
Reservation: आपने अक्सर भारत देश में आरक्षण को लेकर के कई तरह के विवाद देखे होंगे। आरक्षण का विवाद ऐसा रहा है जिसमें सैकड़ों लोगों की मौत तक हुई। आपको जानकर हैरानी होगी कि आरक्षण का मुद्दा (Reservation in India) भारत में ही नहीं बल्कि कई देशों में है। इसका ताजा उदाहरण है बांग्लादेश है। बांग्लादेश में शेख हसीना (Sheikh Hasina) के प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद भी लगातार हिंसा जारी है। हैरानी की बात ये है कि तख्तापलट होने के बाद यह दंगा और भी ज्यादा बढ़ गया है। ऐसे में हर कोई यह जानना चाह रहा है कि जब पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है और देश छोड़कर भाग गई हैं, बांग्लादेश (Bangladesh) में नई सरकार बन गई है, बावजूद इसके यह हिंसा खत्म होने का नाम क्यों नहीं ले रही है। क्यों हिंदू (Hindu) और समेत अल्पसंख्यकों को टारगेट किया जा रहा है? क्यों पूरे बांग्लादेश को हिंसा की आग में झोंका जा रहा है? तो बता दें कि बांग्लादेश में जिस मुद्दे पर हिंसा शुरू हुई थी इसका निपटारा अभी नहीं हुआ है, इसलिए यह हिंसा जारी है। यह मुद्दा नौकरी में आरक्षण के कोटा सिस्टम का था। अब यह कोटा सिस्टम क्या है, किस लिए इस पर इतना विवाद छिड़ा हुआ है और हिंदुओं को इस कोटा सिस्टम से क्या मिलेगा, ये हम आपको बता रहे हैं।
दरअसल प्रदर्शनकारी छात्र 1971 में बांग्लादेश की आज़ादी के लिए लड़े गए संग्राम में लड़ने वाले नायकों के परिवार के सदस्यों के लिए सरकारी नौकरी का कोटा (Reservation) खत्म करने की मांग कर रहे हैं। इस कोटा में महिलाओं, दिव्यांगों और जातीय अल्पसंख्यक समूहों के लिए सरकारी नौकरियां भी आरक्षित है। साथ ही बांग्लादेश के 1971 के स्वतंत्रता संग्राम के नायकों के परिवार के सदस्यों को भी नौकरी दी जाती है। साल 2018 में इस सिस्टम को निलंबित कर दिया गया था जिससे उस समय इसी तरह के विरोध प्रदर्शन रुक गए थे। लेकिन पिछले महीने बांग्लादेश के उच्च न्यायालय ने एक फैसला दिया था जिसके मुताबिक 1971 के दिग्गजों के आश्रितों के लिए 30% कोटा बहाल करना था।
प्रदर्शनकारी छात्र इस कोटा के तहत महिलाओं, दिव्यांगों और जातीय अल्पसंख्यकों के लिए 6% कोटा का तो समर्थन कर रहे हैं लेकिन वो ये नहीं चाहते कि इसका लाभ 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के दिग्गजों के परिवार के सदस्यों को मिले। इसलिए इस फैसले का विरोध शुरू हो गया जो अब भीषण हिंसा में बदल चुका है।
इस हिंसा को देखते हुए यह मामला बांग्लादेश के सुप्रीम कोर्ट तक चला गया था। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर फैसला दिया कि नौकरी में आरक्षण में दिव्यांगों, महिलाओं और बांग्लादेश की आजादी में योगदान देने वाले क्रांतिकारियों के परिवारों को जो 30% का कोटा दिया जाता है, उसे घटाकर 5% कर दिया जाए लेकिन प्रदर्शनकारी छात्र सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को भी नहीं मान रहे हैं। उनका कहना है कि इन क्रांतिकारियों के परिवारों को 5% भी कोटा नहीं मिलना चाहिए, इन्हें कोटा मिलना ही नहीं चाहिए। इसलिए बांग्लादेश में ये हिंसा अभी तक थमी नहीं है। ये हिंसा तभी थमेगी, जब आरक्षण में कोटा के इस मामले पर कोई फैसला उनके मन मुताबिक आएगा।
अब सवाल ये आता है कि ये प्रदर्शनकारी आरक्षण के कोटा सिस्टम का जो विरोध कर रहे हैं, क्या उसमें हिंदुओं को भी आरक्षण मिला हुआ है तो इसका जवाब यह है कि इस कोटा के तहत 1971 के क्रांतिकारियों के परिवारों को कोटा दिया जा रहा है। तो अगर इस क्रांति में हिस्सा लेने वाले हिंदू हैं तो इस आरक्षण का फायदा इन हिंदू परिवारों को भी मिलेगा। वर्तमान में जो कोटा सिस्टम है उसके मुताबिक, 1971 के क्रांतिकारी की परिवार के लिए 30 प्रतिशत, महिलाओं और अविकसित जिलों के नागरिकों के लिए 10-10 प्रतिशत, जातीय अल्पसंख्यकों के लिए 5 प्रतिशत और दिव्यांगों के लिए 1 प्रतिशत आरक्षण का सिस्टम है। यानी जनरल कैटेगरी के लोग देश की 44 प्रतिशत सरकारी नौकरियों के लिए अप्लाई कर सकते हैं। हालांकि अब सुप्रीम कोर्ट ने इस घटा कर 5 प्रतिशत करने के फैसला दिया है।
Updated on:
29 Oct 2024 12:33 pm
Published on:
13 Aug 2024 12:20 pm

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