
Retired General Shah Mahmood Niazi
Army Retired General: झुकी हुई कमर, शरीर पर ढीला-ढाला फटा हुआ कुर्ता, कांपते हुए हाथों से बेर लादे हुए ठेले को आगे बढ़ाते हुए जब बूढ़े कदम पर सड़क पर उतरते हैं, तो बच्चे उछलते हुए उस बेर (Plum) वाले के पास आ जाते हैं। कितने सस्ते, कितने महंगे, इससे उस बूढ़े आदमी को कोई फर्क नहीं पड़ता, बस वो दिन भर में इतना कमाना चहता है कि दो जून की रोटी उसे और उसके परिवार को मिल जाए। लेकिन जब इस बूढ़े आदमी के बारे में थोड़ा और पता चलता है कि तो हर किसी के पैरों तले जमीन खिसक गई और तन-बदन में मारे गुस्से के आग लग गई। क्योंकि ये कोई साधारण बेर बेचने वाला नहीं था बल्कि ये सेना का रिटायर्ड जनरल है। जी हां एक देश की सेना की कमान संभालने वाले शख्स की ये दुर्दशा सुनकर ही खून खौल जाता है। लेकिन इन रिटायर्ड जनरल को सड़कों पर चिलचिलाती धूप में बेर बेचने को किसने मजबूर किया ये बात हम आपको बता रहे हैं।
अफगानिस्तान सेना के इस रिटायर्ड जनरल का नाम शाह महमूद नियाज़ी (Shah Mahmood Niazi) है। इन्होंने 1958 में UK यानी यूनाइटेड किंगडम के रॉयल मिलिट्री अकादमी से पढ़ाई की है। इसके बाद सेना में लेफ्टिनेंट के पद पर भर्ती हुए। 1990 में जब ये रिटायर हुए तब वो अफगानिस्तान सेना के जनरल थे। अफगानिस्तान में 1992 से 1996 तक चले सिविल वॉर में इन्होंने अपने दो बेटों को खो दिया और तीसरे बेटे ने 2021 में हुए एक आत्मघाती हमले में जान गंवा दी।
तालिबान के 15 अगस्त 2021 को अफगानिस्तान पर कब्जा करने के बाद से तो अफगानिस्तान की सेना की हालत और खराब हो गई थी। कई सेना के जवान और अधिकारियों ने दूसरे देशो में भागकर अपनी जान बचाई और कई तो तालिबान के जंजाल में फंसे रह गए और तालिबान के हाथ की कठपुतली बन गए।
तालिबान के इस आतंक का शिकार नियाज़ी भी हुए। उन्होंने तालिबान की गुलामी को ठोकर मार कर सड़कों पर बेर बेचना स्वीकार किया। बीते 3 सालों से वो अपनी पत्नी और बहू के साथ कंधार में अकेले रहते हैं। सड़कों पर बेर बेचकर अपना और अपने परिवार का पेट पाल रहे हैं। नियाज़ी दान या हैंडआउट स्वीकार नहीं करते है। 88 साल की उम्र में भी वो अपने 3 लोगों के छोटे से परिवार को चलाने के लिए कड़ी मेहनत करते हैं।
Updated on:
29 Oct 2024 11:55 am
Published on:
31 Aug 2024 04:45 pm
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