
डॉक्टरों की कमी से जूझता ब्रिटेन एक बार फिर देश में अच्छी जानकारी वाले डॉक्टरों की कमी को पूरा करने के लिए भारत से 2000 डॉक्टरों को फॉस्ट-ट्रेक आधार पर भर्ती करने पर विचार करने जा रहा है। इन डॉक्टर्स के पहले बैच को ब्रिटेन में पोस्ट ग्रेजुएट की 6 से 12 महीने की ट्रेनिंग देने के बाद अस्पतालों में तैनात किया जाएगा। गौर करने की बात है कि इन डॉक्टरों को ट्रेनिंग पूरा करने के बाद ब्रिटेन में नौकरी करने के लिए प्रोफेशनल्स एंड लिग्विस्टिक असेसमेंट बोर्ड (पीएलएबी) की परीक्षा भी पास नहीं करनी होगी। बताया जा रहा है कि इस प्रोजेक्ट को सीधे ब्रिटिश सरकार की ओर से फंड किया जाएगा।
माना जा रहा है कि यह कदम सीधे ब्रिटेन की जानी-मानी स्वास्थ्य सेवा एनएचएस (नेशनल हेल्ड सर्विस) के अस्पतालों के अपील पर सरकार की ओर से उठाया गया है। इसमें भर्ती डॉक्टरों को स्थाई नौकरी तो नहीं मिलेगी, पर इससे मिला अनुभव डॉक्टरों के साथ देशों के लिए भी अहम होगा। वहीं कुछ लोग इसके प्रति भारत से डॉक्टरों के ब्रेन ड्रेन को लेकर चिंता भी जाहिर कर रहे हैं।
एनएचएस में 25 से 30 फीसदी डॉक्टर विदेशी
जानकारों के अनुसार, विदेश में प्रशिक्षित डॉक्टरों को एनएचएस में भर्ती किया जाना नया नहीं है। इस सेवा में 25 से 30 फीसदी विदेश में प्रशिक्षित डॉक्टर लिए जाते रहे हैं। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की माइग्रेशन ऑब्जर्वेटरी के अनुसार 2022-23 में अप्रत्याशित रूप से बड़ी संख्या में विदेशी हेल्थकेयर वर्कर ब्रिटेन में आए हैं, इसमें भारत से आने वाले डॉक्टरों की संख्या सबसे अधिक 20 फीसदी रही। नर्सिंग स्टॉफ में भारत से आने वाले लोगों की संख्या 46 फीसदी तक रही। इसके बाद नाइजीरिया, पाकिस्तान, फिलीपीन्स के हेल्थवर्कर आते हैं। आंकड़ों के अनुसार, 2022 में सर्टिफिकेट ऑफ स्पान्सरशिप का प्रमाणपत्र हासिल करने वाले कामगरों में भारतीयों की संख्या सर्वाधिक 33 फीसदी रही। इसके बाद इस मामले में जिम्बावे और नाइजीरिया के कामगार रहे।
हेल्थकेयर में सहयोग के नए मानक
ब्रिटेन में काम करने वाले डॉक्टरों के अनुसार, एनएचएस द्वारा भारत में डॉक्टरों को पोस्ट-ग्रेजुएट स्तर का प्रशिक्षण दिया जाना एक महत्वपूर्ण कदम है। हेल्थकेयर में दोनों देशों इस तरह का सहयोग नया कदम है और हेल्थकेयर में सहयोग के नए मानक स्थापित करता है। इससे दोनों देशों में सहयोग बढ़ेगा। साथ ही इस तरह के प्रयासों से दुनिया में हेल्थकेयर का स्तर बढ़ेगा।
2017 के बाद से ब्रिटेन में हेल्थकेयर वर्करों की कमी
आंकड़े बताते हैं कि गैर-यूरोपीयन लोगों की भर्ती ब्रिटेन में 2017 के बाद बढ़ी है। हेल्थकेयर सेक्टर में खाली पदों की संख्या जुलाई से सितंबर के बीच 217000 तक पहुंच गई थी। जिसके बाद पिछले वर्ष 57700 कामगारों को कुशल कामगार का वीजा दिया गया। एक अनुमान के अनुसार, भारत के करीब 30 हजार डॉक्टर फिलहाल ब्रिटेन की प्रतिष्ठित एनएचएस में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
Updated on:
18 Mar 2024 07:37 am
Published on:
18 Mar 2024 07:36 am
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