर या मृत्यु भी हो सकती है।
कब जांच कराना जरूरी?
35 साल के बाद नियमित जांच करवाएं। जांच हर पांच साल में दोबारा कराएं। फैमिली हिस्ट्री या फिर लक्षण दिख रहे हैं तो भी इसकी जांच करवाएं। गर्भवती या नवजात शिशु की भी जांच करवानी जरूरी है।
संभावित लक्षण
अचानक वजन बढऩा या कम होना, माहवारी में असंतुलन, पीसीओडी की समस्या होना उच्च रक्तचाप, पर्याप्त नींद के बाद भी सुस्ती व थकान, ड्राई स्किन और बालों को झडऩा, कब्ज, चिड़चिड़ापन, हताशा या बिना कारण के तनाव, अत्यधिक पसीना आना, उभरी हुई आंखें और निसंतानता की समस्या आदि इसके प्रमुख लक्षण हैं।
संभावित कारण
फैमिली हिस्ट्री वाले लोगों में इसका खतरा ज्यादा रहता है। जिन्हें टाइप वन डायबिटीज है, बढ़ती उम्र, अधिक तनाव, पहले की गई थायरॉइड सर्जरी और डाउन या टर्नर सिंड्रोम के चलते भी थायरॉइड हो सकता है।