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5 जुलाई को लेकर इस देश में मची खलबली, ‘The Future I Saw’ ने की भयानक भविष्यवाणी

Prediction for Japan: जापान की 'The Future I Saw' मैगज़ीन में 5 जुलाई 2025 को लेकर भीषण प्राकृतिक आपदा आने की भविष्यवाणी की गई थी। जिसके चलते लोगों में डर का माहौल है।

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भारत

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Devika Chatraj

Jul 04, 2025

जापान के लिए भयानक भविष्यवाणी (AI Image)

5 जुलाई 2025 को लेकर जापान में बेचैनी और असहजता का माहौल है। इसकी वजह एक पुराना मंगा (कॉमिक बुक) है, जिसमें इस तारीख को एक भीषण प्राकृतिक आपदा आने की भविष्यवाणी की गई थी। रयो तात्सुकी द्वारा वर्ष 1999 में प्रकाशित मंगा 'The Future I Saw' (जिसका एक विस्तारित संस्करण 2021 में सामने आया) ने इससे पहले 2011 में आई विनाशकारी सुनामी की भी सटीक भविष्यवाणी की थी। इस वजह से लोग इस बार भी आशंकित हैं। हालांकि जापान की मौसम विज्ञान एजेंसी ने स्पष्ट कर दिया है कि इस प्रकार की भविष्यवाणियों को गंभीरता से नहीं लिया जाना चाहिए, फिर भी जनता के बीच भय और घबराहट का माहौल बन गया है।

पर्यटन और यात्रा पर असर

टोक्यो, ओसाका और फुकुओका जैसे प्रमुख शहरों में सैकड़ों की संख्या में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय फ्लाइट्स और होटल बुकिंग्स को लोग रद्द कर रहे हैं। हांगकांग की ग्रेटर बे एयरलाइंस ने बताया कि जापान की उड़ानों के लिए बुकिंग में 30 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई है, जिसके चलते उन्होंने कई उड़ानों में कटौती की है। टूर एजेंसियां और होटल प्रबंधन पैनिक कैंसिलेशन के चलते भारी नुकसान की आशंका जता रहे हैं। नोमुरा रिसर्च इंस्टीट्यूट का अनुमान है कि अगर यह रुझान जारी रहा तो पर्यटन उद्योग को लगभग 560 अरब येन (करीब 3.9 अरब डॉलर) तक का नुकसान उठाना पड़ सकता है।

अफवाह व सतर्कता में हो संतुलन

देश के अलग-अलग प्रांतों के गवर्नर लोगों से अपील कर रहे हैं कि इस तरह की अफवाहों से सावधान रहें, क्योंकि ये स्थिति को और तनावपूर्ण बना सकती हैं। वहीं, कुछ ज्योतिषियों और फेंग शुई विशेषज्ञों ने जून से अगस्त के बीच बड़े भूकंप की संभावना जताकर लोगों की चिंता और बढ़ा दी है।

सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय

सोशल मीडिया पर कई लोग इन भविष्यवाणियों का मजाक उड़ाते हुए नजर आ रहे हैं, लेकिन बड़ी संख्या में लोग फिर भी एहतियातन अपनी यात्रा योजनाएं स्थगित कर रहे हैं। विशेषज्ञों की राय है कि जापान जैसे भूकंप-संवेदनशील देश में सतर्कता बेहद जरूरी है लेकिन डर के बजाय वैज्ञानिक और व्यावहारिक दृष्टिकोण के साथ।

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