
Bangladesh mukti
Bangladesh Coup: भारत ने बांग्लादेश ( Bangladesh) को आजाद करवाने में अहम किरदार निभाया था और अब प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे कर शेख हसीना ( Sheikh hasina) ने भारत पहुंचना ही बहुत उचित समझा। राजनयिक स्तर पर इस दिशा में घटनाक्रम बदलता हुआ महसूस हो रहा है।
भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से लगातार अपील की थी कि पूर्वी पाकिस्तान की स्थिति सुधारी जाए, लेकिन किसी देश ने ध्यान नहीं दिया और जब वहां के विस्थापित लगातार भारत आते रहे तो अप्रेल 1971 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ( Indira Gandhi) ने मुक्ति वाहिनी ( Mukti Vahini ) को समर्थन देकर, बांग्लादेश को आजाद करवाया था।
ध्यान रहे कि बांग्लादेश का स्वतंत्रता संग्राम 1971 में हुआ था, इसे 'मुक्ति संग्राम' भी कहते हैं। यह युद्ध वर्ष 1971 में 25 मार्च से 16 दिसंबर तक चला था। इस रक्तरंजित युद्ध के माध्यम से बांलादेश ने पाकिस्तान से स्वाधीनता प्राप्त की। 16 दिसंबर सन् 1971 को बांग्लादेश बना था।
बांग्लादेश मुक्ति युद्ध, जिसे बांग्लादेश स्वतंत्रता संग्राम के रूप में भी जाना जाता है और बांग्लादेश में मुक्ति युद्ध के रूप में जाना जाता है, एक सशस्त्र संघर्ष था, जो बंगाली राष्ट्रवादी और स्व. -पूर्वी पाकिस्तान में दृढ़ संकल्प आंदोलन, के परिणामस्वरूप बांग्लादेश की स्वतंत्रता हुई। युद्ध तब शुरू हुआ जब याह्या खान के आदेश के तहत पश्चिमी पाकिस्तान में स्थित पाकिस्तानी सैन्य शासन ने 25 मार्च 1971 की रात को पूर्वी पाकिस्तान के लोगों के खिलाफ ऑपरेशन सर्चलाइट शुरू किया गया, जिससे बांग्लादेश नरसंहार की शुरुआत हुई।
हिंसा के जवाब में, मुक्ति वाहिनी के सदस्यों - बंगाली सेना, अर्धसैनिक और नागरिकों दकी ओर से गठित एक गुरिल्ला प्रतिरोध आंदोलन - ने पाकिस्तानी सेना के खिलाफ बड़े पैमाने पर गुरिल्ला युद्ध किया, और युद्ध के शुरुआती महीनों में कई कस्बों और शहरों को मुक्त कराया। सबसे पहले, पाकिस्तानी सेना ने मानसून के दौरान गति पकड़ ली, लेकिन, बंगाली गुरिल्लाओं ने बड़े पैमाने पर तोड़फोड़ करके जवाबी हमला किया, जिसमें पाकिस्तान नौसेना के खिलाफ ऑपरेशन जैकपॉट भी शामिल था, जबकि नवोदित बांग्लादेश वायु सेना ने पाकिस्तानी सैन्य ठिकानों के खिलाफ उड़ान भरी।
वहीं 3 दिसंबर 1971 को पाकिस्तान की ओर से उत्तरी भारत पर एहतियाती हवाई हमले शुरू करने के बाद भारत युद्ध में शामिल हो गया। इसके बाद के भारत-पाकिस्तान युद्ध में दो मोर्चों पर लड़ाई शामिल थी, पूर्वी क्षेत्र में हवाई वर्चस्व हासिल करने और मुक्ति वाहिनी की सहयोगी सेनाओं और भारतीय सेना की तेजी से प्रगति के साथ, पाकिस्तान ने 16 दिसंबर 1971 को ढाका में आत्मसमर्पण कर दिया, जो द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से सशस्त्र कर्मियों का सबसे बड़ा आत्मसमर्पण है।
पूर्वी पाकिस्तान के ग्रामीण और शहरी इलाकों में 1970 के चुनावी गतिरोध के बाद पैदा हुए सविनय अवज्ञा के ज्वार को दबाने के लिए व्यापक सैन्य अभियान और हवाई हमले हुए। इस्लामवादियों की ओर से समर्थित पाकिस्तानी सेना ने स्थानीय आबादी पर छापे के दौरान सहायता करने के लिए कट्टरपंथी धार्मिक मिलिशिया- रजाकार, अल-बद्र और अल-शम्स- का निर्माण किया।
तब पाकिस्तानी सेना और समर्थक मिलिशिया के सदस्य सामूहिक हत्या, निर्वासन और नरसंहार बलात्कार में लगे हुए हैं, जो राष्ट्रवादी बंगाली नागरिकों, छात्रों, बुद्धिजीवियों, धार्मिक अल्पसंख्यकों और सशस्त्र कर्मियों के खिलाफ विनाश का एक व्यवस्थित अभियान चला रहे हैं। . राजधानी, ढाका, ढाका विश्वविद्यालय नरसंहार सहित कई नरसंहारों का स्थल थी। बंगालियों और उर्दू भाषी बिहारियों के बीच भी सांप्रदायिक हिंसा भड़क उठी। एक अनुमान के अनुसार 10 मिलियन बंगाली शरणार्थी पड़ोसी भारत में भाग गए, जबकि 30 मिलियन आंतरिक रूप से विस्थापित हुए।
युद्ध ने दक्षिण एशिया के भू-राजनीतिक परिदृश्य को बदल दिया, बांग्लादेश दुनिया के सातवें सबसे अधिक आबादी वाले देश के रूप में उभरा। जटिल क्षेत्रीय गठबंधनों के कारण, युद्ध संयुक्त राज्य अमेरिका, सोवियत संघ और पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना से जुड़े शीत युद्ध के तनाव का एक प्रमुख प्रकरण था। संयुक्त राष्ट्र में अधिकतर सदस्य देशों ने 1972 में बांग्लादेश को एक संप्रभु राष्ट्र के रूप में मान्यता दी। आज उसी बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना इस्तीफा दे कर भारत पहुंची हैं।
Updated on:
05 Aug 2024 05:53 pm
Published on:
05 Aug 2024 05:53 pm
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