script फ्यूजन ऊर्जा पैदा करने का वैज्ञानिकों ने बनाया नया रिकॉर्ड,जलवायु परिवर्तन की समस्याएं हल करने में ऐसे मिलेगी मदद | British scientists set a new record in generating fusion energy, this will help in solving the problems of climate change. | Patrika News

फ्यूजन ऊर्जा पैदा करने का वैज्ञानिकों ने बनाया नया रिकॉर्ड,जलवायु परिवर्तन की समस्याएं हल करने में ऐसे मिलेगी मदद

locationनई दिल्लीPublished: Feb 10, 2024 08:42:25 am

Submitted by:

Akash Sharma

यूरोप के वैज्ञानिकों ने 0.2 मिलीग्राम ईंधन से बनाई 69 मेगाजूल एनर्जी फ्यूजन ऊर्जा पैदा करने का नया रिकॉर्ड, जलवायु परिवर्तन की समस्याएं हल करने में मिलेगी मदद

 फ्यूजन ऊर्जा
फ्यूजन ऊर्जा

ब्रिटेन के वैज्ञानिकों ने जॉइंट यूरोपीय टॉरस (जेईटी) मशीनों से फ्यूजन एनर्जी पैदा करने का नया रिकॉर्ड बनाया है। उन्होंने 2022 में हुए प्रयोग से करीब सात गुना ज्यादा ऊर्जा पैदा की। तब 10 मेगाजूल ऊर्जा पैदा की गई थी। इस बार 0.2 मिलीग्राम ईंधन से 69 मेगाजूल ऊर्जा पैदा की गई। वैज्ञानिकों ने बताया किया कि उन्हें न्यूक्लियर फ्यूजन प्रक्रिया से ऊर्जा पैदा करने में ऐतिहासिक कामयाबी मिली है। जेट का यह आखिरी प्रयोग था। इसे अक्षय ऊर्जा की दिशा में बड़ा कदम बताया जा रहा है। न्यूक्लियर फ्यूजन वही रसायनिक प्रक्रिया है, जिससे सूरज में ऊर्जा पैदा होती है।

पहली बार न्यूक्लियर फिजन का प्रयोग 1997 में हुआ

वैज्ञानिकों का मानना है कि इस प्रक्रिया से ऊर्जा पैदा कर जलवायु परिवर्तन जैसी समस्याओं को हल किया जा सकता है, क्योंकि यह ऊर्जा सुरक्षित, स्वच्छ और मात्रा में कहीं ज्यादा होती है।यह प्रयोग यूरोफ्यूजन नाम के समूह ने किया। इसमें यूरोप के 300 से ज्यादा वैज्ञानिक और इंजीनियर शामिल हैं। पहली बार न्यूक्लियर फिजन का प्रयोग 1997 में शुरू हुआ था।

41 हजार मकानों की बिजली सप्लाई के बराबर

ब्रिटेन की एटॉमिक एनर्जी अथॉरिटी के मुताबिक ऑक्सफोर्ड के पास जेट संस्थान में पांच सेकंड तक जो 69 जूल ऊर्जा पैदा की गई। यह 41 हजार मकानों की बिजली सप्लाई के बराबर है। इस प्रयोग में डोनट के आकार की मशीन का इस्तेमाल किया गया, जिसे टॉकमैक कहा जाता है। जेट ने उन्हीं परिस्थितियों में प्रयोग किया, जो बिजली संयंत्रों में होती हैं।

पूरी दुनिया को होगा फायदा

वैज्ञानिकों का कहना है कि जेट में हुए प्रयोग का फायदा पूरी दुनिया को होगा। इस प्रयोग का इस्तेमाल न सिर्फ फ्रांस में फ्यूजन रिसर्च के लिए बनाए जा रहे विशाल संयंत्र में होगा, बल्कि सुरक्षित और कम कार्बन वाली ऊर्जा पैदा करने की कोशिशों में जुटीं दुनियाभर की फ्यूजन परियोजनाओं को भी इससे मदद मिलेगी।

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